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Tuesday, April 21, 2026

एमसीयू में मना पीआर डे, जनसंपर्क अधिकारियों ने बताए पी आर के गुण


 एम सी यू में मना जनसंपर्क दिवस

नित्य संदेश ब्यूरो

भोपाल. राष्ट्रीय जनसम्पर्क दिवस के अवसर पर एमसीयू के जनसम्पर्क विभाग में एक खूबसूरत आयोजन हुआ. 

इस आयोजन में कई प्रतिष्ठित जनसम्पर्क अधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए और विद्यार्थियों को इस विधा की बारीकियों से अवगत कराया. 

विकसित भारत 2047 के निर्माण में सीएसआर और पीआर की भूमिका और समन्वय पर प्रकाश डालते हुए सर्वप्रथम कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने सम्बोधित किया. उन्होंने कहा कि वर्क से ज्यादा नेटवर्क का महत्त्व है. यूनान की सरहद से हज़ारों विद्यार्थी चाणक्य से शिक्षा लेने आते थे. बाद में जब वे अपने अपने देश लौटते थे और मगध के खिलाफ कोई भी साजिश अगर पनप रही होती थी तो कोई न कोई उनका शिष्य इस जानकारी को चाणक्य तक पहुंचा ही देता था. समाज और शासन के कल्याण के लिए होने वाले जनसम्पर्क का इससे बेहतर उदाहरण कहाँ मिलेगा? 

अतिथियों को उपहार स्वरुप दी गई पुस्तकों के बारे में उन्होंने बताया कि  ये किताबें हम सबको पढ़नी चाहिए. अमृतलाल नागर की 'नाच्यो बहुत गोपाल',विनोद कुमार शुक्ल की 'दीवार में खिड़की रहती है' और तोताराम सनाढय की गिरमिटिया पर आधारित किताब पर उन्होंने विस्तार से जानकारी दी. जनसम्पर्क अधिकारियों के स्वागत में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के बच्चे आपके साथ जुड़कर कैसे अपने आपको तैयार कर सकते हैं इस पर विचार करने की आवश्यकता है. 

अमृतेश श्रीवास्तव (एन पी सी आई एल -मुंबई ) ने खुशियों की स्क्रिप्ट फ़िल्म के माध्यम से  बताया कि कैसे सीएसआर और पी आर मिलकर जनकल्याण के काम सुगमता से कर सकते हैं. बिना सीएसआर के पीआर संभव नहीं और बिना पीआर के सीएसआर को आगे बढ़ाना मुश्किल है. अगर देश को मजबूत बनाना है तो राज्यों को सशक्त करना होगा और राज्यों को ताकत देनी है तो शहर और गाँव को समृद्ध बनाना होगा. वहां संचालित सामाजिक दायित्व की गतिविधियों में तेजी और समर्पण लाना होगा. मदद करना पुण्य का काम है लेकिन अगर आप किसी के जीवन और समृद्धि को ही अपने प्रयासों से बदल देते हैं तो यह महा पुण्य का काम है. उन्होंने तारा नामक महिला की सफल कहानी सुनाई जिसे सिलाई का शौक था. उसे निशुल्क सिलाई मशीन दिलवाकर ट्रेनिंग दिलवाई गई. उस तारा ने न सिर्फ गाँव में अपना पहला बुटीक खोला बल्कि आज उसके डिज़ाइन किए कपड़े ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में लोकप्रिय हो रहे हैं. उसी तरह से वारली समाज का एक बच्चा जरा सी मदद से आज इतना आगे है कि गूगल में जॉब कर रहा है.

मनीष गौतम(पीआईबी-भोपाल) ने कहा कि सरकारी नीतियों को सही माध्यम से सही व्यक्ति तक पहुँचाना ही बड़ा दायित्व है. उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि स्पीड के पीछे न भागे सत्य को साथी बनाएँ. 

विक्रम रावत (एन एफ एल विजय पुर गुना) ने कहा कि जनसम्पर्क अधिकारी का शब्द संसार और संचार कौशल निरंतर अध्ययन से ही निखरेगा. 

विषय पर उनके विचार थे कि किसी भी माध्यम से जनकल्याण के लिए अगर बदलाव किया गया है तो वह बदलाव दिखना चाहिए. पी आर की पहल से पहले सी एस आर महसूस होना चाहिए. उन्होंने एम सी यू के समुदायिक रेडियो रेडियो कर्मवीर का उल्लेख भी किया कि कैसे उनके साथ मिलकर जन उपयोगी प्रोग्राम को प्रसारित किया जा रहा है.

सीएसआर और पीआर का गठबंधन शुभ है

पारस पाठक (जिंदल स्टील, रायगढ़) ने कहा कि जनसम्पर्क विश्वास हासिल करने की एक कला है. पब्लिक रिलेशन का नया अर्थ अब परपसफुल रिलेशन है. समाज में रहने वाले अंतिम व्यक्ति का जीवन भी बेहतरी की ओर अग्रसर हो यही सी एस आर का असली उद्देश्य है और वह कहानी फिर जन जन तक सही रूप में पहुंचे यह पी आर की जिम्मेदारी है. पी आर मजबूत लेकिन जमीनी स्तर पर सी एस आर कमजोर है तो आपकी साख प्रभावित होगी. अतः सी एस आर के काम को समाज तक कुशलता पूर्वक ले जाना ही पी आर का मुख्य दायित्व है. 

अब सी एस आर और पी आर का ट्रेंड बदल रहा है. लोगों को आत्मनिर्भर बनाना सी एस आर का पहला उद्देश्य होना चाहिए. सभी ने श्रोता विद्यार्थियों से कहा कि कंटेंट बनाएँ पर कॉन्टेक्स्ट भी समझें. हमें ट्रस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करना होगा तभी विकास आंकड़ों में नहीं जीवन में दिखेगा.

काम के साथ व्यवहार ज्यादा महत्वपूर्ण है. जनसम्पर्क के टूल्स में अब आपके चेहरे की मुस्कान भी शामिल है. सी एस आर और पी आर का गठबंधन शुभ है यह लम्बा चलेगा. दोनों एक दूजे के बिना अधूरे हैं।

अलग अलग सत्रों में  अशोक मनवानी, अंकिता दास, सौरभ पवार, मनोज द्विवेदी, अमृतांशी जोशी, कीर्ति चतुर्वेदी, आयुष ओझा, अभय कर्ण, आरती श्रीवास्तव, विभोर शर्मा  सहित अन्य अधिकारी गण ने भी अपने विचार व्यक्त किए. 

आरंभ में स्वागत उद्बोधन विभागाध्यक्ष डॉ.पवित्र श्रीवास्तव ने दिया और जनसम्पर्क दिवस की बधाई देते हुए कहा कि दिवस हम पहले भी मनाते आए हैं पर यह पहला मौका है जब इतने अधिकारी एक साथ एक जगह पर हैं. 

इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों द्वारा आपदा प्रबंधन पर नाटिका प्रस्तुत की गई और उनके द्वारा तैयार विज्ञापन भी दिखाए गए. 

अतिथियों ने सवाल जवाब सत्र में जिज्ञासा समाधान भी किया.

कार्यक्रम का संचालन डॉ.जया सुरजानी ने किया. अतिथि स्वागत प्रो. संजय द्विवेदी और डॉ. अविनाश वाजपेयी ने किया. आभार डॉ. दीपिका सक्सेना ने माना.

डॉ पवित्र श्रीवास्तव

विभागाध्यक्ष

जनसंपर्क विभाग

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