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Wednesday, January 28, 2026

विश्व कुष्ठ रोग दिवस (30 जनवरी): एक जागरूकता पहल


प्रो. (डॉ.) अनिल नौसरान
नित्य संदेश। विश्व कुष्ठ रोग दिवस प्रत्येक वर्ष 30 जनवरी को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और कलंक को समाप्त करना तथा यह संदेश देना है कि कुष्ठ रोग पूर्णतः उपचार योग्य है। चिकित्सा विज्ञान में प्रगति के बावजूद आज भी इस रोग को लेकर समाज में अनेक गलत धारणाएँ बनी हुई हैं, जिन्हें दूर करना अत्यंत आवश्यक है।

कुष्ठ रोग, जिसे हैन्सन रोग भी कहा जाता है, एक दीर्घकालिक जीवाणुजनित रोग है, जो *Mycobacterium leprae* नामक जीवाणु के कारण होता है। यह मुख्य रूप से त्वचा एवं परिधीय नसों को प्रभावित करता है और समय पर उपचार न होने पर विकृति एवं विकलांगता का कारण बन सकता है।

* यह एक जीवाणुजनित रोग है
* यह संक्रामक रोग है, किंतु अत्यधिक संक्रामक नहीं
* लंबे समय तक निकट संपर्क से फैल सकता है
* रोग की ऊष्मायन अवधि लंबी होती है, जो महीनों से लेकर वर्षों तक हो सकती है !

कुष्ठ रोग मुख्य रूप से निम्न अंगों को प्रभावित करता है:
* त्वचा
* परिधीय नसें
* ऊपरी श्वसन मार्ग की श्लेष्मा
* उन्नत अवस्था में आँखें

मुख्य नैदानिक लक्षण
* दर्द रहित त्वचा के घाव या अल्सर
* त्वचा पर हल्के या लाल धब्बे जिनमें संवेदना कम या समाप्त हो जाती है
* नसों का मोटा होना
* हाथ-पैरों में सुन्नता या झनझनाहट
* उन्नत अवस्था में मांसपेशियों की कमजोरी

दर्द रहित अल्सर इसकी विशेष पहचान है, जिसके कारण रोगी देर से चिकित्सक के पास पहुँचते हैं। शीघ्र निदान अत्यंत आवश्यक है, जो निम्न आधारों पर किया जाता है:
* नैदानिक परीक्षण
* स्किन स्मीयर परीक्षण
* ऊतक (हिस्टोपैथोलॉजी) परीक्षण
* नसों की जाँच

कुष्ठ रोग पूर्णतः उपचार योग्य और ठीक होने वाला रोग है। इसका उपचार बहु-औषधि चिकित्सा (MDT) द्वारा किया जाता है, जो:
* सुरक्षित है
* प्रभावी है
* राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अंतर्गत निःशुल्क उपलब्ध है

समय पर उपचार से विकलांगता, विकृति और संक्रमण को रोका जा सकता है। विश्व स्तर पर कुष्ठ रोग की प्रचलन दर में उल्लेखनीय कमी आई है, फिर भी यह रोग आज भी मौजूद है। भारत आज भी वैश्विक स्तर पर कुष्ठ रोग के मामलों में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिससे निरंतर निगरानी और जागरूकता की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

कुष्ठ रोग नियंत्रण में सबसे बड़ी बाधा सामाजिक कलंक है, जिसके कारण:
* रोगी देर से उपचार लेते हैं
* उपचार अधूरा छोड़ देते हैं
* सामाजिक बहिष्कार का सामना करते हैं

सही जानकारी और जन-जागरूकता ही इस कलंक को समाप्त कर सकती है। विश्व कुष्ठ रोग दिवस का महत्व
* शीघ्र निदान एवं उपचार को बढ़ावा देता है
* यह स्पष्ट करता है कि कुष्ठ रोग न तो अभिशाप है और न ही वंशानुगत रोग
* करुणा, समानता और सामाजिक समावेशन को प्रोत्साहित करता है
* राष्ट्रीय एवं वैश्विक उन्मूलन प्रयासों को सुदृढ़ करता है

कुष्ठ रोग एक उपचार योग्य, नियंत्रित एवं समाप्त किया जा सकने वाला रोग है। समय पर पहचान, उचित उपचार और समाज में जागरूकता के माध्यम से इस रोग के बोझ को समाप्त किया जा सकता है। 

विश्व कुष्ठ रोग दिवस पर हमें विज्ञान, मानवता और गरिमा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति अज्ञानता या भेदभाव के कारण पीड़ित न हो।

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