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Saturday, January 31, 2026

हाथों की कारीगरी से स्वावलंबन का संदेश


नर्मदा साहित्य मंथन में हस्त उत्पादों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

विवेक कुमार पाठक 
नित्य संदेश, इंदौर। नर्मदा साहित्य मंथन के अंतर्गत लगी प्रदर्शनी प्रतिभागियों का बरबस ही अपना मन मोह रही है। प्रदर्शनी में पुस्तकों के स्टॉल हैं जिन पर विभिन्न राष्ट्रवादी विचार की पुस्तक आगुंतकों का अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं, इसके साथ ही राष्ट्र सेविका समिति, महू की कार्यकर्ताओं ने स्वावलंबन का अनोखा उदाहरण प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया है। 

यहां पर स्वावलंबन मातृ सृजन सामाजिक एवं महिला कल्याण संस्था, महू के हाथों से बने हुए उत्पाद सभी के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हमने महिला सशक्तिकरण की ओर किए गए इस प्रयास को लेकर स्टॉल पर मौजूद अध्यक्ष साधना शर्मा से बात की। साधना जी राष्ट्र सेविका समिति का दायित्व संभाल रही हैं वहीं उन्होंने महू की अनेक घरेलू महिलाओं को आजीविका उपार्जन का साधन दिया है। उनकी समिति द्वारा समाज में बढ़ते प्लास्टिक के उपयोग को काम करने के लिए वैकल्पिक उत्पाद प्रदर्शनी में प्रस्तुत किए हैं। यह उत्पाद उन महिलाओं ने बनाए हैं जो की इन हस्त उत्पादों को बनाने की पेशेवर दक्षता नहीं रखती हैं। ऐसे में इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अलग तरह से प्रयास समिति ने किये। समिति ने सबसे पहले अपना लक्ष्य रखा की नगर की आम घरेलू परिवार की महिलाएं पहले किसी भी तरह स्वावलंबन का महत्व समझें और सीखने की ललक रखें। भले ही उनसे हस्त उत्पाद बनाने का काम सही हो या गलत लेकिन उनको मौका अधिक दिया जाए। 

अध्यक्ष साधना शर्मा कहती है कि यह धैर्य की परीक्षा लेने वाला काम था लेकिन हमने सोच रखा था कि जब चीन के घर-घर में इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बन सकते हैं और बहुत सारी सामग्रियां चीन के घरों में बनकर हमारे भारतीय बाजारों में आ सकती हैं तो उस मुकाबले के लिए हमें कड़ी मेहनत तो करनी ही होगी साथ ही भारत की घरेलू महिला शक्ति को सबल बनाने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने होंगे। इसी दूरदर्शिता और राष्ट्रवाद की भावना से प्रेरित होते हुए स्वावलंबी मातृ सृजन सामाजिक एवं महिला कल्याण संस्थान ने इन जिज्ञासु महिलाओं को अपने पास बुलाया और कच्चा माल दिया जिससे कि वह अपनी हस्तकला और स्वावलंबन की यात्रा शुरू कर सकें। शुरुआत में घरेलू उपयोग के उत्पाद पेशेवर दक्षता के साथ नहीं बन सके, उनमें बहुत सारी कमी रही लेकिन महिलाओं के प्रयासों को प्रशंसा से पोषित किया। यह नीति कारगर रही इसके बाद कुछ महिलाओं से शुरू हुई या यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रही। एक परिवार की महिलाओं के साथ दूसरे परिवार की महिलाएं भी बैग, धागे की ज्वेलरी साबुन, थालियां को ढकने के सजावटी के कवर, भगवानों की पोशाक साहित्य कई तरह के आकर्षक उत्पाद बनाने लगी। दिन गुजरते और गुजरते समय के साथ कुशलता बढ़ती गई और समिति का काम भी व्यवस्थित होने लगा। 

साधना शर्मा एवं उनके सहयोगी श्रीमती जैन बताती है कि अब सभी कामकाजी महिलाओं का व्यवस्थित हमारी समिति में पंजीयन किया गया है एवं उनके उत्पाद जगह-जगह विभिन्न अफसर पर स्टाल के साथ बाजार में प्रदर्शित किये जा रहे हैं, लोगों को हैंडीक्राफ्ट्स आइटम पसंद भी आ रहे हैं। 
महाविद्यालय एवं विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों में समिति के उत्पाद लोग जब हाथों हाथ खरीदने हैं तो हमको बहुत सुकून मिलता है कि हमने अपनी बहनों को स्वावलंबन की दिशा दिखाई है एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदान की है। विश्व संवाद केंद्र मालवा के नर्मदा साहित्य मंथन का या मंच भी हमको अपने आत्मविश्वास एवं स्वावलंबन को प्रदर्शित करने का अवसर दे रहा है। आज पत्रकारिता एवं जनसंचार सहित अन्य पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले अनेक छात्राओं एवं प्रतिभागी महिलाओं ने पर्स सहित समिति के काम को सार्वजनिक मंच से प्रशंसा मिल रही है। 

हमारा लक्ष्य है कि महू की महिलाओं का यह छोटा सा प्रयास इंदौर जिले का बड़ा प्रयास बने एवं सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग द्वारा घरेलू महिलाओं की इस हस्तकला को प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रदर्शन करने का अवसर मिले। हमारे सभी प्रतिभागी महिलाएं पूरे मध्य प्रदेश को यही संदेश देना चाहती हैं कि विकसित भारत तभी बनेगा जब भारत के घर-घर में हाथों की कला आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगी और भारत के बाजार भारतीयों के बने उत्पादों से ही भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। 

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