सपना सीपी साहू
नित्य संदेश, इंदौर। शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, किला भवन, इंदौर (म.प्र.) द्वारा 16 व 17 जनवरी को उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल के सहयोग से "समकालीन कला साहित्य, संगीत एवं नृत्य का विज्ञान एवं समाज विज्ञान से अंतर्संबंध" विषय पर दिनांक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
प्राचार्य डॉ. बी. डी. श्रीवास्तव के संरक्षण, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. वी.पी. बैरागी के मार्गदर्शन और चित्रकला विभाग एवं IQAC विभाग द्वारा किया गया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य कला एवं साहित्य को विज्ञान तथा समाज विज्ञान के साथ नए दृष्टिकोण से समझने तथा समकालीन संदर्भों में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित करना था। कैनवास पर सभी अतिथियों द्वारा पेंटिंग बनाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया l संगोष्ठी की संयोजक डॉ. कुमकुम भारद्वाज ,
एवं डॉ. सुधीर कुमार छारी ने इसकी आवश्यकता को बतायाl मुख्य अतिथि डॉ. दीपक सालवी द्वारा संगोष्ठी के विषय पर बीज वक्तव्य दिया गया तथा डॉ कनुप्रिया ने कला, साहित्य, नृत्य, चित्र का आपस में अंतर्संबंध को बताया।
डॉ. मीनाक्षी स्वामी ने अपने वक्तव्य में कहा कि कला का आगमन विज्ञान से भी पहले हुआ है। जाने माने पत्रकार डॉ.प्रतीक श्रीवास्तव ने कला एवं कलाकारों की चुनौतियों को बताते हुए कहा कि बाजारवाद से बचना चाहिए। ओरांव जनजाति की अग्नेश केरकट्टा ने कैनवास पर लाइव पेंटिंग बनाकर बताई। डॉ. भावना ग्रोवर ऑनलाइन माध्यम से जुड़ी। संगोष्ठी की सबसे आकर्षक प्रस्तुति श्री देवाशीष चक्रवर्ती का सितार वादन था।
उन्होंने ‘बृजवीणा’ का वादन कर पूरे सदन को भाव विभोर कर दिया। अंतिम प्रस्तुति डॉ. देवेंद्र कुमरे द्वारा दी गई । द्वितीय सत्र में शोध पत्रों का वाचन किया गया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार डॉ. निधि गुप्ता द्वारा दिया गया। यह जानकारी मीडिया संयोजक डॉ.प्रेरणा ठाकुर तथा नीरज चौहान द्वारा दी गयी ।
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