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Saturday, February 14, 2026

सेंट्रल मार्किट शास्त्री नगर को बचाने अब कौन अवतार आएगा? कैसे रुकेगी ध्वस्तीकरण की कार्यवाही?



तरुण आहुजा 
नित्य संदेश, मेरठ। सेंट्रल मार्किट, शास्त्री नगर पर मंडरा रहा ध्वस्तीकरण का खतरा व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है। नोटिस चस्पा हो चुके हैं, समय सीमा निर्धारित है और प्रशासनिक तैयारी भी तेज मानी जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है — आखिर इस संकट की घड़ी में मार्किट को बचाने आगे कौन आएगा?

व्यापारी वर्ग वर्षों से इस बाजार के माध्यम से न केवल अपनी आजीविका चला रहा है, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है। लेकिन अब जब ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है, तो नेतृत्व, रणनीति और कानूनी विकल्पों पर गंभीर मंथन की आवश्यकता है।

क्या हैं संभावित रास्ते?
कानूनी विकल्प
यदि व्यापारियों को कार्रवाई पर आपत्ति है, तो वे उच्च न्यायालय या सक्षम न्यायिक मंच पर स्थगन (स्टे) की मांग कर सकते हैं। मजबूत दस्तावेज़, स्वीकृत नक्शे और पूर्व पत्राचार यहां निर्णायक साबित हो सकते हैं।

संवाद और प्रतिनिधिमंडल
प्रशासन से संगठित और तथ्यों के आधार पर वार्ता एक प्रभावी कदम हो सकता है। भावनात्मक अपील से अधिक जरूरी है दस्तावेज़ी और कानूनी मजबूती।

कंपाउंडिंग या नियमितीकरण
यदि नियमों के तहत संभव हो, तो कंपाउंडिंग या नियमितीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा सकते हैं।

एकजुटता बनाम राजनीति
इस समय सबसे अधिक जरूरत है एकजुटता की। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं और राजनीतिक खींचतान समाधान को कमजोर कर सकती हैं।

भावनात्मक बनाम व्यावहारिक रणनीति
सवाल “कौन अवतार आएगा?” प्रतीकात्मक जरूर है, लेकिन वास्तविक समाधान किसी चमत्कार से नहीं बल्कि संगठित, रणनीतिक और कानूनी प्रयासों से ही संभव होगा। इतिहास गवाह है कि जब भी व्यापारी वर्ग संगठित और तथ्यों के साथ खड़ा हुआ है, समाधान के रास्ते निकले हैं।

प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण
यदि निर्माण वर्षों पुराने हैं और पहले किसी स्तर पर स्वीकृत या अनदेखे रहे हैं, तो अचानक कठोर कार्रवाई पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। पारदर्शिता और समान कार्रवाई से ही विश्वास कायम हो सकता है।

अब निगाहें इस पर हैं कि व्यापारी नेतृत्व, जनप्रतिनिधि और प्रशासन मिलकर समाधान निकालते हैं या टकराव की स्थिति और गहराती है। क्योंकि बाजार केवल इमारतों का समूह नहीं होता — वह सैकड़ों परिवारों की आजीविका और शहर की धड़कन होता है।

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