नित्य संदेश ब्यूरो
नोएड़ा। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) के अध्यक्ष डॉ. धर्मेश अवस्थी ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) द्वारा 1 अप्रैल 2026 को जारी लागत वृद्धि मुआवजा तंत्र संबंधी हालिया निर्देश का स्वागत किया है। डा. अवस्थी ने कहा कि यह प्रगतिशील कदम निर्माण उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह सरकार की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है और अवसंरचना क्षेत्र में व्यवसाय करने की सुगमता को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
डॉ. धर्मेश अवस्थी ने 2026–27 कार्यकाल के लिए बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) के अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया है। उन्हें सर्वसम्मति से इस पद के लिए चुना गया। उनका औपचारिक पदग्रहण 31 मार्च 2026, शुक्रवार को मुंबई में आयोजित एक भव्य समारोह में हुआ। इस अवसर पर बीएआई के ट्रस्टियों के बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व अध्यक्ष श्री लाल चंद शर्मा ने उन्हें पदभार सौंपा। समारोह में बीएआई के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व ट्रस्टी श्री मु. मोहन मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) वर्ष 1941 में स्थापित एक अखिल भारतीय शीर्ष संस्था है, जो इंजीनियरिंग निर्माण ठेकेदारों और बिल्डरों का प्रतिनिधित्व करती है। इसके देशभर में 264 से अधिक केंद्रों (शाखाओं) के माध्यम से 25,000 से अधिक व्यावसायिक सदस्य जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, क्षेत्रीय एवं संबद्ध संस्थाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से 2 लाख से अधिक सदस्यों का व्यापक नेटवर्क है। संगठन का मुख्य उद्देश्य निर्माण क्षेत्र में समग्र सुधार लाना तथा उद्योग से जुड़ी परिचालन और नीतिगत समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करना है। साथ ही, यह नीति-निर्माताओं और प्राधिकरणों का ध्यान इस क्षेत्र के आर्थिक महत्व और योगदान की ओर आकर्षित करने का कार्य करता है।
डॉ. धर्मेश अवस्थी आईआईटी खड़गपुर से बी.टेक (ऑनर्स) हैं। उनकी कंपनी, एम/एस अनुज कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, ने सीपीडबलूडी, आईआईटी कानपुर, यूपी जल निगम, एचवीओसी कानपुर, यूपी पीडब्ल्यूडी और इंडियन एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड, कानपुर जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के लिए कई परियोजनाएं पूरी की हैं। इसके अलावा, वे मध्यस्थता गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय, केरल उच्च न्यायालय, बॉम्बे हाई कोर्ट, आईसीए, आईसीएडीआर सहित कई संस्थानों में बतौर मध्यस्थ सूचीबद्ध हैं। वर्ष 2013 से वे बीयूडीआईसीओ, जेयूआईडीसीओ, बीआरआरडीए, जेएसआरआरडीए, आरसीडी बिहार, आरसीडी झारखंड तथा कठुआ (जम्मू-कश्मीर) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के लिए परामर्श सेवाएं भी प्रदान कर रहे है।

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