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Sunday, January 25, 2026

हमारा संविधान, विविधता को एकतासूत्र में पिरोता महाग्रंथ


नित्य संदेश। 26 जनवरी 1950, यही वह ऐतिहासिक तिथि है जब भारत ने न केवल अपना संविधान लागू किया, बल्कि विश्व पटल पर एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी अमिट पहचान बनाई। 2026 में जब हम अपना 77वां गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) मना रहे हैं, तो यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन संकल्पों को दोहराने का दिन है जिन्हें हमारे संविधान निर्माताओं ने धवल अक्षरों में अंकित किया था।

हमारा भारतीय संविधान 2 साल, 11 महीने और 18 दिन के पश्चात 284 सदस्यों की संविधान सभा द्वारा, जिसमें 15 विदुषी महिलाएं भी सम्मिलित थीं, उनके अथाह परिश्रम, सूझबूझ, विवेक, विचारों, बहस और समझौतों के पश्चात तैयार किया गया विश्व का सबसे वृहद संविधान है। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद थे और इसकी ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। इस महान दस्तावेज को आकार देने में संवैधानिक सलाहकार डॉ. बी.एन. राव की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से संविधान का प्रथम प्रारूप तैयार किया और विश्व भर के कानूनों का सार इसमें पिरोया।

हमारा मूल संविधान प्रेम बिहारी नारायण रायजादा द्वारा अति सुंदर इटैलिक शैली में चर्मपत्र पर हस्तलिखित है। उन्होंने इसे लिखने के लिए 254 पेन निब्स उपयोग में लेकर छः माह तक धैर्य व मनन के साथ लिखा था। हमारे संविधान की सजावट में शांति निकेतन के नंदलाल बोस और राममनोहर सिन्हा जैसे कलाकार भी सम्मिलित थे। इस हस्तलिखित संविधान की मूल प्रति को संसद भवन के पुस्तकालय में हीलियम से भरे चैम्बर में सुरक्षित रखा गया है।

भारतीय संविधान अपनी अनेक विशेषताओं के कारण संसार के सभी संविधानों में अपना विशिष्ट महत्व रखता है। यह दुनिया का सबसे लंबा, लिखित और विशाल संविधान है। इसमें वर्तमान में 25 भाग, 12 अनुसूचियां और 448 से अधिक अनुच्छेद हैं (जो मूलतः 395 थे), जो हमारे कानून-कायदों का विस्तृत वर्णन करते हैं। ये आंकड़े परिवर्तनशील हैं, क्योंकि हमारा संविधान कठोरता और लचीलेपन का सम्मिश्रण है, जो समय व परिस्थिति के अनुसार विशेष प्रक्रिया द्वारा उचित न्याय पाने के लिए बदला जा सकता है।
हमारे देश में लोकतंत्र की व्यवस्था संविधान के द्वारा ही की गई है, जिसमें जनता के शासन को केंद्र में रखा गया है। 

हमारे नियम-कायदों का पिटारा हमारा संविधान, विश्व के सभी संविधानों के श्रेष्ठ तत्वों को अपने में समेटे हुए है। इसका उद्देश्य है कि किसी के साथ अन्याय व अत्याचार न हो। इसके विभिन्न स्रोत हैं-भले ही इसे कुछ लोग उधारी का थैला बोलते हों, पर यह कहना गलत है; सभी देशों से अच्छाई ग्रहण करने के पीछे की मंशा सर्वश्रेष्ठ संविधान बनाने की ही रही थी।

केंद्र और राज्यों के मध्य शक्तियों के बंटवारे के लिए इसमें संघात्मक और एकात्मक दोनों गुणों का समावेश है। यह हमारे मूल कर्तव्य निर्धारित करता है जो स्वयं व राष्ट्र की प्रगति में सहायक हैं। दूसरी ओर, यह हमें समानता, स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने का अधिकार, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक स्वतंत्रता तथा संवैधानिक उपचारों का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। (पूर्व में संपत्ति का अधिकार भी मौलिक अधिकार था, जो अब कानूनी अधिकार है)। हमारे यहाँ संसदीय लोकतंत्र होने से जनता द्वारा चयनित प्रतिनिधि संसद में नए कानून बनाते हैं, जो लोकतंत्र को सशक्त और दृढ़ करता है।

हमारा देश विविधताओं से भरा है। हर प्रांत की अपनी अलग संस्कृति और सभ्यता है; ऐसे में विविधता में एकता के दर्शन संविधान से ही होते हैं। इसका सामाजिक स्वरूप न्याय और समानता पर आधारित है। हमारा गतिशील और आधुनिक संविधान नए हालातों में संशोधन कर जनता के लिए हितकारी बनाया जाता है। वास्तव में, कानून तो वही है जिसे सहर्षता, विश्वास और गौरव के साथ अपनाया जाए, न कि जबरदस्ती थोपा जाए।

हमारा संविधान विस्तृत व्याख्या के साथ अन्य देशों से बहुत अच्छा और विवेकपूर्ण तरीके से लिखा गया है। हम संविधान के जरिए विविधता को स्वीकारते और एक-दूसरे का सम्मान करते हुए राष्ट्रप्रेम, एकता व अखंडता के लिए प्रतिबद्ध होते हैं। इतना विस्तृत और जनता के हित में लिखा विश्व में अन्य किसी भी देश का संविधान नहीं है। हमारे संविधान में न्याय व्यवस्था कठोरता से अधिक बचाव और सुधार की ओर इंगित है, जो कभी-कभी कठिन लग सकती है, पर इसमें मानवता व दया बनाए रखने का उद्देश्य समाहित है।

हमारा संविधान सामाजिक न्याय व्यवस्था व समानता प्रणाली को महत्वपूर्ण मानते हुए नीति-निर्देशित है। यह भी हमारी एक अनूठी विशेषता है। हमारे यहाँ अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान हैं, ताकि सभी समूहों का आर्थिक व सामाजिक विकास साथ-साथ हो। दीनता, हीनता और जातिगत भेदों के साथ-साथ शारीरिक व मानसिक रूप से दिव्यांगजनों के लिए भी हमारा संविधान विशेष सुरक्षा प्रसारित करता है।

भले ही हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा और सर्वजन स्वीकार्य है, पर जब-जब इसे संशोधित करने की बात उठती है, तो यह अन्य देशों की तुलना में एक लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरता है। पर ऐसा सुनिश्चितता और स्थिरता के लिए आवश्यक भी है, जो इसे अन्य देशों से अलग व खास बनाता है।

हमारे देश का संविधान दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है या नहीं, यह बहस का विषय हो सकता है, पर विश्व की सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश में मान्य होने से इसे विश्व का सबसे विशिष्ट और सफल संविधान कहना गलत नहीं होगा। मेरा मानना है कि भारत में विविधता के रंग-बिरंगे पुष्पों को एक जगह एकता के साथ रखने वाला उपजाऊ बाग हमारा संविधान ही है। हम भारतीयों को राष्ट्र सर्वोपरि के भाव के साथ समानता, सुरक्षा, साहस, सम्मान, अधिकार, कर्तव्य बोध और विधि-विधान से गतिमान रखने वाला हमारा महान गणतंत्रात्मक संविधान सदा अजर-अमर रहे।
जय हिंद!

प्रस्तुति 
सपना सी.पी. साहू 'स्वप्निल'
इंदौर, मध्य प्रदेश 

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