नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शोभित विश्वविद्यालय के विधि एवं संवैधानिक अध्ययन संकाय द्वारा 18 फरवरी 2026 को *“पीड़ितों के न्याय तक पहुंच की पुनर्कल्पना – दो मार्ग, एक सिद्धांत: दक्षिण ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीएनएसएस में अपराध पीड़ितों के अधिकारों की तुलना”* विषय पर एक ज्ञानवर्धक ऑनलाइन विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया।
सत्र के मुख्य वक्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त पीड़ित विज्ञान विशेषज्ञ माइकल ओ'कोनेल थे, जिन्हें दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के पहले पीड़ित अधिकार आयुक्त के रूप में व्यापक पहचान प्राप्त है। अपने संबोधन में उन्होंने दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की व्यवस्था और भारत की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के ढांचे का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया। प्रो. ओ'कोनेल ने स्पष्ट किया कि भिन्न कानूनी परंपराओं के बावजूद दोनों न्यायक्षेत्र अपराध पीड़ितों को न्याय प्रक्रिया का केंद्रीय हितधारक मानने के साझा सिद्धांत पर आधारित हैं। उन्होंने गरिमा, भागीदारी, सूचना के अधिकार और क्षतिपूर्ति को न्याय प्रणाली के अनिवार्य स्तंभ बताते हुए अपराधी-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़कर संतुलित एवं मानवीय न्याय व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया। व्याख्यान में पीड़ित प्रभाव वक्तव्यों के विकास, राज्य-वित्त पोषित सहायता तंत्र तथा सहभागी अधिकारों की वैधानिक मान्यता पर भी विचार हुआ। छात्रों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया गया कि विधायी सुधारों को जमीनी स्तर पर वास्तविक न्याय तक पहुंच में कैसे रूपांतरित किया जाए।
कार्यक्रम का अकादमिक नेतृत्व डॉ. मोहम्मद आमिर ने किया, जबकि इकरा रशीद ने सत्र का कुशल संचालन सुनिश्चित किया। अंत में आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र ने चर्चा को और अधिक समृद्ध बनाया। यह व्याख्यान आपराधिक न्याय और पीड़ित विज्ञान के समकालीन विमर्श को आगे बढ़ाने तथा वैश्विक अकादमिक संवाद को सशक्त करने की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रभावी उदाहरण रहा।

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