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Tuesday, April 14, 2026

बाबा साहब डॉ. अंबेडकर की 136वीं जयंती पर एमसीयू में पुष्पांजलि कार्यक्रम, 15 अप्रैल को विशेष व्याख्यान का आयोजन


नित्य संदेश ब्यूरो 

भोपाल। सामाजिक समरसता के अग्रदूत डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने की। उन्होंने कहा कि बाबा साहब को जितना सुनना और पढ़ना आवश्यक है, उतना ही जरूरी उनके विचारों को आत्मसात करना भी है। बाबा साहब के विचार हमारे आचरण में दिखने चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार डॉ. भीमराव अंबेडकर को उच्च शिक्षा के लिए विदेश (अमेरिका) भेजने में बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय ने मुख्य भूमिका निभाई थी, उसी प्रकार हमें अपने स्तर पर आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की सहायता करनी चाहिए। 

कुलगुरु श्री तिवारी ने कहा कि हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो। अगर कोई विद्यार्थी किसी कारण अपनी शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहा है तो हममें से ही किसी को आगे बढ़कर ऐसे विद्यार्थियों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। अगर हम ऐसा करते हैं तब यह डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बाबा साहब संपूर्ण समाज के उत्थान की बात करते थे। भारत के संविधान के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। हम सबको भी बिना किसी भेदभाव के संपूर्ण समाज के विकास के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहब के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए विद्यार्थियों के बीच पोस्टर निर्माण, काव्य लेखन एवं आलेख लेखन की प्रतियोगिताएं आयोजित करनी चाहिए। हमें एक बार बाबा साहब की आत्मकथा अवश्य पढ़नी चाहिए। 

हमारे आचरण में दिखें बाबा साहब के विचार : कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी

इस अवसर पर पत्रकारिता विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेंद्र सिंह ने बाबा साहब डॉ. अंबेडकर की पत्रकारिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने पत्रकारिता के माध्यम से मूक समाज को आवाज दी और उनके नायक बने। बाबा साहब ने मूकनायक, बहिष्कृत भारत, जनता और प्रबुद्ध भारत नाम से समाचार पत्रों का प्रकाशन किया। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. मुकेश चौरासे ने सामाजिक समरसता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि बाबा साहब सदैव सामाजिक समरसता एवं बंधुता की बात करते थे। बाबा साहब कहते थे कि भारत की एक संस्कृति है, जो हम सबको जोड़कर रखती है। बाबा साहब के विचारों को समग्रता से समझने की आवश्यकता है। 

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रकोष्ठ के संयोजक डॉ. गजेंद्र सिंह अवास्या ने किया। उन्होंने बाबा साहब के प्रसिद्ध संदेश “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” पर अपनी बात रखी। आभार ज्ञापन प्रकोष्ठ के सह-संयोजक श्री तोरण सिंह ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थियों के साथ ही परिसर के रहवासी भी उपस्थित रहे।

15 अप्रैल को होगा विशेष व्याख्यान :

बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के प्रसंग पर विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान का आयोजन 15 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे होगा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति डॉ. प्रकाश बरतुनिया होंगे और अध्यक्षता कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी करेंगे।

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