नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के छात्रों के लिए नई दिल्ली स्थित अमृत उद्यान की एक ज्ञानवर्धक शैक्षिक यात्रा का आयोजन किया गया। इस शैक्षिक भ्रमण का आयोजन सुभारती लॉ कॉलेज के निदेशक राजेश चंद्र जी (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च-न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के निर्देशन में तथा संकायाध्यक्षा प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई के संरक्षण में किया गया। प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई तथा प्रो. (डॉ.) प्रेम चंद्र के नेतृत्व में आयोजित इस शैक्षिक दौरे के अंतर्गत बी.ए. एलएल.बी. एवं पीएच.डी. के छात्रों का एक समूह अमृत उद्यान पहुँचा। अमृत उद्यान, जिसे पहले मुगल गार्डन के नाम से जाना जाता था, आम जनता के लिए 3 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक खुला रहेगा।
अमृत उद्यान में आगंतुकों के लिए बाल वाटिका, प्लुमेरिया गार्डन, बैनियन गार्डन, बोंसाई गार्डन, बबलिंग ब्रुक, सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन तथा सर्कुलर गार्डन जैसे आकर्षक स्थल हैं। इस वर्ष उद्यान में ट्यूलिप और विभिन्न प्रकार के गुलाब के साथ कई नई विशेषताएँ भी देखने को मिलीं। इनमें ह्लबबलिंग ब्रुकह्व नामक सुंदर जलधारा विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें छोटे-छोटे झरने, पत्थर की सीढ़ियाँ, मूर्तिकलानुमा फव्वारे और एक परावर्तक कुंड शामिल हैं, जो पर्यटकों को एक शांत और ताजगी भरा अनुभव प्रदान करते हैं। यह शैक्षिक यात्रा छात्रों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रही। उन्होंने राष्ट्रपति भवन परिसर के आसपास खूबसूरती से सुसज्जित उद्यानों, विविध प्रकार की वनस्पतियों तथा भव्य स्थापत्य कला का अवलोकन किया। इस अनुभव ने छात्रों को भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय विरासत को निकट से समझने का अवसर प्रदान किया।
लगभग 15 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला अमृत उद्यान हजारों प्रकार के फूलों से सजा हुआ है और इसे अक्सर राष्ट्रपति भवन की आत्मा कहा जाता है। इस बार उद्यान में दुर्लभ मौसमी फूलों के साथ-साथ बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार ह्लबाल वाटिकाह्व भी आकर्षण का केंद्र रही, जहाँ 225 वर्ष पुराने शीशम के पेड़ की कहानी, ट्रीहाउस तथा प्रकृति की कक्षा जैसी रोचक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इसके अतिरिक्त बोन्साई एवं गोलाकार उद्यान में विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे और जीव-जंतुओं को भी देखा गया। इस अवसर पर छात्रों ने उद्यान परिसर में स्थित फूड कोर्ट का भी आनंद लिया तथा विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। इस प्रकार की शैक्षिक यात्राएँ छात्रों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने, अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा देश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के प्रति जुड़ाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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