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Saturday, April 4, 2026

आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन मेरठ की जांच में याची की गिरफ्तारी पर रोक




नित्य संदेश ब्यूरो

गाजियाबाद। वर्ष 2018 में सुभाष चंद्र मुख्य शाखा प्रबंधक, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया राइटगंज गाजियाबाद ने यश जैन, रामकिशोर वर्मा, अरुण वर्मा व संजय बत्रा निवासीगण कविनगर गाजियाबाद व अन्य अज्ञात के विरुद्ध फर्जी कागजातों के आधार पर दो करोड़ 80 लाख रुपए की सीसी लिमिट लोन कराकर हड़प करने के मामले में थाना गाजियाबाद कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत कराया।


याची गिरीश चंद्र गर्ग निवासी रेलवे रोड बजरिया गाजियाबाद ने उच्च न्यायालय में एफ आई आर को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की। याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता व न्यायमूर्ति डॉक्टर अजय कुमार (द्वितीय) के समक्ष बहस में बताया कि याची 75 वर्षीय व्यापारी व्यक्ति है, याची का अपनी फर्म से आरोपी यश देव जैन की फर्म से रुपये का व्यापारिक लेनदेन वर्ष 2015 में किया था। घटना के 3 साल के बाद एफ आई आर दर्ज कराई गई है। जिसमें याची का कोई नाम नहीं है। यशदेव जैन ने अपनी फर्म पी डी ट्रेडर्स के नाम से सीसी लिमिट सेंट्रल बैंक से सह अभियुक्त राम किशोर वर्मा व अरुण वर्मा ने अपनी प्रॉपर्टी के कागज गारंटी के रूप में रखकर षड्यंत्र कर लोन करा लिया था। मुख्य प्रबंधक की जांच में पाया गया कि सहयुक्त राम किशोर वर्मा व अरुण वर्मा ने उन्ही कागजातों पर दिल्ली में भी लोन ले रखा है। मामला नामजद अभियुक्त यशदेव जैन व रामकिशोर वर्मा, अरुण वर्मा व संजय बत्रा व बैंक ऑफ़ इंडिया के बीच कामर्शियल लेनदेन का विवाद है। 


याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने आगे बताया कि याची ने किसी भी प्रकार से कोई भी फर्जी डॉक्यूमेंट का प्रयोग नहीं किया है ना ही लोन दिलाने में कोई सहयोग किया है। याची का कोई पूर्व में आपराधिक इतिहास नहीं रहा है। जांच के दौरान वर्ष फरवरी 2026 मामला आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन मेरठ को सौंप दिया गया, जिससे प्रार्थी को पुलिस फर्जी मामले में फसाना चाहती है, जबकि 2 वर्ष पूर्व याची ने अपना बयान पूर्व विवेचना अधिकारी को दिया था। 


याची के अधिवक्ता ने आगे बहस में बताया कि नामजद अभियुक्त और बैंक के बीच वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत मामला सेटल हो चुका है, फिर भी पुलिस याची को गिरफ्तार करना चाहती है, जिस पर हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए मुख्य प्रबंधक बैंक व राज्य सरकार से 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने हेतु आदेश पारित किया है और अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 तक याची की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

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