राहुल गौतम
नित्य संदेश, ग्रेटर नोएडा. वायु प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है, खासकर दिल की सेहत पर। जहरीली हवा न केवल फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि दिल की नसों को भी प्रभावित करती है। उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान प्रदूषण के बढ़ते स्तर हृदय रोगों और हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा और बढ़ा देते हैं।
डॉ. पंकज रंजन (निदेशक और वरिष्ठ सलाहकार, कार्डियोलॉजी, यथार्थ हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा) ने कहा, "दिल और फेफड़ों पर प्रदूषण का सीधा असर पड़ता है। जहरीली हवा में मौजूद कण खून की नसों को प्रभावित करते हैं, जिससे सूजन और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सही समय पर सावधानी और नियमित स्वास्थ्य जांच से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है।"
प्रदूषण में मौजूद छोटे कण, जैसे पीएम 2.5, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड, फेफड़ों के जरिए खून में घुलकर नसों में सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ाते हैं। ये कण धीरे-धीरे नसों में ब्लॉकेज का कारण बनते हैं, जिससे हार्ट अटैक, अनियमित धड़कन (अरिदमिया) और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण न केवल लंबे समय तक रहने वाले स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है, बल्कि छोटे समय के लिए भी इसकी चपेट में आने से दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल 20% दिल की बीमारियों से हुई मौतों का कारण वायु प्रदूषण है। भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
हर सर्दी में उत्तर भारत के शहर, जैसे दिल्ली-एनसीआर, प्रदूषण के गंभीर स्तर से प्रभावित होते हैं। पराली जलाने, वाहनों से निकलने वाला धुआं, इंडस्ट्रियल प्रदूषण और सर्दियों के मौसम के कारण हवा बेहद खराब हो जाती है। इस समय अस्पतालों में हृदय रोग और दिल के दौरे के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से हृदय रोग, डायबिटिक या हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोग सबसे अधिक खतरे में होते हैं।
प्रदूषण के बढ़ते खतरे से बचने के लिए लोगों को व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर जरूरी कदम उठाने चाहिए। बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल करना, एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) पर ध्यान देना, और घर में हवा को साफ रखने के एयर प्यूरीफायर अपनाना जरूरी है। संतुलित आहार लेना, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर हों। इसके साथ ही, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी समस्याओं को नियंत्रित रखने के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। ऐसे प्रयास न केवल प्रदूषण के दुष्प्रभावों को कम कर सकते हैं बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली भी सुनिश्चित कर सकते हैं।
सामूहिक प्रयासों में प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना, और पराली जलाने के विकल्प ढूंढना शामिल है। यह समस्या केवल आज की नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी बड़ा खतरा है। प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाकर और जागरूकता बढ़ाकर हम न केवल अपनी सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ वातावरण भी बना सकते हैं।
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