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Tuesday, December 3, 2024

सुभारती विश्वविद्यालय में हुआ फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन




अनुसंधान में नैतिकता का महत्व के विषय पर हुआ आयोजन

अनम शेरवानी 
नित्य संदेश, मेरठ। स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय के फैकल्टी डेवलपमेंट सेल ने ‘‘अनुसंधान में नैतिकता का महत्व’’ विषय पर एक संकाय विकास कार्यक्रम (फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम) का आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती के समक्ष डीन, फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट एवं कॉमर्स एवं चेयरपर्सन, यूनिवर्सिटी फैकल्टी डेवलपमेंट सेल प्रो.डॉ. आर. के. घई, लॉ कॉलेज के डीन प्रो.डॉ. वैभव गोयल भारतीय, प्रो. डॉ. रीना बिश्नोई के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

कार्यक्रम की संयोजिका प्रो.डॉ. रीना बिश्नोई द्वारा उपस्थित संकाय सदस्यों तथा अतिथियों का स्वागत किया गया। उन्होंने इस कार्यक्रम की रूपरेखा एवं महत्व के विषय में बताया।

प्रो.डॉ. आर.के. घई ने विश्वविद्यालय फैकल्टी डेवलपमेंट सेल के विषय में बताते हुए कहा कि इस सेल का गठन प्रेरित, ऊर्जावान और सक्षम संकाय के निमार्ण तथा संकाय सदस्यों के निरंतर और बहुआयामी विकास के उद्देश्य के साथ किया गया हैं। शिक्षण अधिगम अध्यापन की गतिशील प्रकृति को ध्यान में रखकर सभी विषयों में संकायों के सतत व्यावसायिक विकास पर कार्य करना इस सेल का प्रमुख उद्देश्य हैं।

अतिथि वक्ता प्रो.डॉ. वैभव गोयल भारतीय द्वारा ‘‘अनुसंधान में नैतिकता का महत्व’’ विषय पर अपने उद्गारों को व्यक्त करते हुए शोध (रिसर्च) क्या है के विषय में बताया। इसके बाद एक शोधार्थी को शोध करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य अग्रिम ज्ञान प्राप्त करना, नये विचार खोजना तथा पूर्व विद्वानों द्वारा छोड़े गए रिक्त स्थान/कमियों को अध्ययन तथा शोध द्वारा पूरा करना है। शोध में नैतिकता का महत्व के विषय में उन्होंने कहा कि नैतिकता से तात्पर्य आचरण तथा मानदण्ड माने ऐसे नियम जो सही और गलत के बीच अन्तर स्थापित करते हों, अर्थात् अनुसंधान नैतिकता शोध कर्ताओं के लिए सावधानी पूर्वक अनुसंधान करने के लिए दिशा-निर्देषों का एक सेट है जो यह बताता हैं कि शोध में क्या सही है और क्या गलत। अनुसंधान में नैतिक विचार ऐसे सिद्धांत हैं जो अनुसंधान विधियों और डिजाइनों को सूचित करते हैं। रिसर्च करते समय शोधार्थी को डेटा संग्रह करते समय, संभावित चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक उपचारों का मूल्यांकन करते समय और मानव व्यवहार की जांच करते समय, शोधार्थी को कठोर आचार संहिता का पालन करना चाहिए। ।
कार्यक्रम के अन्त में डॉ. प्रेमचन्द्र द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस फैकल्टी डेवलप्मेन्ट प्रोग्राम में विश्वविद्यालय के सभी संकायों के शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा बड़ी संख्या में प्रतिभागिता की गई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में सोनल जैन, शालिनी गोयल, आशीष सिरोही, रोबिन भारद्वाज तथा महिपाल आदि का विशेष योगदान रहा।

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