नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर मातृभाषा के सम्मान, भाषाई आत्मगौरव तथा रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय स्तरीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें एकल एवं समूह गायन,नृत्य तथा नाट्य प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन सत्यजीत रे ऑडिटोरियम में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। आरंभ से ही सभागार में उत्साह, ऊर्जा और सांस्कृतिक गरिमा का वातावरण व्याप्त रहा तथा विद्यार्थियों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने समूचे परिसर को साहित्यिक चेतना और राष्ट्रीय भावबोध से आलोकित कर दिया। भाषा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि सभी विशिष्ट अतिथियों, प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों का हार्दिक अभिनंदन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की महत्ता को अत्यंत प्रभावपूर्ण शब्दों में रेखांकित किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि मातृभाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक चेतना और भावनात्मक जुड़ाव की मूल आधारशिला है। भाषा ही वह सेतु है जो व्यक्ति को उसकी परंपरा, परिवेश और मूल्यों से जोड़ती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मातृभाषा में सोचने और सीखने से आत्मविश्वास, सृजनशीलता और संवेदनशीलता का स्वाभाविक विकास होता है। अपने उद्बोधन के समापन पर उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और गर्व की भावना विकसित करें तथा उसके संरक्षण, संवर्धन और समृद्धि के लिए सक्रिय एवं सजग भूमिका निभाएँ।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. कर्नल देवेंद्र स्वरूप ने कहा कि बहुभाषी शिक्षा हमारी सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा, मातृभाषा का मान, राष्ट्र का सम्मान तथा भाषाई विविधता हमारी शक्ति है। सुभारती विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (डॉ.) शल्या राज ने अपने जीवनानुभवों का उल्लेख करते हुए मातृभाषा के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उनके व्यक्तिगत शैक्षिक और व्यावसायिक अनुभव यह सिद्ध करते हैं कि मातृभाषा में अर्जित शिक्षा व्यक्ति के आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और चिंतन-शक्ति को गहराई प्रदान करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मातृभाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कार और व्यक्तित्व की मूल आधारशिला है। जब विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में सीखते हैं, तो उनका बौद्धिक विकास अधिक स्वाभाविक, भावनात्मक अभिव्यक्ति अधिक प्रामाणिक और रचनात्मक दृष्टि अधिक व्यापक बनती है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा यदि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हो, तो वह केवल प्रमाणपत्र प्रदान करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समाज के लिए संवेदनशील, उत्तरदायी और मूल्यनिष्ठ नागरिकों का निर्माण करती है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने प्रेरक शब्दों में कहा- “मातृभाषा हमारी जड़ है, और जड़ों से जुड़कर ही वृक्ष सशक्त बनता है।” तथा यह संदेश दिया कि “मातृभाषा का सम्मान, आत्मसम्मान की पहचान।” कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सुधीर त्यागी ने विश्वविद्यालय की अकादमिक परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा है और साहित्य उसकी जीवंत चेतना की अभिव्यक्ति। उन्होंने कहा कि मातृभाषा का संरक्षण केवल भाषाई दायित्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता और वैचारिक समृद्धि की रक्षा का संकल्प है। विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों का दायित्व है कि वे भाषाई विविधता को प्रोत्साहित करें और विद्यार्थियों को अपनी भाषाई विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा दें। इस अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह, अनुशासन और रचनात्मक प्रतिबद्धता के साथ भाग लिया। नाट्य प्रस्तुतियों में सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक मूल्य एवं समकालीन विषयों का सशक्त चित्रण देखने को मिला।
नृत्य प्रतियोगिताओं में भारतीय लोक एवं शास्त्रीय परंपराओं की विविध झलकियाँ प्रस्तुत की गईं, वहीं गायन प्रतियोगिता में विभिन्न भारतीय भाषाओं के गीतों ने भाषाई विविधता की सजीव अनुभूति कराई। गायन प्रतियोगिता में डॉ. निशा सिंह, नाट्य प्रस्तुति में प्रो. रेनू मावी तथा नृत्य प्रतियोगिता में डॉ. मंजू अधिकारी ने निर्णायक की भूमिका निभाते हुए निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्णय प्रदान किए। सामूहिक नाट्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान भाषा विभाग तथा द्वितीय स्थान एलाइड हेल्थ केयर कॉलेज को प्राप्त हुआ। एकल नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सेड्रीना (एलाइड हेल्थ केयर कॉलेज), द्वितीय स्थान अमन त्यागी (बीकाजी कामा सुभारती कॉलेज ऑफ होटल मैनेजमेंट) तथा तृतीय स्थान दीपिका श्रीवास्तव (भाषा विभाग) को मिला। सामूहिक नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान अंशिका ठाकुर एवं जिया मित्तल (भाषा विभाग), द्वितीय स्थान पन्ना धाय नर्सिंग कॉलेज तथा तृतीय स्थान फोरेंसिक साइंस कॉलेज को प्राप्त हुआ।
एकल गायन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान कस्तूरी (लॉ कॉलेज), द्वितीय स्थान संयुक्त रूप से साइट कॉलेज से प्रथम एवं एम.बी. बी. एस. कि छात्रा साक्षी तथा तृतीय स्थान संयुक्त रूप से ऋतिक (भाषा विभाग) एवं संदीप (मैनेजमेंट कॉलेज) को प्राप्त हुआ। सामूहिक गायन में प्रथम स्थान लिबरल आर्ट्स, द्वितीय स्थान एजुकेशनल कॉलेज तथा तृतीय स्थान सरदार पटेल लॉ कॉलेज को मिला। सभी विजेताओं को स्मृति-चिन्ह एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं की गईं।
कार्यक्रम में डॉ. मनीषा लूथरा, डॉ. यशपाल, डॉ. स्वाति शर्मा, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. निशि राघव, डॉ. रणवीर सिंह, डॉ. प्रीति शर्मा, अंकित, सोनी, भावना तथा प्रज्ञा सहित अनेक शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रुद्राक्ष, मेधावी एवं सामिया ने प्रभावपूर्ण एवं संयमित ढंग से किया, जिससे संपूर्ण आयोजन में निरंतरता और सौहार्द बना रहा। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा रहा, बल्कि मातृभाषा के सम्मान, भाषाई विविधता के उत्सव और राष्ट्रीय एकता के सशक्त संदेश का प्रेरणादायी उदाहरण सिद्ध हुआ।

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