Breaking

Your Ads Here

Saturday, January 31, 2026

जातिवीहिन समाज के निर्माण के लिए जातियों का बंधन तोड़ना होगा- डॉ. अतुल कृष्ण



सामाजिक समरसता, संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा का सशक्त संदेश

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठः सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और सामाजिक विभाजनों को दूर करने के अपने निरंतर प्रयास में, सनातन संगम न्यास – एसवीएसयू इकाई, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के उन दूरदर्शी संकाय सदस्यों को सम्मानित करने के लिए एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया जिन्होंने अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाहों को अपनाया है और जातिविहीन समाज के संदेश का सक्रिय रूप से प्रचार किया है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री (आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स) सुनिल शर्मा उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष विनीत अग्रवाल शारदा ने की।  इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों के द्वारा सुभारती सनातन मंत्र के उच्चारण के मध्य सनातनी ज्योति प्रज्ज्वलित की गई। इस दौरान मंच पर कवि डॉ. हरिओम पंवार, सुभारती विश्वविद्यालय की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शल्या राज, सनातन संगम न्यास के सुभारती इकाई के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राघव भी मौजूद रहे।  

कार्यक्रम में अपने संबोधन में मुख्य अतिथि सुनील शर्मा ने कहा कि यह आयोजन एक ऐसे गुढ़ विषय पर है जिस पर विस्तृत रुप से चर्चा होनी चाहिए। यह दुर्भाग्य है कि आज राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिए भारतीय समाज को जातियों में बांट दिया गया। हमारी संस्कृति को विदेशी आक्रातांओं व उनके लोगों के द्वारा विकृत किया गया। सनातन धर्म ही केवल ऐसा धर्म है जहां अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है एवं इस धर्म में ही यह सिद्धांत है कि यह अपनी कुरीतियों को त्यागकर आगे बढता है। सनातन संगम न्यास के द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सनातन के मूल भाव को आगे बढ़ाने व पोषित करने वाला है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सनातन संगम न्यास व सुभारती समूह के संस्थापक डॉ. अतुल कृष्ण ने कहा कि यह कार्यक्रम सुभारती समूह के इन संकाय सदस्यों को सम्मानित करने का है जिन्होंने अंतरजातीय/अंतरधार्मिक विवाहों को अपनाकर जातिविहीन समाज के संदेश का सक्रिय रूप से प्रचार किया है। यह नेक पहल प्राचीन भारतीय आदर्श "वसुधैव कुटुंबकम" (विश्व एक परिवार है) को दर्शाती है और विश्वविद्यालय समुदाय को अधिक समावेशी और एकजुट समाज के निर्माण की दिशा में प्रेरित करने का लक्ष्य रखती है। आज अगर हमें देश को आगे बढ़ाना है तो हमें देश में जातिविहिन समाज का निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा कि यह एक कटु सत्य है कि समाज में एक वर्ग के द्वारा दूसरे वर्ग के साथ भेदभाव किया गया व अमानवीय व्यवहार किया। इस तथ्य को स्वीकार करते हुए हमें अपने पूर्वजों के द्वारा किए गए इन दुष्कार्यों के लिए आज आगे आकर सार्वजनिक माफी मांगनी होगी। इसी क्रम में दूसरे पक्ष के लोगों को भी क्षमा मांगने वाले लोगों को पिछली बातों को भूलाकर गले लागाना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह परिकल्पना सुभारती की कल्पना नहीं बल्कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की है। उनका यह मानना था कि जातिविहीन समाज ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।  हमें सामाजिक समरसता की ओर बढ़ते हुए समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा।

कार्यक्रम के अध्यक्ष विनीत अग्रवाल शारदा ने कहा कि यह जो शुरुआत की गई है सनातन संगम न्यास के द्वारा यह सराहनीय प्रयास है। समाजवाद के पुरातन विचार को आज भी जीवंत रखने वाले डॉ. अतुल कृष्ण साधुवाद के पात्र हैं। वे सदा ही समाज के प्रेरणास्रोत हैं व समाज के नवनिर्माण में लगे रहते हैं। वह सराहनीय है।
इस अवसर पर अपने विचारों को रखते हुए सुभारती विश्वविद्यालय के महानिदेशक मेज.जन. (डॉ.) जी.के.थपलियाल, एसएम(सेनि.) ने कहा कि हमारे सनातन में महाभारत काल तक अंतरजातीय विवाह मान्य थे। किंतु मध्यकाल में इसमें परिवर्तन आया। आज पुनः यदि हम भारत को विश्वगुरु बनाना चाहते हैं और विकसित भारत का निर्माण करना चाहते हैं तो हमें अपने युवाओं को इसके लिए तैयार करना होगा और मैं बड़े ही गर्व के साथ कह सकता हूं कि हमारा सुभारती परिवार सदैव इस कार्य में अग्रणी की भूमिका निभाता रहा है। यहां हम अपने विद्यार्थियों को शिक्षा, सेवा, संस्कार एवं राष्ट्रीयता का भाव सिखाते हैं जिसमें जातिविहीन समाज का निर्माण भी एक महत्वपूर्ण आयाम है।

सनातन संगम न्यास के मेरठ इकाई के अध्यक्ष डॉ.प्रदीप राघव ने सनातन संगम न्यास का परिचय दिया। इस क्रम में उन्होंने बताया की सनातन संगम न्यास चार सूत्रीय कार्यक्रम पर चलता है जिसमें सहभोज, नाम से उपनाम हटाना, सहधर्माचरण, अंतरजातीय व अंतर्मतीय विवाह को प्रोत्साहित करना एवं समाज के निचले स्तर के लोगों को सार्वजनिक रुप से आगे लाने का कार्य करते हैं।

सनातन संगम न्यास के द्वारा इस सम्मान समारोह में सामाजिक परिवर्तन के मार्गदर्शक सम्मान, सामाजिक एकीकरण उत्कृष्टता सम्मान व मधुहरे सम्मान दिया गया। इस कार्यक्रम में सामाजिक एकीकरण उत्कृष्टता सम्मान में कुल 21 जोड़ों को जिनमें अधिकांश सुभारती समूह के संकाय सदस्यों जैसे कि डॉ. शल्या राज-डॉ. रोहित रविंद्र,  डॉ. कृष्णामूर्ति डॉ. आकांक्षा, डॉ. राहुल बंसल व डॉ. रानी बंसल, डॉ. सत्यम खरे व डॉ. अंजलि खरे, डॉ. निखिल श्रीवास्तव डॉ. विनिता पांडेय,विवेक तिवारी व डॉ. अर्चिता भटनागर डॉ. जसकिरण कौर डॉ. नरेश कुमार डॉ. अपूर्व पवार व डॉ. अंशु त्रिवेदी, डॉ. दीपक राघव डॉ. दीपीका चौधरी, डॉ. अभिनव शर्मा डॉ. प्रगति रावत, डॉ. सिद्धार्थ तोमर, डॉ. नवप्रीत कौर, डॉ. सुपुर्णा पंडित, डॉ. ध्रुव गर्ग, गुंजाली सिंह, कोमल सक्सेना व प्रेम, नेहा व तरुण, प्रभात व सुरभी, डॉ. कुणाल अरोड़ा डॉ. सुमिता सिंह, विशाल कुमार विश्वकर्मा व स्वाति वधावन, पारखी रस्तोगी व अभिषेक सक्सेना, मोहित यादव व चंचल शर्मा, डॉ. नीरु सिंह, सामाजिक परिवर्तन के मार्गदर्शक सम्मान से सम्मानित होने वालों में पूनम राणा व ओम राणा एवं तनिष्क त्यागी व ममता त्यागी आदि रहे।

   इस अवसर पर वीर रस के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. हरिओम पंवार ने अपनी ओजस्वी कविताओं के द्वारा लोगों में ऊर्जा का संचार किया। इस कार्यक्रम का संचालन  डॉ. मोनिका मेहरोत्रा ने किया वहीं आधिकारिक धन्यवागद ज्ञापन सनातन संगम न्यास के महामंत्री अनिल अज्ञात के द्वारा किया गया।

इस अवसर पर सुभारती विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति डॉ. देवेंद्र स्वरुप, डॉ. प्रदीप राघव, डॉ. डी.सी. सक्सेना, कर्नल राजेश त्यागी, पराग गुप्ता, डॉ संचित प्रधान, डॉ इंद्रनील बोस, डॉ मनीष पाठक, डॉ विश्वास मिश्रा, डॉ. मोनिका मेहरोत्रा, प्रिंस सुभारती, राजकुमार सागर, डॉ. पद्मा मिश्रा, डॉ. पिंटू मिश्रा, विवेक सोम आदि मुख्य रुप से उपस्थित रहे।

No comments:

Post a Comment

Your Ads Here

Your Ads Here