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Saturday, September 14, 2024

आज के दौर में टेक्स्ट से भावनाओं की पहचान करना बेहद जरूरी: प्रोफेसर सुरेश कुमार

मितेंद्र कुमार गुप्ता 
नित्य संदेश, मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में गणित विभाग और डीआरडीओ द्वारा आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के अंतिम दिन का आयोजन गणित विभाग के रामानुजन सभागार में किया गया। 

कार्यक्रम के प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट आफ रिसर्च एंड स्टडीज फरीदाबाद यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट के प्रोफेसर सुरेश कुमार रहे। जिन्होंने अपने वकतव्य में बताया कि आज के दौर में टेक्स्ट से भावनाओं की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है। यह न केवल व्यापार में सही निर्णय लेने में सहायक होता है, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में भी इसका महत्व बढ़ गया है। भावनाओं की पहचान डेटा माइनिंग, ई-लर्निंग, मनोविज्ञान, मानव-कंप्यूटर इंटरैक्शन, ग्राहक सेवा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे कई क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि डीप लर्निंग तकनीक, जैसे CNNs, RNNs और Transformers, भावनाओं की सटीक पहचान को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं। विभिन्न एंबेडिंग तकनीकों (Word2Vec, BERT, आदि) का उपयोग करके इन मॉडल्स की क्षमता को और मजबूत किया जा सकता है। 
कार्यक्रम की दूसरे सत्र के मुख्य वक्ता आई टी एस गाजियाबाद के प्रो. एस.के. पांडे रहे। इन्होने अपने वक्तव्य में सॉफ्ट कंप्यूटिंग और AI तकनीक में हुए नवीनतम नवाचारों और उनके व्यापारिक दुनिया पर प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि सॉफ्ट कंप्यूटिंग तकनीकों, जैसे फज़ी लॉजिक और न्यूरल नेटवर्क्स, ने जटिल समस्याओं का समाधान आसान बना दिया है। साथ ही, AI तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य सेवा, वित्त और स्वायत्त प्रणालियों में किया जा रहा है, जिससे व्यवसायिक प्रक्रियाओं में तेजी और सटीकता आ रही है। उन्होंने 5G और भविष्य के 6G नेटवर्क के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि कैसे ये संचार प्रौद्योगिकियां डेटा एक्सचेंज और कनेक्टिविटी को नए आयाम दे रही हैं। AI और सॉफ्ट कंप्यूटिंग का संयोजन उद्योगों में बेहतर निर्णय लेने और संसाधनों का अनुकूलन करने में मदद कर रहा है। इस सत्र ने उपस्थित लोगों को सॉफ्ट कंप्यूटिंग, AI और उन्नत संचार प्रणालियों में नवाचारों की गहरी समझ प्रदान की, जिससे वे अपने व्यवसायों में इन तकनीकों का लाभ उठा सकें। 

कार्यक्रम का तीसरा सत्र समापन समारोह रहा। समापन सत्र की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने मां सरस्वती का आह्वान किया। इसके बाद स्वागत संबोधन हुआ, जिसमें गणित विभाग के प्रोफेसर शिवराज सिंह ने विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एन के तनेजा, प्रोफेसर डी पांडे प्रोफेसर और एस सी अग्रवाल, अन्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। इसके बाद गणित विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर मुकेश कुमार शर्मा द्वारा कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें कार्यशाला के दौरान हुए विभिन्न सत्रों और चर्चाओं का सारांश दिया गया। रिपोर्ट में बताया गया कि कार्यशाला ने सॉफ्ट कंप्यूटिंग, AI और संचार प्रौद्योगिकियों में हो रहे नवीनतम नवाचारों और उनके अनुप्रयोगों पर गहन चर्चा की।

इसके बाद, विज्ञान संकाय की डीन, प्रो. जयमाला, ने अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यशाला न केवल अनुसंधानकर्ताओं के लिए ज्ञानवर्धक रही, बल्कि इसे उद्योग और शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आयोजकों की सराहना की। फिर विशिष्ट अतिथि और मुख्य अतिथि ने अपने विचार व्यक्त किए, जहां उन्होंने AI, सॉफ्ट कंप्यूटिंग और संचार प्रौद्योगिकी के भविष्य पर अपने विचार साझा किए और बताया कि इन तकनीकों का व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी प्रभाव होगा। समापन सत्र के अंत ने डॉक्टर संदीप कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया, जिसमें आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, और DRDO, नई दिल्ली का विशेष आभार प्रकट किया। 

अंत में राष्ट्रीय गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर सरू कुमारी ने किया। इस कार्यशाला ने सॉफ्ट कंप्यूटिंग, संचार और AI के क्षेत्रों में हो रहे अत्याधुनिक नवाचारों पर प्रकाश डालते हुए नई दिशा और दृष्टिकोण प्रदान किए।

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