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Monday, January 26, 2026

केंद्रीय बजट 2026-27 में उद्योग एवं व्यापार जगत को राहत प्रदान करने की मांग

 


नित्य संदेश ब्यूरो


मेरठ। केंद्रीय बजट 2026-27 में उद्योग एवं व्यापार जगत को राहत प्रदान किए जाने के संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम एक ज्ञापन मंगलवारक को व्यापारियों की ओर से जिलाधिकारी को सौंपा गया।

उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष लोकेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि देश का उद्योग एवं व्यापार वर्ग स्वतंत्रता के बाद से आज तक निरंतर देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, रोजगार सृजन करने तथा सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता आ रहा है। वर्तमान समय में बढ़ती महंगाई, ऊँची ब्याज दरें, जटिल नियम-कानून एवं साइबर अपराध जैसी समस्याओं के कारण व्यापारी एवं उद्यमी वर्ग गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

इन विचारों पर की जाए राहत प्रदान

1. उद्योग एवं व्यापार के लिए दिए जा रहे बैंक ऋणों की वर्तमान ऊँची ब्याज दरों में कटौती किए जाने का प्रस्ताव लागू किया जाए।

2. व्यापारी एवं उद्यमियों के ऋण खाते मात्र तीन माह की किस्त/ब्याज जमा न होने पर एनपीए घोषित कर दिए जाते हैं, जिससे चलता हुआ व्यापार एवं उद्योग बंद हो जाता है। अतः एनपीए घोषित करने की समय सीमा 3 माह से बढ़ाकर कम से कम 6 माह की जाए तथा एनपीए हो चुके खातों के लिए विशेष पुनर्स्थापना योजना लागू की जाए।

3. देशभर में अनेक औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियाँ आवासीय क्षेत्रों में विगत कई वर्षों से जीएसटी पंजीकरण, कमर्शियल विद्युत कनेक्शन एवं अन्य सभी वैधानिक लाइसेंस प्राप्त कर विधिवत रूप से संचालित हैं, इसके बावजूद नगर निगम, विकास प्राधिकरण एवं अन्य विभागों द्वारा उन्हें सील करने अथवा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है, जो अत्यंत अन्यायपूर्ण है। अतः यह आवश्यक है कि पूर्व से संचालित सभी औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को स्थायी वैधानिक मान्यता प्रदान करने हेतु एक समग्र राष्ट्रीय नीति बनाई जाए तथा ऐसी दंडनात्मक एवं मनमानी कार्यवाहियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

4. जीएसटी के अंतर्गत वर्तमान में उपलब्ध दुर्घटना बीमा 10 लाख रुपये तक सीमित है, जिसे संशोधित करते हुए किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु की स्थिति में 10 लाख रुपये का बीमा लाभ पंजीकृत व्यापारी/उद्यमी को प्रदान किए जाने का प्रावधान किया जाए।

5. बढ़ते हुए साइबर अपराध को रोकने हेतु एक सशक्त, प्रभावी एवं व्यापारी हितैषी राष्ट्रीय कार्य योजना लागू की जाए।

6. साइबर अपराध की स्थिति में यदि कोई अपराधी व्यापारी से खरीदारी कर भुगतान करता है तो संबंधित व्यापारी का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया जाता है, जबकि व्यापारी का इसमें कोई अपराध नहीं होता। अतः अपराधी के अतिरिक्त किसी निर्दोष व्यापारी का खाता फ्रीज न किया जाए, ऐसी स्पष्ट व्यवस्था लागू की जाए।

7. वृद्ध व्यापारियों के जीवन यापन हेतु न्यूनतम 40,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन योजना लागू की जाए।

8. जीएसटी में पंजीकृत व्यापारियों को डिजिटल कार्यों हेतु लैपटॉप एवं आवश्यक सॉफ्टवेयर निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएँ।

9. जीएसटी में विलंब से भुगतान पर 18 प्रतिशत ब्याज लिया जा रहा है, जिसे घटाकर अधिकतम 6 प्रतिशत किया जाए।

10. जीएसटी अधिनियम में दंडात्मक प्रावधानों के अंतर्गत जेल की सजा को समाप्त किया जाए तथा इसे केवल आर्थिक दंड तक सीमित किया जाए।

11. वाहन खरीदते समय एक ओर रोड टैक्स और दूसरी ओर पूरे देश में टोल टैक्स वसूला जा रहा है, जो दोहरा कर है। अतः वाहन पंजीकरण पर लिया जाने वाला रोड टैक्स एवं व्यावसायिक वाहनों से वार्षिक रोड टैक्स समाप्त किया जाए।

12. वर्तमान में आयकर अधिनियम के अंतर्गत कंपनियों पर लगभग 25 प्रतिशत की दर से आयकर लगाया जा रहा है, जबकि साझेदारी फर्मों पर 30 प्रतिशत की उच्च दर से आयकर देय है। जबकि वास्तविकता यह है कि साझेदारी फर्म मुख्यतः छोटे एवं मध्यम स्तर के व्यापारियों एवं उद्यमियों द्वारा संचालित की जाती हैं। अतः छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को प्रोत्साहन देने तथा उन्हें औद्योगिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने हेतु साझेदारी फर्मों पर आयकर की दर घटाकर अधिकतम 20 प्रतिशत किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

13. केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी में 12 प्रतिशत एवं 28 प्रतिशत की स्लैब समाप्त किए जाने के पश्चात व्यापारी द्वारा पूर्व में 12 प्रतिशत एवं 28 प्रतिशत जीएसटी पर खरीदे गए माल को वर्तमान में 18 प्रतिशत अथवा 5 प्रतिशत की दर से बेचना पड़ रहा है, जिससे व्यापारियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस कारण व्यापारियों का लगभग 7 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक का इनपुट टैक्स क्रेडिट विभाग के पोर्टल पर लंबित पड़ा हुआ है, जो उनकी कार्यशील पूंजी को बाधित कर रहा है। अतः यह अत्यंत आवश्यक है कि उक्त लंबित आईटीसी राशि को बिना किसी विलंब के संबंधित व्यापारियों के बैंक खातों में तत्काल रिफंड/ट्रांसफर करने की व्यवस्था लागू की जाए।

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