बिना लाइसेंस–बिना हेलमेट छात्र दौड़ा रहे हैं मौत की रफ्तार
तरुण आहुजा
नित्य संदेश, मेरठ। शहर की सड़कों पर अब एक नया और चिंताजनक दृश्य आम होता जा रहा है। जिन छात्रों को नियमों के अनुसार न तो बाइक चलाने की अनुमति है और न ही कार चलाने का लाइसेंस, वही नौनिहाल आज खुलेआम कार का स्टीयरिंग थामे तेज रफ्तार में सड़कें नाप रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि पहले बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले छात्र-छात्राओं के हाथ में अब कार की चाबी आ चुकी है। जिसका जीता जागता सबूत आज सुबह रंगोली रोड पर देखने को मिला। तीन स्कूल छात्र उम्र करीब 18 वर्ष न ट्रैफिक नियमों की समझ, न दुर्घटना का डर—बस रफ्तार और रोमांच। एक महिला को साइड भी मारी अब सवाल यह है कि यदि कोई बड़ा हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? शहर के कई इलाकों में नाबालिग छात्रों को बिना लाइसेंस वाहन चलाते हुए आसानी से देखा जा सकता है। न तो अभिभावकों की ओर से कोई रोक-टोक दिखाई देती है और न ही ट्रैफिक पुलिस की सख्त कार्रवाई। नियम केवल कागजों तक सीमित नजर आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल और कॉलेज के आसपास सबसे ज्यादा ऐसे मामले देखने को मिलते हैं, जहां छात्र बिना हेलमेट, बिना लाइसेंस और बिना किसी डर के वाहन दौड़ाते हैं। यह स्थिति न सिर्फ उनकी जान के लिए खतरा है, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि नाबालिगों को वाहन कौन दे रहा है? अभिभावकों की जिम्मेदारी कहां है? ट्रैफिक पुलिस की निगरानी क्यों नहीं? यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
जरूरत है कि छात्र-छात्राओं पर सख्त पाबंदी लगे, अभिभावकों को जवाबदेह बनाया जाए और ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए—वरना नौनिहालों के हाथ में स्टेयरिंग, सड़क पर मौत का निमंत्रण बनती रहेगी।
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