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Monday, February 2, 2026

शैक्षणिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव का बजट



डा. अवधेश कुमार यादव
नित्य संदेश, कुल्लू। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के संघीय बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए कुल 1,39,289.48 करोड़ का अनुमानित प्रावधान किया गया है, जो विकसित भारत-2047 की मजबूत नींव रखने वाला कदम माना जा रहा है। यह राशि कुल बजट व्यय का लगभग 2.6 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 8.27 प्रतिशत अधिक है तथा शिक्षा मंत्रालय के लिए अब तक का सर्वाधिक आवंटन है। हालांकि, यह धनराशि एनईपी-राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य (शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत व्यय) से काफी कम है, लेकिन वृद्धि मुद्रास्फीति से ऊपर होने के कारण एनईपी के क्रियान्वयन को गति प्रदान करेगी, विशेषकर अनुसंधान, नवाचार, स्किलिंग तथा शिक्षा-रोजगार संबंध स्थापित करने के क्षेत्रों में।

इस कुल आवंटन को शिक्षा मंत्रालय के दो प्रमुख विभागों में विभाजित किया गया है। पहला- स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को 83,562.26 करोड़ (6.35 प्रतिशत की वृद्धि) और दूसरा- उच्च शिक्षा विभाग को 55,727.22 करोड़ (11.28 प्रतिशत की वृद्धि)। यह वृद्धि एनईपी के मूल सिद्धांतों- पहुंच, समानता, गुणवत्ता, सामर्थ्य तथा जवाबदेही को सशक्त बनाती है, जहां शिक्षा को बहु-विषयी, लचीली, कौशल-आधारित और समावेशी बनाने पर बल दिया गया है।

स्कूल शिक्षा में अब तक का सर्वाेच्च आवंटन एनईपी के प्रारंभिक से माध्यमिक स्तर तक की एकीकृत शिक्षा को मजबूत करता है। समग्र शिक्षा अभियान को 42,100 करोड़ प्राप्त हुए हैं, जो पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक निरंतर शिक्षा, बुनियादी ढांचा विकास, शिक्षक प्रशिक्षण तथा डिजिटल क्लासरूम पर केंद्रित है। पीएम पोषण योजना को 12,750 करोड़ मिले हैं, जो 11 करोड़ से अधिक बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर उपस्थिति बढ़ाती है और कुपोषण घटाती है, जो एनईपी के समग्र विकास लक्ष्य से संरेखित है। केंद्रीय विद्यालय संगठन को 10,129 करोड़ तथा नवोदय विद्यालय समिति को 6,025 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देते हैं।

नवाचार को स्कूल स्तर पर एकीकृत करने के लिए अटल टिंकरिंग लैब्स को 3,200 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के 500 करोड़ से उल्लेखनीय छह गुना वृद्धि है। ये लैब्स छात्रों में वैज्ञानिक सोच विकसित करती हैं तथा साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) आधारित प्रोजेक्ट्स पर कार्य करती हैं, जिससे ड्रॉपआउट दर घटेगी और विज्ञान में रुचि बढ़ेगी। एनईपी के डिजिटल एवं क्रिएटिव शिक्षा फोकस को देखते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज, मुंबई के सहयोग से 15,000 माध्यमिक स्कूलों तथा 500 कॉलेजों में एवीजीसी (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित की जाएंगी। यह ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को मजबूत करेगा तथा छात्रों को प्रारंभिक स्तर से अनुसंधान-आधारित क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स में शामिल करेगा।

उच्च शिक्षा में एनईपी का बहु-विषयी तथा अनुसंधान-उन्मुख दृष्टिकोण प्रमुख है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों को 17,440 करोड़ तथा यूजीसी को 3,709 करोड़ प्राप्त हुए हैं। आईआईटी, एनआईटी तथा आईआईएम जैसे संस्थानों के लिए बढ़ा फंड एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर केंद्रित है, जिसमें एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए 250 करोड़ तथा एआई इन एजुकेशन पहल के लिए 100 करोड़ का प्रावधान है। यह उभरती तकनीकों के एकीकरण को मजबूत करेगा। पीएम रिसर्च फेलोशिप को 10,000 स्कॉलर्स तक विस्तारित किया गया है, जो युवा शोधकर्ताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। पीएम रिसर्च चेयर योजना के लिए 200 करोड़ तथा पीएम वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन योजना को 2,200 करोड़ मिले हैं, जो शोध पत्रों तथा जर्नल्स तक केंद्रीकृत पहुंच सुनिश्चित करेगी तथा वैश्विक स्तर के अनुसंधान को समर्थन देगी।

एनईपी में अनुसंधान एवं विकास पर जीडीपी का कम से कम 1 प्रतिशत व्यय तथा एनआरएफ ( राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन) के माध्यम से मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च को बढ़ावा देने का प्रावधान है। इस बजट में उच्च शिक्षा में अनुसंधान आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि से यह लक्ष्य निकट आता दिखता है। पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स की स्थापना (औद्योगिक गलियारों के निकट विश्वविद्यालय, रिसर्च संस्थान, स्किल सेंटर तथा आवासीय सुविधाओं के साथ) इंडस्ट्री-एकेडमिया लिंकेज को मजबूत करेगी, जहां संयुक्त प्रोजेक्ट्स जैसे एआई, बायोटेक्नोलॉजी तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर कार्य होगा। हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल की स्थापना (कैपिटल सपोर्ट से), एसटीईएम में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाएगी, जहां वर्तमान दर अपेक्षाकृत कम है तथा एनईपी की लैंगिक समानता तथा अनुसंधान में महिलाओं की भूमिका को सशक्त बनाएगी।

नए संस्थानों में तीन नए एनआईपीईआर (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च), पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी का अपग्रेड एनईपी के बहु-विषयी तथा व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देंगे। एनआईपीईआर फार्मास्यूटिकल रिसर्च पर फोकस करेंगे, जो बायोफार्मा तथा ड्रग डिस्कवरी में भारत को वैश्विक नेता बनाने की दिशा में सहायक होंगे। ‘एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज’ की हाई-पावर्ड स्टैंडिंग कमिटी गठित होगी, जो शिक्षा को सेवाओं क्षेत्र (10 प्रतिशत वैश्विक हिस्सेदारी लक्ष्य) तथा उभरती स्किल्स से जोड़ेगी तथा एआई के प्रभाव का मूल्यांकन करेगी।

अन्य क्षेत्रों में 100,000 एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स जोड़ना, तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, वेटरनरी शिक्षा के लिए सब्सिडी तथा खेलो इंडिया मिशन के तहत स्पोर्ट्स साइंस एनईपी के स्वास्थ्य, पर्यटन तथा खेल शिक्षा को मजबूत करेंगे, जहां अनुसंधान जैसे स्पोर्ट्स साइंस में बायोमैकेनिक्स तथा पोषण पर फोकस होगा। एम्स, नई दिल्ली को 5,500.92 करोड़ तथा एनआईएमएचएएनएस-2 की स्थापना मेन्टल हेल्थ रिसर्च को बढ़ावा देगी। यह बजट शिक्षा व्यवस्था के मौजूदा परिदृश्य को सकारात्मक रूप से बदलने वाला है, क्योंकि यह एनईपी के विभिन्न स्तंभों- अनुसंधान एकीकरण, समावेशिता, कौशल विकास तथा रोजगार-उन्मुखीकरण को एक साथ मजबूत करता है। 

यह बजट अनुसंधान एकीकरण, समावेशिता, कौशल विकास तथा रोजगार-उन्मुखीकरण के माध्यम से एनईपी के स्तंभों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अनुसंधान पर फोकस (एनआरएफ, पीएम रिसर्च चेयर, वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन), एआई तथा क्रिएटिव स्किल्स (एवीजीसी लैब्स) तथा इंडस्ट्री-एकेडमिया लिंकेज (यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स, स्टैंडिंग कमिटी) भविष्योन्मुखी हैं। यदि क्रियान्वयन मजबूत हो, फंड का उपयोग समयबद्ध व प्रभावी हो तथा राज्य स्तर पर समन्वय बढ़े, तो शैक्षणिक परिदृश्य में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। 

(लेखक राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय के सहायक प्रोफेसर हैं।)

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