अनम शेरवानी
नित्य संदेश, मेरठ। स्वामी
विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान द्वारा विधिक
पेशे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय एक सामूहिक चर्चा का आयोजन किया गया। सामूहिक चर्चा
का आयोजन सुभारती विधि संस्थान के संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. वैभव गोयल भारतीय के मार्गदर्शन
में किया गया।
मूटकोर्ट एसोसिएशन की समन्वयक आफरीन अल्मास ने बताया कि इस परिचर्चा में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों द्वारा प्रतिभागिता की गई। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में क्रान्ति ला रही है, कानूनी उद्योग भी पेशे में एआई पारम्परिक प्रथाओं को बदलने, दक्षता बढ़ाने और कानूनी पेशेवरों की क्षमताओं का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस तकनीक में प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने, अनुसंधान करने और विश्लेषण में सुधार करने, न्याय तक पहुँच बढ़ाने और कानून के समग्र अभ्यास को बढ़ाने की क्षमता है। सुभारती विधि संस्थान के संकाय अध्यक्ष प्रो. डॉ. वैभव गोयल भारतीय ने कहा कि नई तकनीकी क्रान्ति से विद्यार्थियों को रूबरू कराने हेतु एआई विषय पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों द्वारा विषय के पक्ष-विपक्ष में अपने विचार रखे गए। विधि परास्नातक विद्यार्थी गौतम का मानना था कि एआई हमें बेहतर रिसर्च में मदद करेगा, साथ ही हमारी काबिलियत को भी बढ़ाएगा, ताकि हम समय की मांग को पूरा कर सके।
ओम ठाकुर (बीए.एलएल.बी.) ने कहा कि लॉ,
तर्को तथा सामान्य बुद्धिमत्ता पर चलता है, लेकिन विधिक पेशे में एआई का प्रयोग करने
से लॉजिक व कॉमन सेन्स का महत्व समाप्त हो जाएगा। कार्यक्रम में प्रो.डॉ. रीना बिश्नोई,
डॉ. सारिका त्यागी, डॉ. प्रेमचन्द्र, डॉ. अजय राज सिंह, एना सिसोदिया, सोनल जैन, अरशद
आलम, शिवानी, शालिनी गोयल, आशुतोष देशवाल तथा हर्षित आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बडी
संख्या में छात्र छात्रा उपस्थित रहे।

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