नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। सुभारती विश्वविद्यालय स्तरीय छात्र विकास कार्यक्रम “इंग्लिश लिटरेरी वीक” का उद्घाटन भाषा विभाग द्वारा एक ऐतिहासिक शैक्षणिक उपलब्धि के रूप में संपन्न हुआ। यह एक सप्ताह का जीवंत साहित्यिक कार्निवल है, जो सुभारती विश्वविद्यालय के इतिहास में अपनी तरह की पहली पहल है और परिसर को भाषा, साहित्य एवं नेतृत्व के उत्सव में बदल दिया।
उद्घाटन समारोह की शुरुआत कार्यक्रम संयोजक एवं प्रभारी — डॉ. रफत खानम (अंग्रेज़ी एवं विदेशी भाषाएँ) के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने भाषा की परिवर्तनकारी शक्ति पर प्रकाश डालते हुए आयोजन की अवधारणा और संरचना का सारगर्भित परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन विधि गोस्वामी (एम.ए. अंग्रेज़ी, चौथा सेमेस्टर) ने प्रभावशाली अभिव्यक्ति और सशक्त प्रस्तुति के साथ किया। दिन का मुख्य आकर्षण ड्रामेटिक मोनोलॉग एवं रोल प्ले प्रतियोगिता रहा, जिसका मूल्यांकन डॉ. श्वेता भारद्वाज (अतिरिक्त अधिष्ठाता, छात्र कल्याण) ने किया। प्रतियोगियों ने रोमियो–जूलियट से लेकर न्यायालय में अधिवक्ता की भूमिका तक, एनीमे पात्रों की सृजनात्मक पुनर्रचना और परीकथा कथानक तथा अरोरा से प्रेरित प्रस्तुतियों जैसी विविध मंच प्रस्तुतियाँ देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। प्रतिभागियों के संवादों की गहराई, रंगमंचीय मुद्राएँ और व्याख्यात्मक सशक्तता ने मंच को जीवंत बना दिया, जबकि विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी दर्ज कराई।
इस प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार घोषित किए गए:
• प्रथम स्थान: रितिक धिगन (एम.ए. अंग्रेज़ी, चौथा सेमेस्टर) एवं जॉर्ज सेलेस्टीन कास्मिर (बी.ए. एल.एल.बी., चौथा सेमेस्टर, लॉ कॉलेज)
• द्वितीय स्थान: विधि गोस्वामी (एम.ए. अंग्रेज़ी, चौथा सेमेस्टर) एवं जिया मित्तल (बी.ए. अंग्रेज़ी ऑनर्स, दूसरा सेमेस्टर)
• तृतीय स्थान: अदिति वैक्स्टर (एम.बी.ए., दूसरा सेमेस्टर, मैनेजमेंट कॉलेज)
प्रतिस्पर्धात्मक उपलब्धियों के परे, उद्घाटन दिवस ने प्रतिभागियों में आत्मविश्वास, विश्लेषणात्मक लगन और अभिव्यक्तिपूर्ण प्रस्तुति में उल्लेखनीय वृद्धि प्रदर्शित की। संकाय सदस्यों ने ऐसे प्रतिभागियों के उत्साहवर्धक प्रदर्शन को कार्यक्रम की समावेशी एवं विकासोन्मुख भावना का प्रमाण बताया।
फरवरी 5–11, 2026 तक चलने वाले इस साहित्यिक सप्ताह में वाद–विवाद, सृजनात्मक लेखन प्रतियोगिताएँ, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं, संगीत प्रस्तुतियाँ और शैक्षणिक प्रदर्शनों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य विद्वत्ता एवं सृजनात्मकता के संतुलित समन्वय के माध्यम से समग्र शिक्षा को सुदृढ़ करना है।
उद्घाटन सत्र में प्रो. डॉ. संदीप चौधरी (अधिष्ठाता, शिक्षा संकाय), प्रो. डॉ. सुधीर त्यागी (अधिष्ठाता, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय), डॉ. सीमा शर्मा (विभागाध्यक्ष), डॉ. प्रीति, डॉ. स्वाति शर्मा, डॉ. अभिजीत, श्री अंकित एवं सुश्री सान्या सहित विभिन्न संकायों के गणमान्य शिक्षकों और विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक समृद्ध किया। यह साहित्यिक सप्ताह केवल एक आयोजन का आरम्भ नहीं, बल्कि सुभारती विश्वविद्यालय में एक सुदृढ़ साहित्यिक परंपरा की स्थापना का संकेत है।
वही दूसरी ओर
सुभारती विश्वविद्यालय में जैविक विज्ञान में अनुदान, पेटेंट एवं उद्यमिता विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय एवं अनुसंधान एवं विकास सेल के संयुक्त तत्वावधान में आज “जैविक विज्ञान में अनुदान, पेटेंट और उद्यमिता” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) के. पी. रमेशा, पूर्व प्रमुख एवं प्रधान वैज्ञानिक, आईसीएआर - एन डी आर आई, बेंगलुरु (कर्नाटक) रहे। अपने संबोधन में डॉ. रमेशा ने शोधार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में केवल शोध करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस शोध को पेटेंट कराना तथा उसे उद्यमिता से जोड़कर समाज के हित में लाना आवश्यक है। उन्होंने जैविक विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने की बारीकियों को भी साझा किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विज्ञान संकाय के डीन प्रो. (डॉ.) आर. के. जैन द्वारा मुख्य अतिथि डॉ. रमेश का स्वागत कर किया गया। डीन ने विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व पर प्रकाश डाला। पूरे सम्मेलन का संचालन डॉ. अश्वनी कुमार ने कुशलता से किया, जिन्होंने चर्चा को रोचक एवं ज्ञानवर्धक बनाकर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर अनुसंधान एवं विकास सेल के डीन प्रो. वैभव गोयल ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों तथा आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विश्वविद्यालय के शोध वातावरण को नई दिशा प्रदान करेंगे। सम्मेलन में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक तथा सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवा वैज्ञानिकों को अपने शोध को व्यावसायिक रूप देने तथा पेटेंट नियमों और प्रक्रियाओं की जटिलताओं को समझने में मार्गदर्शन प्रदान करना था।
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