सम्राट अशोक सुभारती स्कूल ऑफ़ बुद्धिस्ट स्टडीज एवं राहुल सांकृत्यायन सुभारती स्कूल ऑफ़ लिंग्विस्टिक्स एंड फॉरेन लैंग्वेज में हिंदी दिवस’ का आयोजन
अनम शेरवानी
नित्य संदेश, मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत सम्राट अशोक सुभारती स्कूल ऑफ़ बुद्धिस्ट स्टडीज एवं राहुल सांकृत्यायन सुभारती स्कूल का लिंग्विस्टिक्स एंड फॉरेन लैंग्वेज के संयुक्त तत्वाधान में ‘हिंदी दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ तथागत ध्यान केंद्र, सम्राट अशोक सुभारती स्कूल ऑफ़ बुद्धिस्ट स्टडीज, द्वितीय तल में आयोजित किया गया। इस सभागार में उपस्थित लगभग सभी छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
हिंदी भाषा के संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन परास्नातक हिन्दी प्रथम वर्ष की छात्रा श्रुति शर्मा ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ विधिवत रूप से दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण व स्वागत भाषण से हुआ। इसी श्रृंखला में सम्राट अशोक सुभारती स्कूल ऑफ़ बुद्धिस्ट स्टडीज संकाय अध्यक्ष डॉ. चम्पालाल मन्डरेले, भाषा विभाग अध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा ने अतिथियों को पादप एवं पटका का भेंटकर सम्मान प्रकट किया। कार्यक्रम की शुरुआत उल्लेखनीय रही। इस समारोह में ‘हिंदी संवाद थीम’ के तहत दो अनुकूल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। प्रथम ‘हिंदी स्वरचित कविता पाठ’ और द्वितीय ‘रोजगार में हिंदी भाषा की संभावनाएं’ (पक्ष/विपक्ष) विषय पर।
कार्यक्रम में लगभग 40 छात्रों ने भाग लिया। छात्रों ने अपनी स्वरचित कविता पाठ में अपनी रचनात्मकता और ज्ञान कौशल का प्रदर्शन किया, जबकि भाषण प्रतियोगिता में पक्ष और विपक्ष पर अपने विचार व्यक्त कर हिंदी के प्रति अपनी रुचि को जागृत की। इस आयोजन की मुख्य विशेषता में विभिन्न कॉलेज के छात्रों की सक्रिय भागीदारी शामिल थी, जिससे भाषा के प्रति छात्रों में उत्साह और एकता की भावना को बढ़ावा मिला। उल्लेखनीय रूप से प्रतियोगिता में नए और रचनात्मक दृष्टिकोण का स्वागत किया गया। छात्रों द्वारा ‘स्वरचित कविता पाठ’ एवं ‘वाद-विवाद’ की प्रस्तुति देकर हिंदी के प्रति प्रेम प्रकट किया।
भाषा विभाग की अध्यक्ष महोदय डॉ. सीमा शर्मा ने कहा कि हमारी मातृभाषा कण-कण में दिखनी चाहिए हमें विश्वविद्यालय, घर में व कार्यस्थल हर जगह हिंदी भाषा के महत्व को समझना चाहिए। जिससे छात्रों में अपनी भाषा के प्रति प्रेम व सम्मान बढेगा। हमें अपनी भाषा को एकजुट होकर आगे बढ़ाना होगा, जिससे यह प्रथम स्थान पर पूर्णता स्थापित हो सके।
सम्राट अशोक स्कूल ऑफ़ बुद्धिस्ट स्टडीज के संकाय अध्यक्ष डॉ. चम्पालाल मन्डरेले ने कहा कि विभिन्न प्रयोग ने हिंदी भाषा को और मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि साहित्य का लक्ष्य मातृभाषा विचार का संप्रेषण मात्र नहीं, अभी तो संवेदना, समझ, संस्कृति व सभ्यता तक पहुंचना है, जिसका सशक्त माध्यम हिन्दी है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नीरज कुमार (संयुक्त सचिव पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय भारत सरकार) ने कहा कि हमारे राष्ट्र का सम्मान में उसका अस्तित्व हिंदी भाषा के बिना अधूरा है। राष्ट्र को जीवित रखना है तो अपनी हिन्दी भाषा और संस्कृति को जीवित रखना होगा। उन्होंने गांधी जी की चर्चा करते हुए बताया कि गांधी जी हिंदी भाषा को लेकर गौरव महसूस करते थे। हिंदी में वह अपने विचारों की संप्रेषण में प्रभावशाली भी होते थे। हिंदी के उत्थान के लिए गांधीजी का जो योगदान है वह अतुल्य है। हम सभी को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए और हिंदी भाषा को आगे बढ़ाने के लिए और अधिक प्रयत्न करना आवश्यक है। हमारी भाषा में निखार तभी आएगा जब शिक्षक, लेखक व हिंदी की शुद्धता को लेकर व्यवसाय को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि अपने आप को हिंदी भाषा के उत्सव तक ही सीमित नहीं रखना है बल्कि प्रतिज्ञा भी लेनी चाहिए कि हमें अपनी भाषा बोलने में गर्व महसूस हो जिससे हमारी हिंदी भाषा को सम्मान व प्रतिष्ठा मिले। अपने वक्तव्य के अंत में कहा कि-
बाकी भाषा को मैंने महज किताबों में रखा,
हिंदी को सब जगह अपनी भावों में रखा।
अम्बेडकर विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आनंद वर्धन ने हिंदी के महत्व पर एक सारगर्भित भाषण दिया। उन्होंने भारत में विविध संस्कृतियों और क्षेत्रों को जोड़ने वाली एक एकीकृत भाषा के रूप में हिंदी की भूमिका पर जोर दिया। डॉ. वर्धन ने कहा कि कैसे हिंदी न केवल संचार के माध्यम के रूप में बल्कि समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के वाहक के रूप में भी काम करती है। उन्होंने भारत की पहचान को संरक्षित करते हुए वैश्विक दुनिया में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए, शिक्षा और प्रौद्योगिकी में हिंदी को बढ़ावा देने को प्रोत्साहित किया। उनका भाषण दर्शकों को बहुत पसंद आया और उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी को अपनाने और बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता दोनों सत्रों का जज के रूप में भूमिका भाषा विभाग की सहायक आचार्य डॉ. आशीष कुमार ‘दीपांकर’, डॉ. अनुज बावरा एवं सम्राट अशोक स्कूल आफ बुद्धिस्ट स्टडी के सहायक आचार्य डॉ. श्रीदा झा ने निष्पक्ष रूप से किया। न्याय की सही पद्धति आपनाते हुए प्रतियोगिता में सफल छात्रों की घोषणा की गई। जिसमें ‘हिंदी स्वरचित कविता पाठ’ प्रतियोगिता में फिजियोथेरेपी के छात्र मंदीप यादव ने प्रथम स्थान, विधि कॉलेज की छात्रा सृष्टि सिरोही ने द्वितीय स्थान एवं पुस्तकालय विभाग की छात्रा पुनूम सिंह तृतीय स्थान प्राप्त किया। ‘रोजगार में हिंदी भाषा की संभावनाएं’ (पक्ष/विपक्ष) बहस प्रतियोगिता में फिजियोथेरेपी के छात्र पीयूष अग्रवाल ने प्रथम स्थान, भाषा विभाग की छात्रा समिया सिद्धिकी ने द्वितीय स्थान एवं पत्रकारिता विभाग की छात्रा वर्षा राज तृतीय स्थान प्राप्त किया।
अंत में भाषा विभाग की अध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस कार्यक्रम को अंतिम रूप से सफल बनाने में डॉ. ज़ेना चुंग, आई.के.बी.सी.आई. से श्री ए.के. सिन्हा के साथ डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. यशपाल शर्मा, डॉ. मनीषा लूथरा, सुश्री स्वाति शर्मा, डॉ. रणवीर सिंह, डॉ. आशीष कुमार 'दीपांकर', डॉ. अंजू बावरा, डॉ. रफत खानम और डॉ. फरहा हाशमी तथा सम्राट अशोक स्कूल ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के संकाय सदस्य में डॉ. प्रवीण, डॉ. विवेक, डॉ. संजय कुमार, डॉ. श्रीदा झा, डॉ. शरणपाल सिंह ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया।
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