नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। लोहिया नगर स्थित सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल इन दिनों शिक्षा से ज़्यादा आंतरिक विवादों के कारण सुर्खियों में है। स्कूल संचालित करने वाले ट्रस्ट के ट्रस्टियों के बीच चल रहा आपसी टकराव अब इस हद तक बढ़ चुका है कि उसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बोर्ड परीक्षाएँ बेहद नज़दीक हैं, लेकिन स्कूल का शैक्षणिक माहौल अस्थिर बना हुआ है। विद्यालय प्रबंधन से जुड़ी खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक अनिश्चितता के कारण छात्र-छात्राएँ मानसिक दबाव में हैं, वहीं अभिभावकों की नींद भी उड़ चुकी है। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में सौंपा था, लेकिन आज वही भविष्य अनिश्चितता के अंधेरे में फंसा हुआ है। स्कूल के भीतर चल रहे विवादों की चर्चा बच्चों तक पहुँच रही है, जिससे उनका ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है। कई छात्रों ने यह भी बताया कि वे परीक्षा की तैयारी तो करना चाहते हैं, लेकिन माहौल उन्हें असहज कर रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह समय मानसिक स्थिरता और अनुशासन का होता है। ऐसे में यदि स्कूल प्रबंधन स्वयं असंतुलन का शिकार हो, तो बच्चों के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
👉 क्या ट्रस्टी अपने व्यक्तिगत अहं और विवाद से ऊपर उठकर बच्चों के भविष्य के बारे में सोचेंगे?
👉 क्या शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन समय रहते हस्तक्षेप करेगा?
अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि वह तत्काल संज्ञान लेकर यह सुनिश्चित करे कि बोर्ड परीक्षाओं से पहले स्कूल का शैक्षणिक वातावरण सामान्य हो बच्चों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी लड़ाई का शिकार न बनाया जाए
क्योंकि यदि समय रहते स्थिति नहीं संभाली गई, तो इसका खामियाजा उन बच्चों को भुगतना पड़ेगा, जिनका इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। बच्चों का भविष्य किसी ट्रस्ट विवाद की बलि नहीं चढ़ना चाहिए।
डॉ अनीता पुंडीर
राष्ट्रीय सचिव शिक्षक सभा
समाजवादी पार्टी
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