मेरठ। संत शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय इंटर कॉलेज नूर नगर में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। सर्वप्रथम रविदास जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्वलित किया गया।
संत शिरोमणि गुरु रविदास का सामाजिक समरसता में योगदान विषयक गोष्टी की अध्यक्षता चौ चरण सिंह विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ वी. राम ने की। संचालन डॉ चरण सिंह लिसाड़ी ने किया। मुख्य वक्ता डॉ कपिल अग्रवाल भाग प्रचार प्रमुख आरएसएस ने कहा कि संत रविदास ने तत्कालीन समाज में व्याप्त विषमताओं की भावना का खंडन किया। उनकी भक्ति भावना को दृष्टिगत रखकर उस समय के अनेक राजा महाराजा भी उनके अनुयाई बन गए। उन्होंने सिकंदर लोदी द्वारा कराये जा रहे थे धर्मांतरण का विरोध किया और रोक लगाने का कार्य किया। उनके 40 पदों को गुरु ग्रंथ साहिब में भी सम्मिलित किया गया।
मुख्य अतिथि डॉ अनिल कुमार निदेशक आयकर विभाग दिल्ली ने कहा कि रविदास जी ने समाज को एकता और सद्भाव का संदेश दिया। वह केवल ईश्वर को मानते थे। मन चंगा तो कटौती में गंगा यह कहावत रविदास जी के समय में रविदास जी के लिए ही बनी और चरितार्थ हुई।
मेरठ कॉलेज के प्रोफेसर वरिष्ठ चिंतक डॉक्टर सतीश प्रकाश ने कहा कि रविदास जी एकदम स्पष्टवादी थे। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीतियों व आडंबर का कड़ा विरोध किया था। रविदास जी समाज सुधारक, कवि व चिंतक थे।
राष्ट्रीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य संजीव कुमार नागर ने कहा रविदास मानवतावादी थे। उन्होंने संपूर्ण दुनिया को भक्ति, प्रेम व मानवता का संदेश दिया।
भारतीय दलित विकास संस्थान के अध्यक्ष डॉ चरण सिंह ने कहा कि संत रविदास सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे। महान चिंतक व समाज सुधारक थे। उन्होंने अपने मूल व्यवसाय जूता बनाने को ही भक्ति व सेवा माना।
कार्यक्रम अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ वी. राम ने कहा कि हमें तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि रविदास जी की भक्ति भावना को देखते हुए राजा परिवार से संबंधित मीराबाई ने उन्हें अपना गुरु माना।
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ आदित्य सिंह ने कहा रविदास जी का समरस और समता मूलक समाज बनाना ही ध्येय था। हमें भी उनके इन आदर्शों को जीवन में अपनाना चाहिए।
इस अवसर पर अमरीश चपराना, धर्मेंद्र प्रधान, चैतन्य देव स्वामी, चंद्रशेखर शोभापुर, मोहनलाल वर्मा, अमरीश कोरी, जतिन लिसाडी, राजकुमार राजू, रीता पेपला, मोहनलाल वर्मा, दीपा गर्ग, चतर सिंह जाटव, चैन लाल हरित प्रधान, मुंशी राम, महेंद्र सेंट्रल बैंक, प्रधानाचार्य अरुण कुमार, डॉ महेंद्र सिंह, आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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