नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। रसायन विज्ञान विभाग में ANRF-PM प्रोफेसर एवं देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रो. वी.के. बरनवाल का विशेष भ्रमण आयोजित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान अवसरों के प्रति प्रेरित किया।
अपने प्रेरणादायी बातचीत में प्रो. बरनवाल ने ANRF (Anusandhan National Research Foundation) की भूमिका, प्रधानमंत्री प्रोफेसरशिप योजना, बहुविषयक अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा उच्च प्रभाव वाले शोध प्रकाशनों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शोध का उद्देश्य केवल प्रकाशन तक सीमित न रहकर समाज, उद्योग एवं राष्ट्र की समस्याओं का समाधान होना चाहिए।
उन्होंने संकाय सदस्यों को अनुदान प्रस्ताव लेखन (Grant Proposal Writing), अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा युवा शोधकर्ताओं के मार्गदर्शन पर विशेष बल दिया। शोधार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने धैर्य, अनुशासन और वैज्ञानिक जिज्ञासा को सफल शोध की कुंजी बताया।
कार्यक्रम के दौरान विभागीय संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध विषयों पर चर्चा की, जिस पर प्रो. बरनवाल ने उपयोगी सुझाव एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। यह भ्रमण विभाग के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ।
डॉ. वीरेन्द्र कुमार बरनवाल, प्रतिष्ठित विषाणु एवं पौधा रोग विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने पादप वायरस के सेरोलॉजिकल-मॉलिक्यूलर निदान और डीप सीक्वेंसिंग आधारित वायरल रिसर्च में उत्कृष्ट योगदान दिया है। उन्होंने ICAR-IARI सहित कई राष्ट्रीय संस्थानों में प्रोफ़ेसर/वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया और अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों व संपादकीय दायित्वों से सम्मानित हुए हैं।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विभाग की ओर से प्रो.वी.के. बरनवाल के बहुमूल्य समय एवं मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया गया। प्रोफेसर सोनी ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति श्रीमती डॉक्टर संगीता शुक्ला जी का भी धन्यवाद व्यक्त किया जिनकी वजह से हमें इतने प्रेरणादायक प्रोफेसर से मिलने और उनके संरक्षण में कार्य करने का मौका मिलेगा जिससे विश्वविद्यालय अपनी शोध को और भी गरिमा पूर्ण दिशा में ले जा सकेगे I
कार्य क्रम में मनीषा भारद्वाज, नाजिया तराननुम मीनू तेवतीया पि्यंका कक्रर,निखिल कोशिक एवं मुक्ति वर्मा मोजुद रहे
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