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Monday, February 23, 2026

दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रथम दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन

  


नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के चाणक्य सभागार में आयोजित हो रहे "भारतीय भाषा परिवार : एकत्व और एकात्मता" विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रथम दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन हुआ। 

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 9:00 बजे पंजीकरण के साथ हुई। सभी आगंतुकों ने जलपान ग्रहण करने के पश्चात सभागार में प्रवेश किया। दीप प्रज्ज्वलन एवं स्वस्ति वाचन के साथ उद्घाटन सत्र आरंभ हुआ। तत्पश्चात वंदे मातरम का सामूहिक गायन हुआ एवं डॉ. ओमपाल शास्त्री द्वारा स्वागत गीत गायन किया गया। इसके बाद उद्घाटन सत्र में मंचासीन अतिथियों को अंग वस्त्र एवं पादप भेंट कर स्वागत किया गया। इसी क्रम में भारतीय भाषा परिवार विषयक कुछ पुस्तकों का विमोचन मंचस्थ विद्वानों द्वारा किया गया। इसके पश्चात डॉ. मुनेश कुमार, सहायक आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा अतिथियों का स्वागत कर विषय प्रवेश कराया गया। तत्पश्चात उद्घाटन सत्र की विशिष्ट अतिथि प्रो. राका आर्या, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, भोपाल एवं अध्यक्ष भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद् ने भाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा की भाषा, विचार एवं संस्कृति को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है और भाषायी संदर्भ विनिमय और आजीविका से नहीं है बल्कि यह स्वाभिमान का विषय है। 



तत्पश्चात सत्र के विशिष्ट अतिथि प्रो. राजेंद्र कुमार अनायथ, कुलपति, महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल ने अपने उद्बोधन में मानवीय विकास श्रृंखला की तीन महत्वपूर्ण आवश्यकताओं को इंगित करते हुए कहा कि सुनने, देखने एवं चिंतन करने की क्षमताओं को विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने गुरु के महत्व को स्वीकार करते हुए उन्हें गुणातीत कहकर संबोधित किया। इसके बाद अपने विशिष्ट वक्तव्य में डॉ. दीपक अधिकारी, वरिष्ठ चिंतक, काठमांडू (नेपाल)  ने भारत में एक त्रिभाषाई सुधार पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक प्रदेश में अंग्रेजी के स्थान पर एक  प्रादेशिक भाषा, हिंदी भाषा एवं संस्कृत भाषा का उपयोग राजकीय विभागों में सुनिश्चित हो सके इसकी पहल की जानी चाहिए। सत्र की मुख्य वक्ता प्रो. नीरजा गुप्ता, कुलपति, गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद ने अपने उद्बोधन में कहा कि अनेक भाषाई शब्दों में निस्संदेह वैषम्य हो सकता है परंतु भारतीय कथाओं एवं लोकाचार में एक साम्य विद्यमान है।

इसके बाद सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रो. संजीव कुमार शर्मा, (कला संकाय अध्यक्ष, निदेशक अकादमिक चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ एवं पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी ने  कहा कि भाषा अपने साथ एक निरंतर सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और परिवेश लेकर चलती है। इस सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रशांत शर्मा, सहायक आचार्य संस्कृत विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ द्वारा किया गया एवं इस सत्र का मंच संचालन डॉ. आंचल चौहान ने किया। इसके पश्चात सम्मेलन के प्लेनरी सत्र का आयोजन किया गया। इसमें प्रथम उद्बोधन पुनः प्रोफेसर राजेंद्र कुमार अनायथ का हुआ जिसमें उन्होंने मानव सभ्यता में भाषा के विकास और उसके महत्व पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर जितेंद्र साहू, गोरबंग विश्वविद्यालय, मालदा पश्चिम बंगाल और प्रोफेसर वाचस्पति मिश्र, पूर्व अध्यक्ष उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ इस सत्र के अन्य वक्ता रहे। 

इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रथम दिवस का अंतिम सत्र भारतीय भाषा परिवार के एकत्व पर आयोजित किया गया जिसमें विषय विशेषज्ञ और वक्ता के तौर पर डॉ. प्रशांत शर्मा, डॉ. विद्यासागर सिंह,  डॉ. विशाल शर्मा,  डॉ. प्रवीण कटारिया, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ डॉ. आशुतोष राय, डॉ. बालिंदर सिंह और मुख्य वक्ता के तौर पर प्रोफेसर जगमीत बाबा (पंजाब) रहे। इस सत्र में वक्त गणों ने भारत में भाषाओं के वृद्धि और विविधता के बावजूद उनमें अंतर्निहित एकत्व और एकात्मकता पर अपने विचार रखे। डॉ. विशाल शर्मा ने पत्रकारिता सूचना क्रांति और भाषाई विविधता के महत्व पर प्रकाश डाला। 

प्रोफेसर जगमीत बावा ने अपनी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के अनुभवों का आधार लेकर समझाया कि भाषाई गौरव दूसरी संस्कृतियों और राष्ट्रों से हमारे संबंध स्थापित करने का एक सशक्त माध्यम है। राष्ट्रगान के साथ प्रथम दिवस के अंतिम सत्र का समापन हुआ। कल इस राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस के सत्रों का आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय समाधान राजनीति विज्ञान विभाग में किया जाएगा।

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