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Wednesday, February 4, 2026

साहिर लुधियानवी उम्मीद के शायर हैं: डॉ. तकी आबिदी



नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। सीसीएस यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग की ओर से “साहिर लुधियानवी की शायरी” विषय पर एक ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। मशहूर शोधकर्ता और आलोचक डॉ. तकी आबिदी (कनाडा) ने कहा कि साहिर लुधियानवी को किसी दायरे में बाँधा नहीं जा सकता। उन्होंने शायरी और फ़िल्म जगत दोनों को सम्मान दिया। उनकी शायरी में औरत, मर्द, समाज, सिनेमा, राजनीति और इतिहास जैसे विषयों पर बेहतरीन अभिव्यक्ति मिलती है। वे उम्मीद के शायर हैं। कार्यक्रम की शुरुआत सईद अहमद सहारनपुरी ने कुरान की तिलावत से की। अध्यक्षता प्रो. सगीर अफ़राहीम ने की। प्रो. सैयद महमूद काज़मी(हैदराबाद) मुख्य अतिथि और प्रो. फ़ारूक़ बख्शी (नोएडा)और फ़रहत अली विशिष्ट अतिथि रहे। जबकि आयुसा की अध्यक्षा प्रो रेशमा परवीन लखनऊ वक्ता के रूप उपस्थित रहीं।

प्रो. असलम जमशेदपुरी ने कहा कि साहिर की शायरी राह दिखाती है और उनका स्तर सबसे अलग है। प्रो. काज़मी ने उनकी नज़्म “ताजमहल” को बेहद अहम बताया और कहा कि इसे समझने के लिए सौंदर्य-बोध की समझ ज़रूरी है। प्रो. फ़ारूक़ बख्शी ने कहा कि नई पीढ़ी अलग राहों पर चली है, मगर साहिर को समझने के लिए उनकी किताबें पढ़ना ज़रूरी है। उनकी शायरी दिल को छू लेने वाली है। अध्यक्षीय भाषण में प्रो. सगीर अफ़राहीम ने कहा कि साहिर ने “ताजमहल” के ज़रिए नया अंदाज़ दिया। उनकी शायरी में उम्मीद, रोशनी और सकारात्मक सोच मिलती है। वे इंसानियत को सबसे ऊपर रखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के शोधार्थी मुहम्मद सोहेल ने “साहिर लुधियानवी की शायरी का विश्लेषण” विषय पर अपना शोध-पत्र पेश किया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. इरशाद स्यानवी ने किया। कई शिक्षक और छात्र भी कार्यक्रम से जुड़े रहे।

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