नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। शोभित विश्वविद्यालय के विधि विभाग द्वारा “न्याय या पक्षपात? भारत में पुरुषों के विरुद्ध क़ानूनों के दुरुपयोग की पड़ताल” विषय पर एक ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में विद्हिवार्ता की संस्थापक डॉ. सौमि चटर्जी विशेषज्ञ वक्ता रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो-वाईस चांसलर डॉ. जयानंद के ज्ञानवर्धक संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने न्याय और समानता के मुद्दों पर खुली चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया। तत्पश्चात विभाग के समन्वयक डॉ. मोहम्मद आमिर ने औपचारिक अभिनंदन वक्तव्य किया और मुख्य अतिथि का संक्षिप्त परिचय। सत्र का संचालन डॉ. पल्लवी जैन ने किया और अंत में डॉ. अनुज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।दिया। विधि विभाग के सभी संकाय सदस्य और छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया I
अपने विचार रखते हुए डॉ. सौमि चटर्जी ने पुरुषों के साथ हो रहे जेंडर बायस (लैंगिक पक्षपात) के मुद्दे पर गहराई से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जेंडर इक्वालिटी का अर्थ जेंडर बायस नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि यद्यपि पितृसत्ता दुनिया की एक बड़ी समस्या है, परन्तु महिलाओं के उत्थान की आड़ में असंतुलन उत्पन्न हो रहा है। कई मामलों में पिताओं को बच्चों की अभिरक्षा (कस्टडी) नहीं मिलती और पिछले वर्षों में झूठी शिकायतों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अहं टकराव आज के समाज की एक गंभीर चुनौती बन चुका है।
डॉ. चटर्जी ने आगे कहा कि इन परिस्थितियों के कारण देश में आत्महत्या और अवसाद (डिप्रेशन) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अब समय आ गया है कि इस विषय पर खुलकर चर्चा हो और समाज में वास्तविक लैंगिक समानता स्थापित की जाए, जिसमें हर व्यक्ति को न्याय और निष्पक्षता मिले।
यह सत्र प्रतिभागियों के लिए न केवल जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि इसने एक महत्वपूर्ण और उपेक्षित मुद्दे पर संवाद की दिशा भी प्रशस्त की।
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