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Tuesday, March 17, 2026

रसोई गैस की किल्लत कम, घबराहट ज्यादा


नित्य संदेश। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध को अब दो सप्ताह से अधिक का समय हो चला है। इस युद्ध के कारण रसोई गैस की आपूर्ति और कीमतों से सबसे अधिक प्रभावित चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान और यूरोपीय देश हुए हैं। 

भारत भले ही तटस्थ है पर इस वैश्विक अशांति से भारत और भारतीयों की रसोई भी अछूती नहीं रही है, क्योंकि ईरान ने अमेरिका-इजराइल पर जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इस संकरे समुद्री मार्ग से लाखों बैरल तेल और गैस का परिवहन विशाल टैंकरों और जहाजों के माध्यम से किया जाता है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारा है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।

भारत भी अपनी एलपीजी (रसोई गैस) का लगभग 60-67 प्रतिशत आयात करता है, और उसमें से 85-90 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज मार्ग से आता है। इस समय मुख्य रूप से यूएई, कतर, सऊदी अरब और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से टैंकरों का आवागमन बहुत धीमा पड़ने से हमारा आयात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन पूर्ण रूप से रुका नहीं है। इसका असर रसोई गैस से कहीं अधिक व्यावसायिक क्षेत्र पर पड़ा है। रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे, कैटरिंग सेवाएं और क्लाउड किचन इसकी चपेट में आए हैं। कई जगहों पर 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, कीमतें 1768 रुपये से बढ़कर 1883 रुपये तक पहुंच गई हैं, और कालाबाजारी से तो चार गुना से भी अधिक भाव बढ़ चुके हैं।

राष्ट्रीय रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने बताया है कि अधिकांश रेस्टोरेंटों के पास सिर्फ 2-3 दिनों का स्टॉक बचा है, अगर स्थिति यथावत रही तो हजारों व्यवसाय बंद हो जाएंगे। कुछ शहरों में मेन्यू छोटे हो गए हैं, ऑपरेटिंग घंटे कम हो गए हैं, और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स पर भी असर दिख रहा है। लेकिन फिर भी घरेलू रसोई गैस की स्थिति इससे अलग है। हमारी सरकार ने आम जनता को परेशानी न हो इसलिए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में स्पष्ट बयान दिया है कि घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है। स्टॉक भी पर्याप्त हैं, और वितरण का चक्र भी सामान्य बना हुआ है। 8 मार्च 2026 को जारी एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर के तहत सभी रिफाइनरियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अधिकतम एलपीजी उत्पादन करें और सी3-सी4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम्स (प्रोपेन, ब्यूटेन आदि) को पूरी तरह घरेलू उपयोग के लिए तीन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देशित करें। जिसके परिणाम से पिछले कुछ दिनों में घरेलू उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा है। भारत में लगभग 33 करोड़ परिवार एलपीजी पर निर्भर हैं, और सरकार का ध्यान इन्हें बिना किसी रुकावट के गैस उपलब्ध करवाना है। अस्पतालों, स्कूलों और आवश्यक सेवाओं को भी बिना रुकावट प्राथमिकता दी गई है।

इस तात्कालिक संकट में भारत की रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व नीति सुरक्षा कवच का काम कर रही है। मंगलौर, विशाखापत्तनम और पादुर जैसी भूमिगत चट्टानी गुफाओं में सुरक्षित कच्चे तेल का आपातकालीन भंडार किसी भी बड़ी वैश्विक आपूर्ति बाधा के समय देश की जरूरतों को हफ्तों तक पूरा करने की क्षमता रखता है।

विडंबना यह है कि गैस आपूर्ति की समस्या वास्तविक कमी से ज्यादा विपक्ष और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों, पैनिक बुकिंग और जमाखोरी से बढ़ रही है। सामान्य दिनों में प्रतिदिन 50-55 लाख बुकिंग होती थीं, अब सीधे 70-75 लाख तक पहुंच गई हैं। इससे डिलीवरी में देरी हो रही है, कतारें लग रही हैं, और जमा स्टॉक तेजी से घटता दिख रहा है। सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट लागू कर कालाबाजारी पर सख्ती बरती है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, सुल्तानपुर, कन्नौज, मध्य प्रदेश में इंदौर, भोपाल, तो ऐसे ही राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक में कई जगहों पर छापेमारी, जुर्माने और जेल की कार्रवाई हो रही है। शहरी क्षेत्रों में बुकिंग गैप 25 दिन और ग्रामीण में 45 दिन तय किया गया है। वितरण प्रमाणीकरण कोड प्रणाली का विस्तार 90 प्रतिशत तक बढ़ाया जा रहा है, ताकि कालाबाजारी को रोका जा सके। यूं तो सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए एलपीजी आयात को विविधीकृत करने का निर्णय लिया है। 

अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस जैसे स्रोतों से कार्गो सुरक्षित किए जा रहे हैं। क्रूड ऑयल के लिए 70 प्रतिशत सप्लाई अब होर्मुज के बाहर से आ रही है। विश्व स्तर पर जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है पर भारत में अभी कोई बड़ा असर नहीं, क्योंकि हमारा स्टॉक मजबूत है और इसके वैकल्पिक रूट भी हमारे पास उपलब्ध हैं। यूं तो भयावह स्थिति न हो इसलिए प्राकृतिक गैस (पीएनजी) के लिए भी प्राथमिकता क्रम तय किया गया है। घरेलू और सीएनजी को 100 प्रतिशत, खाद कारखानों को 70 प्रतिशत तक सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है।
अगर युद्ध लंबा चला तो सरकार आगे के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ा रही है, पीएनजी नेटवर्क तेजी से फैला रही है, और जरूरत पड़ने पर सब्सिडी या ड्यूटी में राहत दे सकती है। लेकिन इस सबके बाद भी भारत में प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत स्तर पर समझदारी दिखानी होगी।

सबसे पहले तो समझने की जरूरत यह है कि सिर्फ हम भारतवासी इस परेशानी में नहीं हैं, यह वैश्विक समस्या है। हम जरूरत से ज्यादा बुकिंग या स्टॉक करने से बचें। सरकार द्वारा बताई गई बुकिंग गैप का पालन कर सहयोग करें। जहां तक संभव हो, पीएनजी, इंडक्शन चूल्हा या इलेक्ट्रिक स्टोव पर शिफ्ट होने पर विचार कर सकते हैं। अभी अफवाहों पर विश्वास न करें। केवल पेट्रोलियम मंत्रालय, आईओसीएल, बीपीसीएल जैसे आधिकारिक स्रोत जब तक न देखें तब तक कोई निर्णय न लें, बल्कि देश में शांति, सद्भाव, सहयोगात्मक रवैया बनाए रखें। पड़ोसियों और समुदाय के साथ सहयोग करें, ताकि कोई परिवार भूखा न रहे। यह संकट युद्ध से आया है, इसे हमने उत्पन्न नहीं किया है। लेकिन जमाखोरी करने वाले और भ्रामक बातें करने वाले हमारी घबराहट को गहरा बनाने में लगे हैं। 

सरकार 33 करोड़ परिवारों की रसोई बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। कुछ दिनों में नए आयात और बढ़े उत्पादन से हालात सुधर ही जाएंगे। हमें उड़ती बातों से ऊपर उठकर एक-दूसरे की मदद करनी होगी क्योंकि किसी की रसोई भी बिना भोजन पके नहीं रहे यह हम सबकी साझा जिम्मेदारी है और यही कर्तव्यबोध देशभक्ति दिखाने का सही तरीका भी है।

सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'

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