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Wednesday, April 15, 2026

आलिमों कि जमात ने मुस्लिम महिलाओं की राह में लगाया 'बैरियर'

मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने आलिमों कि सोच पर उठाए सवाल 


सलीम सिद्दीकी

नित्य संदेश, मेरठप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने संबंधी मामले पर आलिम ए दीन और मुस्लिम बुद्धिजीवियों के बीच खाई एक बार फिर से गहरी हो गई है। एक तरफ महिला आरक्षण बिल में संशोधन का स्वागत करते हुए उलेमा की एक जमात ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है, तो वहीं दूसरी ओर मुस्लिम महिलाओं को खबरदार भी किया है। हालांकि जमात के इस स्टैंड पर मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग ने कड़ा एतराज जताते हुए आलिमों कि इस जमात को 'मुसल्ले' (जिस विशेष कपड़े को बिछाकर नमाज़ पढ़ी जाती है) तक ही सीमित रहने की सलाह दे डाली है। 

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने तर्क दिया है कि शासन-प्रशासन में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें बराबरी का दर्जा देने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है लेकिन लगे हाथों जमात ने मुस्लिम महिलाओं के लिए 'लक्ष्मण रेखा' खींचने की कोशिश भी की है। जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुस्लिम महिलाओं को शरीयत का हवाला देते हुए उन्हें 'हद' में रहने की सलाह दी है। मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग ने जमात के इस स्टैंड को 'कट्टरपंथी सोच' को बढ़ावा देने वाला बताया। ऑकलैंड यूनिवर्सिटी के एक पूर्व प्रवक्ता और इंडिया-न्यूज़ीलैंड कल्चरल सोसाइटी के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर जमात की इस सोच को मुस्लिम महिलाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलने वाला बताया। बता दें कि जमात ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले मुद्दे को महिलाओं के लिए 'संजीवनी' समान बताया था लेकिन मुस्लिम महिलाओं को इससे दूर रहने की सलाह दी थी। बुद्धिजीवी वर्ग ने इसे उलेमा की दोहरी सोच बताया। हालांकि जमात ने आज की राजनीति पर तीखा कटाक्ष करते हुए इसे 'फरेब का जाल' बताया। बुद्धिजीवियों ने यहां फिर सवाल किया कि यदि जमात की नजर में आज की राजनीति फरेब का जाल है तो इससे बचने के लिए सिर्फ मुस्लिम महिलाओं को ही क्यों सलाह दी जा रही है जबकि यह सलाह सर्व समाज की महिलाओं के लिए होनी चाहिए।

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