नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठः स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ के कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय द्वारा “सस्टेनेबल कैम्पस: प्रमोटिंग रिस्पोंसिबल कंन्जप्शन एण्ड प्रोडक्शन” विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करते हुए सतत विकास को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन डॉ. सुधीर त्यागी के द्वारा स्वागत संबोधन एवं उद्घाटन संबोधन के साथ हुई। डॉ. त्यागी ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि सतत विकास केवल किताबी सिद्धांतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए अपितु यह "विश्वविद्यालयों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाएं ताकि वे संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को अपनी दैनिक आदतों में शुमार कर सकें।"
मुख्य अतिथि आगरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. यू.सी. शर्मा ने 'सस्टेनेबल कैंपस' की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में बड़े परिवर्तनों की नींव रखते हैं। उन्होंने परिसरों को "ग्रीन कैंपस" के रूप में विकसित करने और विद्यार्थियों को व्यवहारिक रूप से इन सिद्धांतों को अपनाने की अपील की। डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम और गतिविधियों में सतत विकास के सिद्धांतों को अनिवार्य रूप से शामिल करना चाहिए। वहीं, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. रितेश चौधरी ने मीडिया की शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा कि जागरूकता ही परिवर्तन की पहली सीढ़ी है और मीडिया इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है।
संगोष्ठी के दौरान जल एवं ऊर्जा संरक्षण, कचरा प्रबंधन और हरित परिसर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में शलिग राम शर्मा, डॉ. मनोज त्रिपाठी, डॉ. संतोष गौतम, डॉ. सपना शर्मा, डॉ. अल्पना, भावना जोशी सहित विभाग के सभी विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. सपना शर्मा ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

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