नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। मेरठ परिक्षेत्र में बसन्तकालीन गन्ना बुवाई को नई गति देने और रोग एवं कीटों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील गन्ना किस्म को.0238 के चरणबद्ध विस्थापन के उद्देश्य से नोडल अधिकारी डॉ. वी.बी. सिंह का दौरा प्रभावी और परिणामोन्मुख रहा। इस दौरान उन्होंने बसंतकालीन गन्ना बुआई की ग्रामवार प्रगति का गहन मूल्यांकन करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि गन्ना उत्पादन को अब पारंपरिक ढर्रे से निकालकर वैज्ञानिकता और तकनीकी दक्षता के आधार पर आगे बढ़ाना होगा।
डॉ. वी.बी. सिंह ने समीक्षा बैठक में कहा कि गन्ने की खेती में सफलता अब केवल मेहनत से नहीं, बल्कि “स्मार्ट फार्मिंग” से तय होगी। उन्नत किस्मों का चयन, आधुनिक बुवाई तकनीकें, संतुलित पोषण प्रबंधन और नवीन कृषि उपकरणों का समुचित उपयोग ही किसानों की आय बढ़ाने का वास्तविक आधार बनेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक तरीकों और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर ही गन्ना खेती में एक नई सफलता की गाथा लिखी जा सकती है। चीनी मिलों की 15 किलोमीटर परिधि के अंतर्गत किए जा रहे विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए इस क्षेत्र को गन्ना उत्पादन का मॉडल क्षेत्र बनाने की रणनीति पर बल दिया गया। सड़क, सिंचाई, जल प्रबंधन, कृषि यंत्रीकरण एवं तकनीकी सहयोग जैसे बुनियादी पहलुओं को सुदृढ़ कर किसानों को अधिकतम सुविधा प्रदान करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए गए। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि मिल क्षेत्र में विकास कार्य सीधे गन्ना उत्पादक किसानों की उत्पादकता और आय वृद्धि से जुड़े हों।
बसन्तकालीन गन्ना बुवाई के अंतर्गत फील्ड भ्रमण एवं किसान गोष्ठियों की प्रगति को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए निर्देशित किया गया कि अधिकारी नियमित रूप से गांवों में जाकर किसानों से सीधा संवाद स्थापित करें। गोष्ठियों के माध्यम से ट्रेंच विधि, ड्रिप सिंचाई, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं उन्नत प्रजातियों के लाभों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाए।
समीक्षा बैठक से पूर्व बसंतकालीन गन्ना बुवाई को नई गति देने हेतु डॉ. वी.बी. सिंह (अपर गन्ना आयुक्त, समितियां) द्वारा क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान जिला मेरठ में दौराला चीनी मिल एवं परिषद क्षेत्र के ग्राम गोटका का निरीक्षण किया गया। कृषक मोहित एवं संतोष के खेतों में ट्रेंच एवं पेयर्ड रो विधि से को० 0118 प्रजाति की बुवाई अत्यंत संतोषजनक पाई गई, जो आधुनिक कृषि तकनीकों के सफल क्रियान्वयन का उदाहरण रही। उन्होंने कृषकों को वैज्ञानिक खेती अपनाकर उत्पादन बढ़ाने हेतु प्रेरित किया।
इसी क्रम में चीनी मिल किनौनी के क्षेत्र अन्तर्गत ग्राम सरूरपुर कलां में भ्रमण के दौरान कृषक संदीप कुमार एवं अमरपाल सिंह के खेतों में सिंगल बड ट्रेंच एवं उन्नत बुवाई तकनीकों का प्रभावी उपयोग देखने को मिला। फसल की बेहतर स्थिति ने क्षेत्र में तकनीकी जागरूकता का सकारात्मक संकेत दिया। कृषकों को उच्च उत्पादकता हेतु नवीन कृषि उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। किनौनी चीनी मिल क्षेत्र के एक अन्य ग्राम करनावल में कृषक मोनू सिंह के खेत में टॉप बोरर कीट का प्रकोप चिन्हित किया गया, जिस पर त्वरित कार्यवाही करते हुए प्रभावी नियंत्रण उपाय लागू कराने हेतु अपर गन्ना आयुक्त ने फील्ड स्टाफ को निर्देशित किया।
क्षेत्र भ्रमण के दौरान अपर गन्ना आयुक्त द्वारा समेकित कीट प्रबंधन पर विशेष जोर देते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश फील्ड स्टाफ को दिए गए, जिससे फसल को नुकसान से बचाया जा सके। बागपत जिले के अर्न्तगतगन्ना विकास परिषद मलकपुर अंतर्गत ग्राम बिनौली में कृषक सुधांशु जैन एवं नीतू जैन के खेतों में ट्रेंच विधि एवं वैज्ञानिक पेड़ी प्रबंधन के उत्कृष्ट परिणाम देखने को मिले। फसल की संतोषजनक स्थिति क्षेत्र में उन्नत कृषि पद्धतियों के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। कृषकों को आधुनिक तकनीकों के निरंतर उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।
बागपत जिले के एक अन्य ग्राम मुजफ्फरपुर कमाला में कृषक ओमपाल राणा, महावीर सिंह एवं नगेन्द्र राणा द्वारा गन्ना के साथ सहफसली खेती (मूंग/सरसों) का सफल प्रयोग किया जा रहा है, जो किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। इस मॉडल को क्षेत्र में व्यापक स्तर पर अपनाने पर बल दिया गया। सहकारी चीनी मिल बागपत के अर्न्तगत ग्राम हिसावदा में कृषक वीरबहादुर सिंह, उत्तर कुमार, अमित एवं आदित्य द्वारा शत-प्रतिशत ट्रेंच विधि, आर.एम.डी. तकनीक एवं जीवामृत के उपयोग से उगाई गई स्वस्थ एवं सघन फसल ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। यह क्षेत्र में उन्नत कृषि नवाचारों के प्रभावी क्रियान्वयन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।
बागपत जिले के अर्न्तगत सहकारी गन्ना विकास समिति, मलकपुर के निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण करते हुए गुणवत्ता एवं मानकों के कड़ाई से अनुपालन के निर्देश दिए गए। पाई गई कमियों को शीघ्र सुधारने के निर्देश देते हुए कार्य को उच्च गुणवत्ता के साथ समयबद्ध पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया गया। बागपत जिले की गन्ना विकास परिषद रमाला के ग्राम एलम में कृषक इकबाल सिंह के खेत में ट्रेंच एवं सहफसली बुवाई का प्रभावी क्रियान्वयन देखा गया, जहां फसल की स्थिति संतोषजनक पाई गई। इस अवसर पर तकनीकी अनुशंसाओं के पूर्ण अनुपालन एवं क्षेत्र विस्तार के महत्व को रेखांकित किया गया।
समग्र रूप से सभी निरीक्षणों में बसंतकालीन गन्ना बुवाई की प्रगति उत्साहजनक एवं संतोषजनक पाई गई। उन्नत कृषि तकनीकों के तीव्र प्रसार, प्रभावी क्रियान्वयन एवं किसानों की बढ़ती जागरूकता को क्षेत्र में कृषि विकास की मजबूत आधारशिला के रूप में चिन्हित किया गया।।वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जिलेवार निर्धारित लक्ष्यों एवं उनकी पूर्ति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया गया कि लक्ष्य प्राप्ति में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। जिन जिलों में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी पाई गई, वहां विशेष अभियान चलाकर बुवाई कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे नियमित समीक्षा कर प्रगति को गति दें तथा हर जिले में लक्ष्य के अनुरूप या उससे अधिक उपलब्धि सुनिश्चित करें, जिससे समग्र उत्पादन में वृद्धि हो सके।
मिश्रित किस्मों एवं रिजेक्ट प्लॉट्स की पहचान को गन्ना गुणवत्ता सुधार का आधार मानते हुए इस दिशा में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को कहा गया कि ऐसे प्लॉट्स की समयबद्ध पहचान कर उन्हें उन्नत एवं रोग-प्रतिरोधी प्रजातियों से प्रतिस्थापित किया जाए। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी बल्कि गन्ने की गुणवत्ता भी बेहतर होगी, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से अधिक लाभ प्राप्त होगा और गन्ना उद्योग को स्थिरता मिलेगी।
बैठक में मेरठ परिक्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त राजीव राय, परिक्षेत्र के समस्त जिला गन्ना अधिकारी, सहायक चीनी आयुक्त, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, अवर अभियंता, सांख्यिकी अधिकारी, सचिव गन्ना/चीनी मिल समितियां तथा समस्त चीनी मिलों के प्रधान प्रबंधक/प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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