प्रदेशभर में आंदोलन जारी : शीर्ष प्रबंधन की विफलता से उपभोक्ता सड़कों पर उतर रहे
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। निजीकरण की नीतियों एवं बिजली कर्मियों पर हो रहे उत्पीड़न के विरोध में चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत आज मुजफ्फरनगर एवं मेरठ में बिजली कर्मचारियों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य जनपदों में भी आंदोलन के क्रम में विरोध कार्यक्रम निरंतर जारी रहे।
संघर्ष समिति के आह्वान पर पिछले 506 दिनों से चल रहे इस आंदोलन के तहत बिजली कर्मी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। साथ ही मार्च 2023 से आंदोलन के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को तत्काल वापस लेने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई जा रही है।
संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी आगामी भीषण गर्मियों को देखते हुए उपभोक्ताओं एवं किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं और जनसमर्थन के साथ आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद पावर कॉर्पोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ते हुए बड़े पैमाने पर अनुभवी आउटसोर्स एवं संविदा कर्मियों को सेवा से हटा रहा है तथा नियमित कर्मचारियों के दूरदराज तबादले कर रहा है, जिसका सीधा प्रतिकूल प्रभाव बिजली व्यवस्था पर पड़ना तय है।
संघर्ष समिति ने मांग की कि प्रबंधन तत्काल संघर्ष समिति से वार्ता कर समाधान निकाले, आंदोलन के कारण की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ले तथा हटाए गए अल्प वेतनभोगी एवं अनुभवी संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर बहाल किया जाए।
मेरठ में जनजागरण कार्यक्रम जानपद कार्यालय (पराग डेयरी के पास) के प्रांगण, विक्टोरिया पार्क में आयोजित की गई जिसको संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेंद्र सिंह गुर्जर, मोहम्मद वसीम, निखिल कुमार, सीपी सिंह, प्रगति, कवितेंद्र, कपिल देव आदि ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण एवं कार्यालय समय के उपरांत किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बावजूद कर्मचारियों का उत्पीड़न जारी है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री द्वारा 19 मार्च को दिए गए निर्देशों के बावजूद मार्च 2023 की सांकेतिक हड़ताल के दौरान की गई कार्यवाहियां अब तक वापस नहीं ली गई हैं, बल्कि नई कार्यवाहियां लगातार की जा रही हैं, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है*।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन शीघ्र ही वार्ता कर समाधान नहीं निकालता और उत्पीड़न की कार्यवाहियां समाप्त नहीं होतीं, तो आने वाली गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि शीर्ष प्रबंधन की अव्यवस्थित कार्यशैली के कारण राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में उपभोक्ता लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं, विद्युत कार्यालयों का घेराव कर रहे हैं तथा अधिकारियों-कर्मचारियों को बंधक बनाने जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो गर्मियों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
संघर्ष समिति प्रदेशभर में कर्मचारियों एवं उपभोक्ताओं को साथ लेकर जन-जागरण अभियान जारी रखे हुए है और जनता को आगाह कर रही है कि प्रबंधन की प्राथमिकता बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करना नहीं, बल्कि निजीकरण को आगे बढ़ाना है, जिसके चलते कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
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