नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अन्तर्गत की
जा रही कार्यवाही से व्यापारियों को आ रही कठिनाइयों के निराकरण के लिए ज्ञापन दिया
गया।
1. सभी प्रकार खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में रजिस्टेªशन
के लिए 12 लाख तक के टर्न ओवर की सीमा तय की गई है, परन्तु 12 लाख रूपये की सीमा मंहगाई
के हिसाब से बहुत कम है। अतः आपसे अनुरोध है कि 12 लाख टर्न ओवर के स्थान पर 40 लाख
वार्षिक टर्न ओवर तक का काम करने वाले व्यापारियों की रजिस्टेªशन की सीमा में रखा जायें।
2. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में फूड एक्ट का लाइसेंस
न पाए जाने पर सजा का प्राविधान खत्म किया जाये।
3. वर्तमान समय में भारी मात्रा में खाद्य पदार्थों का
व्यापार आॅनलाइन फूड चेन सप्लाई व मल्टी नेशनल कम्पनियों के द्वारा किया जा रहा है,
परन्तु आॅनलाइन फूड सप्लाई के डिलीवरी करने वाले व्यक्तियों के पास फूड लाइसेंस नहीं
है। अतः आपसे अनुरोध है कि सभी आॅनलाइन व फूड चेन सप्लाई डिलीवरी करने वाले व्यक्यिों
के खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के नियमों के अनुसार रजिस्टैªशन व लाइसेंस बनवाये
जाने के आदेश पारित करने की कृपा करें।
4. प्रत्येक जिले में अनकों रजिस्टेªशन अधिकारी हैं, जिन्हें
फील्ड का काम भी करना होता है। अतः आपसे अनुरोध है कि प्रत्येक जिले में एक ही रजिस्टेªशन
अर्थोरिटी नियुक्त करने की कृपा करंे। रजिस्टेªशन अधिकारी को फील्ड का कार्य न दिया
जाए।
5. खाद्य पदार्थों की पैकिंग की आईटम में रिटेल का व्यापारी
कोई मिलावट या कमी नहीं कर सकता है एवं का खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में दिये
गये पैकिंग एण्ड लेवलिंग एक्ट के कानूनों को पूरा करने में रिटेल व थोक के व्यापारी
का कोई योगदान नहीं है। पैकिंग कम्पनियों द्वारा तैयार कर भेजी जाती है, जिसमें रिटेल
का व्यापारी कोई मिलावट या पैकिंग में कोई संशोधन नहीं कर सकता है। न्याय निर्धारण
अधिकारी द्वारा कम्पनियों के साथ-साथ रिटेल व थोक के व्यापारियों को भी दण्डित किया
जा रहा है। अतः आपसे अनुरोध है कि पैकिंग के सामान में किसी भी प्रकार की कमी पाई जाने
पर सिर्फ पैकिंग करने वाले फर्म या कम्पनी को ही दोषी माना जाए, होलसेलर व रिटेलर को
दण्डित न किया जाये।
6. खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा मल्टी नेशनल कम्पनी
व फूड सप्लाई चेन के डिलीवरी होने वाले सामानों की सैम्पलिंग नहीं की जा रही है। अतः
आपसे अनुरोध है कि आॅनलाइन फूड सप्लाई चेन की सैम्पलिंग भी नियमानुसार की जाये, जिससे
आम जनता को सही सामान मिलना सुनिश्चित हो सके।
7. खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा सैम्पिल लेते समय रिटेल
के व्यापारियों को लिये गये सामान का भुगतान नहीं किया जा रहा है व फार्म 5 क भरकर
मौके पर नहीं दिया जाता है, जिससे व्यापारी का उत्पीड़न हो रहा है। अतः आपसे अनुरोध
है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये जाऐं कि सैम्पिल भरे जाते समय
फार्म-5 क पूरी तरह से भरकर व्यापारी को मौके पर उपलब्ध कराऐं तथा सैम्पिल के लिए प्राप्त
किये गये सामान का भुगतान व्यापारी को करना सुनिश्चित करें एवं सील बंद वस्तु की संपलिंग
की जाने की दशा में निर्माता को फार्म 5 क पंजीकृत डाक द्वारा तुरंत भेजा जाए।
8. सैम्पलिंग के समय व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों को
मौके पर बुलाया जाए, जिससे सही प्रकार सैम्पलिंग की कार्यवाही पूर्ण हो सके तथा व्यापारी
का उत्पीड़न न हो सके तथा व्यापारी से विभाग के बिचैलियों द्वारा किसी भी प्रकार की
अवैध वसूली न हो सके।
9. फर्जी शिकायतों के आधार पर की जा रही सैम्पलिंग बन्द
की जाए। शिकायतकर्ता की सत्यता की जांच व मिलावट के पुख्ता सबूत होने पर ही सैम्पलिंग
की जाए, जिससे व्यापारी उत्पीड़न व भ्रष्टाचार पर रोक लगाया जाए।
10. औद्योगिक इकाइयों में केन्द्रीय लाइसेंस होने पर केन्द्रीय
खाद्य सुरक्षा अधिकारी व प्रान्तीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी दोनों विभागों द्वारा अलग-अलग
जाॅच, सर्वे सैम्पलिंग के अधिकार दिए गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार व व्यापारी उत्पीड़न
को बढ़ावा मिल रहा है। एक देश एक कानून एक अधिकारी एक दफ्तर की व्यवस्था को लागू किया
जाए।
11. खेती में कीटनाशक व रासायनिक खाद डालने का मानक तय
नहीं है। अंधाधुंध कीटनाशक व रासायनिक खादों का प्रयोग खेती में किया जा रहा है। सिंचाई
के लिए प्रयोग किये जाने वाला जल पूरी तरीके से दूषित हो चुका है, जिससे हमारे यहाॅ
के खेती से प्राप्त होने वाले खाद्ययान में रासायन व कीटनाशक भारी मात्रा में पाए जा
रहे हैं, जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। परन्तु खाद्यय सुरक्षा
मानक अधिनियम के मानकों मंे बदलाव नहीं किया गया है। अतः आपसे अनुरोध है कि वर्तमान
परिस्थिति के अनुसार खाद्यय पदार्थों के मानक तय किये जायें तथा कृषि विभाग को खेती
में प्रयोग होने वाले कीटनाशक व रासायनिक खाद के मानक तय करने के लिए लिखा जाए। जब
तक नए सिरे से मानक तय नहीं किये जाते हैं। व्यापारियों के सैम्पिल न भरे जाएं।
12. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में निर्माताओं से
आॅनलाइन सालाना व छमाही रिटर्न माॅगी जा रही है। निर्धारित समय पर जमा न करने पर रू0
100 प्रतिदिन लेट फीस लगाई जा रही है, जिन व्यापारियों की पूर्व में रिटर्न जमा नहीं
है, उन पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। रिटर्न जमा करने पर पिछला मांगा जा रहा जुर्माना
समाप्त करने के आदेश पारित करने की कृपा करे एवं कुटीर घरेलू व मझौले उद्योग इसकी पूर्ति
न कर पाने के कारण नष्ट हो जाएंगे।
अतः आपसे अनुरोध है कि 5 करोड़ तक टर्न ओवर वाले निर्माताओं
से आॅनलाइन सालाना व छमाही रिटर्न की व्यवस्था समाप्त करने की कृपा करें। जानकारी के
अभाव में बहुत सारे व्यापारी समय से एनुवल रिटर्न (डी-वन फार्म) नहीं जमा कर पाए हैं।
ऐसे व्यापारियों से भारी जुर्माना वसूला जा रहा है। आपसे अनुरोध है कि समाधान योजना
चलाकर पिछला जुर्माना माफ किया जाये तथा जुर्माने के रूप में जमा कराई गई धनराशि व्यापारी
को वापिस की जाए।
13. खाद्यय सुरक्षा एवं मानक अधिनियम में निर्माताओं से
प्रत्येक छः माह में खाद्यय पदार्थों की जांच एन.ए.बी.एल. लैब से कराकर जांच रिपोर्ट
पोर्टल पर अपलोड़ कराई जा रही हैं। एन.ए.बी.एल. लैब सरकार द्वारा निर्धारित की गई है।
एन.ए.बी.एल. लैब से जांच रिपोर्ट अपलोड़ होने के बाद भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा
सैम्पलिंग की जा रही है। दोहरी व्यवस्था लागू होने से व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ रहा
है। एन.ए.बी.एल. लैब से जांच कराकर रिपोर्ट अपलोड़ करने के बाद खाद्यय सुरक्षा अधिकारी
द्वारा की जा रही सैम्पलिंग पर रोक लगाई जाए।
14. उत्तर प्रदेश में संपलिंग के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों
को लक्षय दिये गए है प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी जिलो में तैनात खाद्य सुरक्षा अधिकारियों
को समान अनुपात में लक्षय दिये गए है। लक्ष्य आधारित संपलिंग से भ्रष्टाचार व व्यापारी
उत्पीड़न को बढ़ावा मिलता है। लक्षय आधारित संपलिंग किए जाने के स्थान पर मिलावट की पुख्ता
जानकारी होने पर संपलिंग की जाए। सर्विसलांस सैम्पिल की व्यवस्था तुरन्त समाप्त की
जाए।
15. खाद्य विश्लेषण अधिकारी द्वारा मानको के आधार पर नमूना
फ़ेल होने पर अधोमानक की जगह असुरक्षित लिख कर रिपोर्ट भेजी जा रही है, यह कार्यवाही
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रविधानों के बिलकुल विरुद्ध है। अतः आपसे अनुरोध
है कि जबतक नमूने की जांच में कोई हानिकारक वस्तु न पायी जाए, नमूने को असुरक्षित घोषित
न किया जाए।
16. प्रशासनिक अधिकारी अपर जिला मजिस्ट्रेट आदि को न्याय
निर्णयक अधिकारी राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किये गये हैं। प्रशासनिक अधिकारी प्रशासनिक
कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे न्याय निर्णय में समय लगता है। समय लगने से व्यापारी
उत्पीड़न को बढ़ावा मिलता है तथा तकनीकी जानकार न होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी मात्र
अधिकतम जुर्माना वसूल करना चाहते हैं वह वाद को गुण दौषों के आधार पर तय करने की इच्छा
नहीं रखते। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (फूड एक्ट) के लिये पूर्णकालिक न्याय निर्णायक
अधिकारी की नियुक्ति की जानी आवश्यक है, जिससे व्यापारी को शीघ्र न्याय मिल सके।
17. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के सभी मामलों को
अदालतों में भेजा जा रहा है। एक्ट में दी गई धारा-69 के अनुसार अधिकांश मामलों को शमन
शुल्क जमा कराकर समाप्त किया जा सकता है। अधिकांश सभी विभागों में भी अनावश्यक मुकदमें
आदि से बचने के लिए शमन शुल्क जमा कर मुकदमा समाप्त करने की व्यवस्था की गई है। शमन
शुल्क व्यवस्था लागू करने से सरकार पर भी अनावश्यक मुकदमों के बोझ का भार कम होगा।
अतः अभिहीत अधिकारी कार्यालय में शमन शुल्क जमा कराने की व्यवस्था लागू की जाए।
18. खाद्यय सुरक्षा व मानक अधिनियम में अपीलों की सुनवाई
के लिए जिला जज को अधिकृत किया गया है, जिससे अपीलकर्ता को न्याय मिलने में अधिक समय
लगता है। खाद्यय सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 की धारा-70 के अनुसार खाद्यय सुरक्षा
अपील अभिकरण की स्थापना की जाये, जिसमें सिर्फ खाद्यय सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की
सुनवाई हो।

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