नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद शोध पीठ, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा रामकृष्ण मिशन, नई दिल्ली के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के अंतर्गत शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल करते हुए बेलूर मठ, कोलकाता का एक विशेष शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया। यह भ्रमण केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं था, बल्कि शिक्षा, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति के समन्वय का एक सशक्त एवं प्रेरणादायक उदाहरण सिद्ध हुआ, जिसने प्रतिभागियों को गहन वैचारिक एवं आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया।
यह भ्रमण स्वामी विवेकानंद शोध पीठ की प्रोफेसर एवं संयोजिका प्रो.(डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा द्वारा सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर बेलूर मठ के सम्माननीय प्रतिनिधियों—प्रसाद महाराज जी, ब्रह्मचारी आनंद चैतन्य जी, स्वामी वर्णानंद जी, स्वामी सर्वाधिशानंद जी, ब्रह्मचारी गुणातीत चैतन्य जी, स्वामी कल्याणमानंद जी, स्वामी ज्ञानलोकानंद जी तथा रामकृष्ण मिशन, नई दिल्ली के सचिव स्वामी सर्वलोकानंद महाराज जी का विशेष सहयोग एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उनके अनुभव, सादगी एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण ने इस भ्रमण को अत्यंत प्रभावशाली, अनुकरणीय एवं ज्ञानवर्धक बना दिया। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल एवं प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा ने बेलूर मठ परिसर के विभिन्न पवित्र, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक स्थलों का गहन अवलोकन किया। विशेष रूप से श्री रामकृष्ण परमहंस, माँ शारदा देवी एवं स्वामी विवेकानंद जी के पावन समाधि स्थलों के दर्शन किए गए।
इस अवसर पर बेलूर मठ के प्रतिनिधियों ने स्वामी विवेकानंद शोध पीठ एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय द्वारा स्वामी विवेकानंद के विचारों के प्रचार-प्रसार, शोध गतिविधियों एवं शैक्षणिक पहलों की प्रशंसा की। उन्होंने इसे एक दूरदर्शी, समाजोपयोगी एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया, जो युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा प्रदान कर रही है। अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा ने कहा कि यह भ्रमण स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को समझने, आत्मसात करने तथा उन्हें समकालीन शैक्षणिक संरचना में समाहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का स्वरूप व्यापक हो चुका है, और इसका उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। इस संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।
उन्होंने आगे बताया कि रामकृष्ण मिशन के साथ हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत दोनों संस्थाएँ मिलकर शिक्षा, अनुसंधान, सांस्कृतिक जागरूकता एवं नैतिक मूल्यों के संवर्धन के क्षेत्र में व्यापक कार्य करेंगी। इस सहयोग के अंतर्गत भविष्य में संयुक्त सेमिनार, कार्यशालाएं, व्याख्यान श्रृंखलाएँ, शोध परियोजनाएँ, प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं छात्र-शिक्षक विनिमय योजनाएं आयोजित की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को एक समृद्ध, संतुलित एवं मूल्यपरक शिक्षा प्राप्त हो सकेगी। प्रसाद महाराज जी ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के आधुनिक एवं वैश्विक युग में, जब समाज विभिन्न सामाजिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएं मानवता, सेवा, आत्मनिर्भरता एवं राष्ट्र निर्माण की दिशा में सशक्त मार्गदर्शन प्रदान करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व विकास एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना का निर्माण करना है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा जी एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज जी ने इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण की सराहना करते हुए इसे शोध पीठ, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक, ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक आदर्शों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे उनका समग्र विकास संभव हो पाता है। यह भ्रमण इस बात का सशक्त प्रमाण है कि स्वामी विवेकानंद शोध पीठ एवं रामकृष्ण मिशन के मध्य स्थापित सहयोग केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक साझा दृष्टिकोण, उद्देश्य एवं मूल्यों पर आधारित है। इस सहयोग का प्रमुख उद्देश्य आध्यात्मिक मूल्यों को आधुनिक शिक्षा, शोध एवं नवाचार के साथ समन्वित कर एक सशक्त, जागरूक एवं संतुलित समाज का निर्माण करना है। बेलूर मठ, कोलकाता का यह शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण ज्ञान, संस्कृति एवं आध्यात्मिकता का एक अद्वितीय संगम सिद्ध हुआ, जिसने प्रतिभागियों को न केवल बौद्धिक रूप से समृद्ध किया, बल्कि उन्हें जीवन के उच्च आदर्शों एवं मूल्यों की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। यह पहल भविष्य में और अधिक सुदृढ़, व्यापक एवं प्रभावी सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगी।
स्वामी विवेकानंद शोध पीठ, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ इस प्रकार की पहलों के माध्यम से निरंतर यह प्रयास कर रहा है कि स्वामी विवेकानंद के आदर्शों एवं शिक्षाओं को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाया जा सके, जिससे एक सशक्त, जागरूक, नैतिक एवं मूल्य-आधारित समाज का निर्माण संभव हो सके।

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