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Monday, February 2, 2026

गर्व कीजिए की हमारी मातृ भाषा हिंदी है: स्वर्णिमा शर्मा



-एमआईईटी में हुआ काव्य संग्रह “अहसासों का कारवां” का विमोचन


लियाकत मंसूरी

नित्य संदेश, मेरठ। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) में साहित्य, उद्यमिता और बौद्धिक विमर्श का अनूठा संगम देखने को मिला। एस्थेटिक्स इंटरनेशनल, मॉम मनी एंड माइंडसेट तथा एमआईईटी इनक्यूबेशन फोरम के संयुक्त तत्वावधान में ‘बियोंड द बुकशेल्फ एंड स्टार्टअप वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान अंग्रेजी की शिक्षिका स्वर्णिमा शर्मा की “अहसासों का कारवां” पुस्तक का विमोचन किया गया।


गौरतलब है कि कार्यक्रम में 10 पुस्तकों का औपचारिक विमोचन हुआ, जिसमें नौ पुस्तकें अंग्रेजी की रही, स्वर्णिमा शर्मा की “अहसासों का कारवां” एकमात्र ऐसी पुस्तक रही, जो हिंदी में लिखी गई थी। इस दौरान स्वर्णिमा शर्मा ने अपनी यात्रा और लेखन के विषय में बताया। दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत के दौरान स्वर्णिमा ने कहा कि आज के दौर में सब अंग्रेजी के पीछे भाग रहे हैं, मैं खुद अंग्रेजी की शिक्षिका हूं, लेकिन हमारी भाषा हिंदी है, हमें हिंदी बोलने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए, गर्व कीजिए कि हमारी मातृ भाषा हिंदी है, और जो हमने शुरुआत में बोला वह शब्द हिंदी था। कहा कि अंग्रेजी आज के दौर की जरूरत है, लेकिन सब कुछ है ऐसा बिल्कुल नहीं। इंग्लेंड सहित जितने अंग्रेजी मुल्क हैं, सभी जगह अंग्रेजी बोली जाती है, अरब में अरबी बोली जाती है, चाइना में जाइए वे अपनी बोली बोलते हैं, लेकिन हिंदी बोलने वाला गंवार नहीं हो सकता। ये सच नहीं है, हमें अपनी धरोहर को नहीं भूलना चाहिए, पेड़ की अगर जड़ कमजोर हो जाएगी, तो उसकी हरियाली खत्म हो जाएगी। हिंदी बोलने में हमें झिझक नहीं होनी चाहिए, जबकि गर्व होना चाहिए।



अंग्रेजी की शिक्षिका ने लिखी हिंदी में पुस्तक

स्वर्णिमा ने कहा कि 2011 में सत्यमेव जयते देखकर लिखने की यात्रा प्रारंभ हुई, अंदर के भाव हिंदी के थे, तो बाहर भी हिंदी ही निकलकर आयी, अंग्रेजी की शिक्षिका हूं, लेकिन कविताएं समस्त हिंदी में लिखी। अपनी पुस्तक के बारे में मिस शर्मा ने कहा कि “अहसासों का कारवां” एक भावनाओं का संग्रह है, जो दर्द और राहत के सफर को बयां करता है।


करोड़ों लोगों को जोड़ती है हिंदी

स्वर्णिमा शर्मा अंग्रेजी की शिक्षिका है, लेकिन उन्होंने लेखनी में अपनी यात्रा की शुरूआत हिंदी से की। इस बारे में जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि हमारी मातृभाषा हिंदी है, जिसे हम बचपन से बोलते आए हैं, यही वह भाषा है, जिसे हम अपने परिवार से सीखते है और जो उसकी सोच, संस्कृति और पहचान का आधार होती है। यह भारत की सबसे प्रमुख भाषाओं में से एक है, जो करोड़ों लोगों को जोड़ती है और हमारी सांस्कृतिक विरासत, साहित्य और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, जिसका संरक्षण और प्रसार करना हम सभी का कर्तव्य है।

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