तरुण आहुजा
नित्य संदेश, मेरठ। सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर चल रहा प्रदर्शन रविवार को 10वें दिन भी जारी रहा। महिलाएं अब भी सड़क पर बैठकर विरोध जता रही हैं। इस बीच प्रशासन ने सख्ती बढ़ाते हुए व्यापारियों के समर्थन में पहुंचने वालों को कोर्ट की अवमानना का नोटिस देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में, जब किसान मजदूर संगठन के महानगर अध्यक्ष विजय राघव रविवार को व्यापारियों के समर्थन में मौके पर पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें भी न्यायालय की अवमानना का नोटिस थमा दिया।
नोटिस मिलने के बाद विजय राघव का कहना है कि मेरठ में न ही तो राष्ट्रपति शासन लागू है, न ही कोई आपातकालीन स्थिति है। इसके बाद भी संविधान के अनुछेद19 के अनुसार जो मौलिक अधिकार हैं वह हमें नहीं मिल रहे हैं। अपनी बात को सरकार तक पहुंचाने के लिए या अपनी किसी मांग के लिए धरना देने के लिए लोग स्वतंत्र हैं। इसके बावजूद भी उनकी आवाज को दबाने के लिए इस प्रकार नोटिस देकर कराया जा रहा है। प्रशासन दबाव बनाकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, धरने पर बैठी महिलाओं का कहना है कि शनिवार को भी एडीएम सिटी और पुलिस के अधिकारियों द्वारा हमारे ऊपर धरना खत्म करने को लेकर दबाव बनाया गया। इसके साथ-साथ हमें धमकियां भी दी जा रही हैं कि अगर कोई आपके बीच आएगा या आप भी अगर यह धरना खत्म नहीं करोगे तो सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी बीच उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें लगातार डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे अपना आंदोलन खत्म कर दें। धरने में शामिल लोगों ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी दबाव में आने वाले नहीं हैं और अपनी मांगों के लिए अंतिम निर्णय तक डटे रहेंगे।
धरनास्थल पर बढ़ रही लोगों की संख्या
उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने समय रहते सकारात्मक पहल
नहीं की, तो दो दिन बाद की जाने वाली घोषणा आंदोलन को और व्यापक और प्रभावी बना सकती
है। सूत्रों
के अनुसार, धरना स्थल पर लोगों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है और विभिन्न सामाजिक
संगठनों का समर्थन भी मिलना शुरू हो गया है, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिल रही है।
पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर
वहीं, स्थानीय प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए
है, लेकिन अब तक इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल, आने
वाले दो दिन इस आंदोलन के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इसके बाद की जाने
वाली घोषणा से पूरे मामले की दिशा और प्रभाव तय हो सकता है।

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