नित्य संदेश। केंद्र सरकार की 'रिवाम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम' (RDSS) के तहत उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा लगाए गए स्मार्ट मीटरों को लेकर आज प्रदेश की जनता में भारी आक्रोश है। जिस पहल को 'विकसित भारत' की ओर एक बड़ा कदम बताया गया था, वह आज आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुकी है।
धरातल की हकीकत:
• जनता का हाल: तेज भागते मीटर और भारी-भरकम बिलों ने मध्यम और गरीब वर्ग की कमर तोड़ दी है। तकनीकी खामियों और बिना सूचना के कटती बिजली से लोग त्रस्त हैं।
• नेताओं की चुप्पी: विपक्ष तो हमलावर है ही, लेकिन अब सत्ता पक्ष के अंदरखाने भी इन मीटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जनता के गुस्से को देखते हुए स्थानीय प्रतिनिधि जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं।
• सरकार की खामोशी: तकनीकी सुधार के नाम पर जनता पर थोपे गए ये मीटर अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुके हैं। सरकार भले ही आज इस पर मौन साधे रहे, लेकिन इसकी गूंज आने वाले चुनावों में साफ सुनाई देगी।
बड़ा सवाल?
क्या तकनीकी विकास के नाम पर पारदर्शिता खो रही है? यदि जनता की जेब और विश्वास पर चोट होगी, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों के परिणामों पर पड़ना तय है। सरकार को यह समझना होगा कि बिजली का 'स्मार्ट' होना तब तक सार्थक नहीं है, जब तक वह आम आदमी की पहुंच और समझ में न हो।
आपकी क्या राय है? क्या आपके घर लगा स्मार्ट मीटर सही चल रहा है या यह सिर्फ एक 'बड़ा नुकसान' है....?
पहले ऑनलाइन आम लोगो के मीटर से बिजली बंद कर दी जा रही उसके बाद बिल जमा करने के नाम पर घूस ली जा रही है बहुत से लोगो की शिकायत है के बिल अमाउंट से एक दो प्रतिशत ज़्यादा कैश लिया जा रहा है.........
*गौरव सक्सेना (युवा पत्रकार)
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