डा. अभिषेक डबास
नित्य संदेश, मेरठ। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शोभित
विश्वविद्यालय के विधि संकाय में प्रो-बोनो क्लब द्वारा 'शक्ति
और कानून: भारतीय वैदिक न्यायशास्त्र और महिलाओं के अधिकारों की खोज' विषय पर एक गरिमामय और विचारोत्तेजक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। इस
अवसर पर उच्चतम न्यायालय के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड संदीप जिंदल ने मुख्य वक्ता के रूप
में अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का आयोजन विधि संकाय के निदेशक प्रो.
(डॉ.) प्रमोद कुमार गोयल के मार्गदर्शन में किया गया।
अपने
संबोधन में संदीप जिंदल ने भारतीय वैदिक न्यायशास्त्र की गहन व्याख्या करते हुए
बताया कि प्राचीन भारत कर्तव्य प्रधान था, जबकि औपनिवेशिक शासन ने इसे अधिकार प्रधान
बना दिया, जिससे नागरिक अपने कर्तव्यों से विमुख हो गए।
उन्होंने कहा कि वैदिक काल में नारी को शक्ति का स्वरूप माना जाता था, जहाँ शिक्षा, संपत्ति और सामाजिक निर्णयों में उनकी
पूर्ण भागीदारी थी। शोभित विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) वीके त्यागी ने कहा,
"सशक्त महिलाएँ न केवल समाज की आधारशिला होती हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका
निभाती हैं। वैदिक न्यायशास्त्र में नारी को शक्ति का प्रतीक माना गया है, और आज हमें इस विरासत को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है।
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