नित्य संदेश ब्यूरो
नोएडा। राष्ट्रीय शिक्षा
नीति (NEP) 2020 और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ते हुए, प्रारंभिक
कक्षाओं में फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरसी को सुदृढ़ करना देश की एक प्रमुख प्राथमिकता
बना हुआ है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, आज लैंग्वेज एंड लर्निंग
फाउंडेशन (LLF) द्वारा टाटा ट्रस्ट्स के सहयोग से राष्ट्रीय टीचिंग लर्निंग
प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS) 2025 का शुभारंभ इंडिया हैबिटैट सेंटर, नई दिल्ली में
किया गया।
TLPS भारत का पहला बड़े पैमाने पर किया गया, बहु-राज्यीय अध्ययन है, जो यह समझने पर केंद्रित है कि प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया वास्तव में कैसे होती है। यह सर्वे केवल आकलन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत यह दिखाया गया है कि कक्षा 1 और 2 में भाषा और गणित को कैसे पढ़ाया जाता है, शिक्षक बच्चों को किस प्रकार सीखने में शामिल करते हैं, शिक्षण समय का उपयोग कैसे किया जाता है और कक्षाएँ कितनी समावेशी हैं। लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के नेतृत्व में और टाटा ट्रस्ट्स के सहयोग से किए गए इस सर्वे को फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरसी के क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख संगठनों—QUEST, माधी फाउंडेशन, विक्रमशिला एजुकेशन रिसोर्स सोसाइटी, सेंटर फॉर माइक्रोफाइनेंस और एजुकेशनल इनिशिएटिव्स—के साथ मिलकर लागू किया गया है। इस साझेदारी का उद्देश्य कक्षा में पढ़ाई कैसे हो रही है, इसे समझना और राज्यों को इन जानकारियों को ज़मीन पर लागू करने में सहयोग देना है।
सर्वे के शुभारंभ
अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा मंत्रालय से श्री संजय कुमार (IAS) सचिव,
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, उपस्थित
रहे। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग DoSEL की संयुक्त सचिव (समग्र शिक्षा-1 एवं वयस्क
शिक्षा) श्रीमती अर्चना शर्मा अवस्थी, दिल्ली सरकार के उच्च शिक्षा सचिव श्री पांडुरंग
के. पोले, हरियाणा के प्राथमिक शिक्षा महानिदेशक डॉ. विवेक अग्रवाल, एनसीईआरटी के समन्वय
डीन प्रो. श्रीधर श्रीवास्तव, टाटा ट्रस्ट्स की शिक्षा प्रमुख सुश्री अमृता पटवर्धन
और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. धीर झिंगरन
सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में श्री संजय कुमार ने कहा कि टीचिंग लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे के निष्कर्ष एक मजबूत साक्ष्य आधार प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि सर्वे के व्यापक आकार को देखते हुए इसके निष्कर्षों को देशभर की कक्षाओं में शिक्षण और सीखने की प्रथाओं का प्रतिनिधि माना जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा एक दो-तरफ़ा प्रक्रिया है, जिसमें बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा बनाए रखना और उन्हें पढ़ाई में सक्रिय रूप से शामिल करना बेहद आवश्यक है। अर्चना शर्मा अवस्थी ने इस अवसर पर बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को कक्षा के स्तर पर कैसे प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। उन्होंने प्रारंभिक कक्षाओं में आनंददायक और खेल-आधारित शिक्षण तथा बच्चों की परिचित भाषाओं के उपयोग पर विशेष जोर दिया।
TLPS 2025 को असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, मेघालय, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के 21 ज़िलों में 1,000 से अधिक सरकारी प्राथमिक स्कूलों की कक्षाओं में लागू किया गया। यह सर्वे अलग-अलग भाषाई और क्षेत्रीय परिस्थितियों में पढ़ाई की स्थिति को सामने लाता है और नीति और ज़मीनी काम के बीच के अंतर को समझने में मदद करेगा। इस अवसर पर अमृता पाटवर्धन ने कहा कि “TLPS एक अहम अध्ययन है, क्योंकि यह कक्षा 1 और 2 में भाषा और गणित की पढ़ाई को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि इसके निष्कर्ष शिक्षकों को बच्चों को अर्थ समझाकर पढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन देंगे।”
कार्यक्रम के दौरान
डॉ. धीर झिंगरन ने कहा कि “हमें बहुत खुशी है कि हमने कई संस्थाओं के साथ मिलकर भारत
का पहला राष्ट्रीय स्तर का शिक्षण अधिगम प्रक्रिया सर्वेक्षण पूरा किया है।
बच्चों की सीख तभी बेहतर हो सकती है जब वे पढ़ाई में सक्रिय रूप से शामिल हों। हमें
उम्मीद है कि यह रिपोर्ट देशभर में शुरुआती कक्षाओं में पढ़ाने और सीखने की प्रक्रिया
को बेहतर बनाने पर एक व्यापक चर्चा को जन्म देगी।”
इस कार्यक्रम में
असम, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों
के साथ-साथ एनसीईआरटी, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े
विशेषज्ञों की व्यापक भागीदारी रही। रिपोर्ट को उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों
से सराहना मिली, जो यह दर्शाती है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में इस तरह के अध्ययन
की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

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