नित्य संदेश। किसी भी देश एवं राज्य के लिए मीडिया एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक ऐसा मंच होता है, जिसके बारे में हमें अपने आस-पड़ोस के साथ प्रदेश एवं देश के साथ ही विश्व पटल पर क्या चल रहा है, उसकी जानकारी मिलती है। आज के दौर में मीडिया एवं सोशल मीडिया हमारे जीवन का एक हिस्सा बन चुका है। सोशल मीडिया एक ऐसा मंच है, जिसके माध्यम से मिलने वाली जानकारी कुछ हद तक ऑथैंटिक नहीं मानी जा सकती, जहां एक तरफ मीडिया के माध्यम से जो सूचनाएं हमें प्राप्त होती हैं, वह विश्वस्नीय तो होती हैं, लेकिन कुछ सूचनाएं इस तरह की होती हैं, जिन्हें मीडिया के मंच पर स्थान नहीं मिल पता, ऐसे में सोशल मीडिया मंच एक ऐसा माध्यम हैं, जिस पर हम अपनी मन चाही सूचना प्रसारित कर सकते हैं।
कहते हैं कि किसी चीज के फायदें हो तो उसके दूसरे पहलू में कुछ नुकसान भी छिपा होता हैं। यदि आज हम बदलते सोशल मीडिया मंच के स्वरूप को देखें तो आज फायदा कम नुकसान ज्यादा दिखाई दे रहा है। जिस तरह से वर्तमान दौर में देश की राजनीति एवं राजनेताओं के साथ कानून व्यवस्था को टोल किया जा रहा है, उससे साफ दिखाई देता है कि धीरे-धीरे सोशल मीडिया मंच के माध्यम से देश की संस्कृति एवं संस्कारों को नष्ट करने की मानो खूली छूट दे दी गई हो।
सोशल मीडिया मंच मानो आज देश में युवाओं की पसंद बना हुआ हैं। इस मंच पर कोई भी व्यक्ति अपनी बात दूर तक पहुंचा सकता है। जिसके फायदें भी बहुत हैं, लेकिन कुछ समय से जिस तरह सोशल मीडिया का दुरुपयोग हो रहा है, उससे देश की संस्कृति एवं संस्कार भी धीरे-धीरे नष्ट होते जा रहे हैं। हमारे देश की राजनीति एवं कानून व्यवस्था को जिस तरह से टोल किया जा रहा है, उसके दुष्परिणाम देखने को सामने आ सकते हैं। बीते वर्ष नेपाल देश में तख्तापलट की घटना हम सभी के सामने हैं, एक तरफ भविष्य के लिए डिजिटल मीडिया साक्षरता कौशल का निर्माण करने के साथ, परिवार एवं दोस्तों से जोडे रखने का माध्यम भी हैँ। जुनून एवं शौक की खोज करता इंटरनेट एक सकारात्मक ऑनलाइन उपस्थिति भी बनाए रखने का माध्यम हैं। हमें इस मंच से दूसरों की सहानुभूति भी मिलती हैं। यह वैश्विक नेटवर्किंग, व्यापक व्यापार और विपणन अवसरों, सहज अंतःक्रिया और विभिन्न प्लेटफार्मों पर सूचना साझाकरण में सहायक है।
दूसरी तरफ इसके कई नुकसान भी हैं, जिनमें गोपनीयता संबंधी चिंताएं, ध्यान भटकना, साइबरबुलिंग, गलत सूचना और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव प्रमुख रूप से शामिल हैं। सोशल मीडिया के नुकसानों में लत, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं (अवसाद, चिंता, कम आत्मसम्मान), साइबरबुलिंग, प्राइवेसी का खतरा, गलत सूचना का प्रसार और वास्तविक जीवन के रिश्तों का कमजोर होना शामिल हैं, जो समय की बर्बादी, नींद की कमी और शारीरिक समस्याओं (आंखों पर जोर, गर्दन दर्द) का कारण भी बनते हैं। सरकार को चाहिए कि वह हाल ही में सोशल मीडिया पर बढ़ती फूहडता पर त्वरित संज्ञान लेकर कोई ठोस कदम उठाए, यदि सरकार सोशल मीडिया के मंच पर बढ़ती फूहडता पर रोक नहीं लगाती तो भविष्य में दुष्परिणाम भी देखने को सामने आ सकते हैँ।
अशोक सोम
लेखक दैनिक भास्कर मेरठ से जुड़े हुए हैं।
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