नित्य संदेश। रक्तदान करना केवल एक सामाजिक कर्तव्य ही नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। हर वर्ष राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमारा थोड़ा-सा त्याग किसी अंजान व्यक्ति के जीवन को बचा सकता है।
एक स्वस्थ व्यक्ति साल में चार बार और एक स्वस्थ महिला साल में तीन बार सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक बार का रक्तदान तीन मरीजों को जीवनदान देता है, क्योंकि रक्त को उसके विभिन्न घटकों में विभाजित करके अलग-अलग जरूरतमंदों तक पहुँचाया जा सकता है। आज के इस अवसर पर हम सबको यह संकल्प लेना चाहिए कि हम साल में कम से कम एक बार अवश्य रक्तदान करेंगे और इस संदेश को अपने परिवार और मित्रों तक भी पहुँचाएँगे, ताकि वे भी इस पुण्य कार्य में भागीदार बन सकें। रक्तदान से न केवल दूसरों का जीवन बचता है बल्कि दाता स्वयं भी मानसिक संतोष और आत्मिक आनंद का अनुभव करता है।
रक्तदान एक ऐसा उपहार है, जिसे न खरीदा जा सकता है और न ही बनाया जा सकता है। इसे केवल इंसान ही इंसान को दे सकता है। इसलिए, आइए हम सब आगे आएँ और कहें—“आओ चलो रक्तदान करें, किसी अंजान को जीवनदान करें।”
प्रस्तुति
प्रोफेसर डॉ. अनिल नौसरान
पैथोलॉजी विभाग
सरकारी मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
No comments:
Post a Comment