Breaking

Your Ads Here

Saturday, April 18, 2026

“नोमोस 5.0रू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इक्विटी एवं हर्मेन्यूटिक्स ऑफ जस्टिस इन द ग्लोबल साउथ” विषय पर दिया संबोधन

 

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। ब्राजील में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वर्ल्ड कांग्रेस में विधि अध्ययन संस्थान के समन्वयक डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में “नोमोस 5.0रू आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इक्विटी एवं हर्मेन्यूटिक्स ऑफ जस्टिस इन द ग्लोबल साउथ” विषय पर अपना संबोधन दिया। उनका संबांेधन समकालीन वैश्विक विधिक विमर्श में तकनीक, न्याय और सामाजिक समावेशन के अंतर्संबंधों को स्पष्ट करने वाला रहा। डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने ‘नोमोस’ की अवधारणा को ऐतिहासिक और दार्शनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह केवल विधि या नियमों का समूह नहीं है, बल्कि यह सामाजिक व्यवस्था, सत्ता संरचना और न्याय की परिभाषा को निर्धारित करने वाला व्यापक सिद्धांत है। उन्होंने जर्मन विधि-शास्त्री कार्ल श्मिट और फ्रांसीसी दार्शनिक क्लॉड लेफोर्ट के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया कि ‘नोमोस’ समय के साथ परिवर्तित होता है और समाज की राजनीतिक एवं सामाजिक संरचनाओं के अनुरूप अपना स्वरूप ग्रहण करता है। उन्होंने ‘नोमोस 1.0’ से ‘नोमोस 5.0’ तक की यात्रा को क्रमबद्ध रूप से समझाया। कहा कि ‘नोमोस 1.0’ जहां पारंपरिक शक्ति संरचनाओं और भू-राजनीतिक सीमाओं पर आधारित था, वहीं ‘नोमोस 2.0’ और ‘3.0’ ने औद्योगिक क्रांति और आधुनिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा के साथ न्याय के स्वरूप को बदला। ‘नोमोस 4.0’ में वैश्वीकरण और डिजिटल क्रांति के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जबकि वर्तमान ‘नोमोस 5.0’ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली के युग का प्रतिनिधित्व करता है।

डॉ. विवेक कुमार ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि ‘नोमोस 5.0’ के युग में न्याय की अवधारणा केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह एल्गोरिदमिक निर्णयों, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी प्रभावित हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्याय तक पहुंच को सरल और त्वरित बना सकता है, लेकिन इसके साथ ही इसमें पूर्वाग्रह (इपंे), पारदर्शिता की कमी और जवाबदेही जैसे गंभीर प्रश्न भी जुड़े हुए हैं। ग्लोबल साउथ के संदर्भ में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यहां के देशों के सामने सामाजिक-आर्थिक असमानताएं, संसाधनों की कमी और डिजिटल विभाजन जैसी चुनौतियां हैं, जो न्याय तक समान पहुंच में बाधा उत्पन्न करती हैं। ऐसे में ‘इक्विटी’ यानी न्यायसंगतता का सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि तकनीकी प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। उन्होंने ‘हर्मेन्यूटिक्स ऑफ जस्टिस’ की अवधारणा को भी रेखांकित करते हुए कहा कि न्याय की व्याख्या केवल विधिक प्रावधानों के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक संदर्भ, सांस्कृतिक विविधता और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए। डॉ. विवेक कुमार त्यागी ने वैश्विक सहयोग, बहु-विषयक शोध और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में एक समावेशी, पारदर्शी और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था का निर्माण किया जा सके। उनका वक्तव्य इस वर्ल्ड कांग्रेस का एक महत्वपूर्ण बौद्धिक आधार बना और उपस्थित अंतरराष्ट्रीय विद्वानों द्वारा अत्यंत सराहा गया। इस आयोजन में मुख्य रूप से प्रो0 एलिना-रूस, प्रो0 रोडिरीगो बोल्विया, प्रो0 रावर्ट, इटली, प्रो0 एना एलिस, ब्राजील, प्रो0 जार्ज इशाक एवं प्रो0 डेलिन्टन रहे।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here