नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। सरदार पटेल सुभारती लॉ कॉलेज, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा ह्यभारत के पर्यावरण कानूनी शासन में पर्यावरणीय लोकाचार का आकलनह्ण विषय पर एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया। इस व्याख्यान का आयोजन सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक राजेश चंद्र जी (पूर्व न्याय मूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के दिशा निर्देशन में तथा प्रो (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकाय अध्यक्ष, सुभारती लॉ कॉलेज के मार्गदर्शन में किया गया।
व्याख्यान के मुख्य वक्ता प्रो (डॉ.) अमरपाल सिंह माननीय कुलपति, डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ रहे। अपने उद्बोधन में प्रोफेसर सिंह ने बताया कि मानव तथा प्रकृति के संबंध में पर्यावरण यह सतत शासन को समझने के लिए दो विशिष्ट पहलुओं अर्थात पर्यावरणीय केंद्र बाद तथा मानव केंद्रवाद को समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण शासन राजनीतिक पारिस्थितिकी और पर्यावरण नीति की एक अवधारणा है जो सभी मानवीय गतिविधियों के प्रबंधन के लिए सतत विकास को प्राथमिकता देता है।
प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार शर्मा माननीय कुलपति स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय ने अपने वक्तव्य में विद्यार्थियों को बताया कि सुभारती विश्वविद्यालय सतत विकास उद्देश्य नंबर 15 एवं 16 के लिए लगातार कार्य कर रहा है जिसके तहत सुभारती विश्वविद्यालय कागज मुक्त विश्वविद्यालय की तरफ लगातार अग्रसर है। सुभारती विश्वविद्यालय की माननीय कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज द्वारा इस विशिष्ट व्याख्यान की सफलता के लिए के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं दी गई।
सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक राजेश चंद्र ने अपने वक्तव्य में श्रोताओं को बताया कि किस प्रकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में वर्णित जीवन का अधिकार के संदर्भ में समय.समय पर पर्यावरण संरक्षण संबंधी विभिन्न न्याय निर्णय दिए गए हैं। भारत में अनुच्छेद 21 के तहत श्जीवन के अधिकार में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण का अधिकार शामिल है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसे मौलिक अधिकार माना है, जो गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक है। यह कानूनी शासन पर्यावरण के क्षरण को रोकने, प्रदूषण मुक्त हवा और पानी सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक सक्रियता और प्रदूषक भुगतान सिद्धांत जैसे सिद्धांतों का उपयोग करती है।
प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई, संकायाध्यक्षा सुभारती लॉ कॉलेज ने अपने उद्बोधन में सब कार्यक्रम के मुख्य वक्ता का स्वागत किया तथा श्रोताओं को आज के इस विशिष्ट व्याख्यान के महत्व के विषय में बताया। कार्यक्रम के अंत में प्रो (डॉ.) तारक नाथ प्रसाद के द्वारा अतिथि वक्ता, विश्वविद्यालय प्रशासन, माननीय कुलपति, तथा संकायाध्यक्षा, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. आफरीन अलमास द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम में डॉ. सारिका त्यागी, प्रो. (डॉ.) प्रेम चंद्रा, शालिनी गोयल, सोनल जैन, अरशद आलम, शिवानी, अनुराग, मुस्कान, आशुतोष देशवाल, हर्षित आदि शिक्षक शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों द्वारा सक्रिय प्रतिभागिता की गई।

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