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Wednesday, September 24, 2025

जमशेदपुरी ने प्रेमचंद की परंपरा को कायम रखने का काम किया: डा. कासिम



-मासिक पत्रिका "गुल बूटे" और साप्ताहिक "अवामी राय" द्वारा "एक शाम असलम जमशेदपुरी के नाम" का आयोजन।

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। असलम जमशेदपुरी ने अपनी कथाओं "ईदगाह से वापसी" और "लैंडरा" के साथ-साथ "गौ दान से पहले" से साहित्यिक जगत को चौंका दिया है। असलम जमशेदपुरी ने प्रेमचंद की परंपरा को कायम रखने का काम किया है। आज ऐसे शिक्षकों की कमी है जो प्राचीन और आधुनिक परंपराओं को पुनर्जीवित कर रहे हैं और नए रचनाकारों को आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये शब्द प्रसिद्ध विद्वान डॉ. कासिम इमाम के थे, जो खिलाफत हाउस, बाईकला मुंबई में मासिक पत्रिका "गुल बूटे" और साप्ताहिक "अवामी राय" द्वारा आयोजित कार्यक्रम "एक शाम असलम जमशेदपुरी के नाम" में अपने अध्यक्षीय भाषण के दौरान दे रहे थे।

कार्यक्रम का उद्घाटन मुशीर अंसारी ने पवित्र कुरान की तिलावत के साथ किया गया। अध्यक्षता प्रसिद्ध विद्वान डॉ. कासिम इमाम ने की। सरफराज आरज़ू [प्रसिद्ध कवि, मुंबई] ने मुख्य अतिथि और डॉ. इरशाद स्यानवी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। संचालन "गुल बूटे" के संपादक फारूक सैयद ने किया। प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने अपनी सेवाओं से उर्दू क्षेत्रों को प्रभावित किया है। ऑनलाइन कार्यक्रमों का अस्तित्व, उर्दू विभाग से नई रचनाओं का प्रकाशन, सेमिनारों का आयोजन और अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय का उर्दू विभाग पूरे उर्दू जगत से परिचित हो रहा है। उर्दू विभाग के प्रवक्ता डॉ. इरशाद स्यानवी ने कहा कि आज "गुल बूटे" और "अवामी राय" के इस प्रतिष्ठित समागम में मैं ऐसी प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण हस्तियों को देख रहा हूँ जो अपने आप में एक संस्था का दर्जा रखती हैं। डॉ. सादिका नवाब सहर ने कहा कि प्रोफ़ेसर असलम जमशेदपुरी उर्दू में एक बड़ा नाम हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रोफ़ेसर असलम जमशेदपुरी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उर्दू को राजनीति से जोड़ने की ज़रूरत है। जब हमारे लोग राजनीति में नहीं होंगे, तो उर्दू की आवाज़ कौन उठाएगा? हमें वादा करना चाहिए कि हम उर्दू वाले उर्दू में भी उपलब्धियाँ हासिल करेंगे और राजनीति में भी रुचि दिखाएंगे। इस अवसर पर नूर काश्कर, सुलेमान, अब्दुल बारी, इम्तियाज गोरखपुरी, फरीद खान, असलम परवेज, असलम नवाब, नाजिया सिद्दीकी तथा उर्दू विभाग एवं मेरठ स्थानीय विभाग के डॉ. आसिफ अली, डॉ. शादाब अलीम, डॉ. अलका वशिष्ठ, मुहम्मद शमशाद, सईद अहमद सहारनपुरी, अफाक अहमद खान, सलीम सैफी, हाजी मुश्ताक सैफी, इंजीनियर रिफत जमाली ने प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी को बधाई दी।

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