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Friday, May 29, 2026

सिर्फ नोटिस की खानापूर्ति कर क्यों चुप बैठ जाते हैं आवास विकास अधिकारी?


पिछले एक साल में किसी भी नए निर्माण पर सील या ध्वस्तीकरण क्यों नहीं?

तरुण आहुजा 
नित्य संदेश, मेरठ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आवास विकास परिषद एक्शन में जरूर दिखाई दिया। 

शास्त्री नगर में 661/6 पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। इसके बाद 44 स्थानों पर सील की कार्रवाई भी हुई, जिनमें स्कूल, हॉस्पिटल, जिम, रेस्टोरेंट, पार्लर और परचून की दुकानें शामिल थीं। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्री नगर में अवैध निर्माण चिन्हित कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, तो क्या सर्वे के दौरान सभी अवैध निर्माण अधिकारियों को दिखाई नहीं दिए? या फिर कुछ निर्माणों पर कार्रवाई इसलिए नहीं हुई क्योंकि निर्माणकर्ता किसी बाबू का पड़ोसी, किसी जेई का दोस्त या किसी अधिकारी का रिश्तेदार है? यदि पिछले एक साल की बात करें तो एक करीब 30 साल पुरानी बिल्डिंग का ध्वस्तीकरण हुआ और 44 दुकानों को सील किया गया। लेकिन जिन अधिकारियों ने 661/6 पर कार्रवाई की और 44 दुकानों को सील किया, वही अधिकारी अब कुछ चुनिंदा निर्माणों पर कार्रवाई करने में असहज क्यों दिख रहे हैं?

अनाधिकृत निर्माण गिराने के आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

सेक्टर-3 में चयनात्मक कार्रवाई का सवाल
शास्त्री नगर सेक्टर-3 में हरिया लस्सी पर सील की कार्रवाई की गई, लेकिन उससे कुछ कदम की दूरी पर 439/3 जिसपर करीब 10 माह पहले अनाधिकृत निर्माण गिराने के आदेश होने के बावजूद कार्रवाई फाइलों में दबा दी गई। क्या यह जांच का विषय नहीं है?

जे-36, इंद्रा मूर्ति के पास निर्माण पर चुप्पी क्यों?
पुराने के ब्लॉक, इंद्रा मूर्ति के पास पिछले एक साल से निर्माण कार्य चल रहा है। इस अवैध निर्माण को निर्माण के दौरान प्रमुखता से प्रकाशित भी किया गया था। दोबारा खबर प्रकाशित होने के बाद 15 दिन का नोटिस चस्पा किया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद नोटिस फाड़ दिया गया। इससे सवाल उठता है कि निर्माणकर्ता को नोटिस का कोई डर नहीं या फिर कोई “सेटिंग” काम कर रही है?
3. 2/1 शास्त्री नगर की सील दस दिन में कैसे हट गई?
2/1 शास्त्री नगर में सील लगाने की कार्रवाई हुई, लेकिन मात्र दस दिन बाद सील हट गई और निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया। आखिर यह कैसे हुआ और किसके आदेश पर हुआ? इसका जवाब कौन देगा?

651/6 निर्माण सबसे ज्यादा चर्चा में क्यों?
651/6 निर्माण पर नोटिस चस्पा किए गए, लाल निशान लगाए गए, लेकिन कार्रवाई शून्य रही। आसपास और आमने-सामने के निर्माणों पर सील की कार्रवाई हुई, लेकिन इस निर्माण को लेकर लापरवाही क्यों? जानकारी के अनुसार इस पर अनाधिकृत निर्माण गिराने के आदेश भी हो चुके थे और समयसीमा भी समाप्त हो चुकी है। फिर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती क्यों?

सर्वे में आगे, लेकिन निर्माण के समय खामोशी क्यों?
सवाल यह भी है कि जो कर्मचारी सर्वे और सील कार्रवाई में सबसे आगे दिखाई देते हैं, उन्हें बनते हुए अवैध निर्माण क्यों नहीं दिखते? और अगर दिखते हैं तो अधिकारियों को समय रहते सूचना क्यों नहीं दी जाती?
हाल ही में ट्रांसफर हुए बाबू मुमताज पर भी कुछ व्यापारियों द्वारा पैसे लेकर अवैध निर्माण करवाने के आरोप लगाए गए थे। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।

9/10 कॉम्प्लेक्स पर भी सवाल ; 
शास्त्री नगर में 9/10 कॉम्प्लेक्स बनकर तैयार हो चुका है। जानकारी के अनुसार इसमें अलग-अलग फ्लोर और दुकानें अलग-अलग व्यक्तियों को बेची गईं। सवाल यह है कि जब निर्माण हो रहा था, तब संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? और यदि निर्माण अवैध था तो उसकी रजिस्ट्री कैसे हुई?

आखिर जिम्मेदार कौन? 
आज भी शास्त्री नगर में दर्जनों अवैध निर्माण जारी हैं। कई जगह नोटिस देकर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, लेकिन सील या ध्वस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई नहीं हो रही। आखिर इसके पीछे कारण क्या है — राजनीतिक दबाव, मिलीभगत, या फिर भ्रष्टाचार?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आवास विकास परिषद सभी निर्माणों पर समान कार्रवाई करेगी या फिर कार्रवाई केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित रहेगी?

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