नित्य संदेश ब्यूरो
लखनऊ। ्विरद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें प्रदेश भर से लगभग 1000 से अधिक बिजली कर्मचारी एवं अभियंता पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि आंदोलन के फलस्वरूप बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस नहीं ली गईं, तो आने वाली भीषण गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की होगी।
बैठक में यह भी स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि प्रबंधन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए किसी भी कर्मचारी या अभियंता पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करता है, तो बिजली कर्मी कार्यस्थल पर काम छोड़कर बाहर आने को बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। संघर्ष समिति ने 15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशव्यापी “जन-जागरण अभियान” चलाने की घोषणा की है। इस अभियान के अंतर्गत केंद्रीय पदाधिकारी पूरे प्रदेश का व्यापक दौरा करेंगे और प्रत्येक जनपद में बिजली उपभोक्ताओं एवं किसानों के साथ संयुक्त सभाएं आयोजित की जाएंगी। इन सभाओं के माध्यम से बिजली कर्मियों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न के विरुद्ध जनसमर्थन जुटाया जाएगा तथा आम उपभोक्ताओं को यह अवगत कराया जाएगा कि 501 दिनों से चल रहे आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मियों ने उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी और उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया। व्यापक जनजागरण अभियान के तहत 24 अप्रैल को मेरठ डिस्कॉम, 2 मई को केस्को, 6 मई को आगरा, 14 मई को लखनऊ और 21 मई को वाराणसी डिस्कॉम पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जायेगा।
बैठक में पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा गया कि एक ओर जहां बिजली कर्मियों का उत्पीड़न किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी की जा रही है तथा नियमित कर्मचारियों की संख्या लगातार कम की जा रही है, जिससे बिजली व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है। संघर्ष समिति ने मांग की कि आंदोलन के दौरान की गई सभी अनुशासनात्मक एवं उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए तथा सेवा से हटाए गए अनुभवी संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर रखा जाए, ताकि बढ़ती विद्युत मांग के बीच सुचारु एवं निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं एवं किसानों के प्रति पूर्णतः संवेदनशील हैं और उनके सहयोग से ही आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, यह उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रबंधन से बार-बार अपील की जा रही है कि उत्पीड़न की नीति को तत्काल समाप्त किया जाए। संघर्ष समिति ने खेद व्यक्त किया कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद 19 मार्च 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, किन्तु आज तक उन पर अमल नहीं किया गया। इसके विपरीत, नई-नई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां लगातार की जा रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रबंधन की नीतियां निजीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही हैं।
संघर्ष समिति ने दोहराया कि यदि समय रहते उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेकर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। संघर्ष समिति की आज की बैठक में मुख्य रूप से संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे, राहुल बाबू कटियार, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, पी के दीक्षित, सुहेल आबिद, अंकुर पांडेय, चन्द्र भूषण उपाध्याय, मोहम्मद वसीम, बिमल चन्द्र पाण्डेय, मोहम्मद इलियास, प्रेम नाथ राय, श्री चंद, सरजू त्रिवेदी, के एस रावत, सुरेन्द्र सिंह, विशंभर सिंह, सनाउल्लाह, मनोज कुमार, रफीक अहमद ,निखिल कुमार, आलोक त्रिपाठी ने मुख्यतया संबोधन किया।

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