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Friday, September 6, 2024

आध्यात्मिकता और मानसिक स्वास्थ्य कल्याण पर अतिथि व्याख्यान

नित्य संदेश ब्यूरो 
मेरठ। डिपार्टमेंट ऑफ़ लिबरल आर्ट्स एंड हुमानिटीज़ एवं गणेश शंकर विद्यार्थी सुभारती डिपार्टमेंट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास्स कम्युनिकेशन, फैकल्टी ऑफ़ आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज, स्वामी विवेकानंद सुभारती यूनिवर्सिटी मेरठ में एक विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें "आध्यात्मिकता और मानसिक स्वास्थ्य कल्याण" के महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि वक्ता के रूप में जाने-माने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ राहुल बंसल, डायरेक्टर वैलनेस सेण्टर सुभारती यूनिवर्सिटी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

डॉ नियति गर्ग ने सबका स्वागत करते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ किया| विभागाध्यक्ष डॉ मनोज कुमार त्रिपाठी ने डॉ राहुल बंसल को पौधा भेट कर उनका विधिवत स्वागत किया और अपने स्वागत भाषण में बताया कि इस व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य छात्रों और शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करना और उन्हें आध्यात्मिकता के माध्यम से मानसिक कल्याण प्राप्त करने के तरीके समझाना है। डॉ सरताज अहमद, प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ़ लिबरल आर्ट्स एंड हुमानिटीज़ ने डॉ बंसल का परिचय दिया और उनकी उप्लभ्धियों से सबको अवगत कराया|

डॉ. राहुल बंसल ने अपने व्याख्यान में आध्यात्मिकता और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिकता केवल धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-जागरूकता, आंतरिक शांति, और सकारात्मक सोच के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा, "आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में मानसिक शांति की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। आध्यात्मिकता मानसिक तनाव को कम करने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।"

डॉ. बंसल ने आध्यात्मिकता के सात नियमो के बारे में बताया। उन्होंने इस बात पर सबका ध्यान दिलाया कि हम शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से भले ही बदल जाएँ लेकिन फिर भी हम सबमे कुछ ऐसा होता है जो कभी नहीं बदलता और वो है हमारा सूक्ष्म शरीर| उन्होंने एनडीई अर्थात नियर डेथ एक्सपीरियंस के बारे में भी चर्चा की और यह भी बताया कि इस अनुभव को पाने वाले लोगो के व्यवहार और व्यक्तित्व में कितना परिवर्तन आया है|

डॉ. बंसल ने पुनर्जन्म के बारे में बताते हुए सभी को इयान स्टीवेन्सन जो कि कनाडाई-अमेरिकी मनोचिकित्सक हैं के बताये तथ्य से प्रोत्साहित किया कि भाग्य कभी भी 100% निश्चित नहीं होता है, इसे आप और केवल आप बदल सकते हैं और कोई अन्य व्यक्ति नहीं| डॉ. बंसल ने बताया कि ईश्वर के अस्तित्व को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है| मैक्स प्लैंक, जो क्वांटम यांत्रिकी के जनक हैं, की ‘थ्योरी ऑफ़ एवरीथिंग’ के अनुसार प्रत्येक परमाणु के पीछे चेतना है, और चेतना का स्रोत ईश्वर है| इसलिए गहन प्रार्थना कभी विफल नहीं जाती| इसका प्रमाण बहुत से चिकित्सा अनुसंधानो में मिलता है जहाँ वो मरीज जल्दी ठीक होते दिखें हैं जिन्होंने औषधि के साथ प्रार्थना भी की है| क्युकी प्रार्थना करने से हमारे विचार सकारात्मक होने लगते हैं और इससे हमारे अंदर औषिधि का प्रभाव तीव्र होता है|

अंत में डॉ बंसल ने बहुत ही रोचक तरीके से हिंदी सिनेमा के वह पुराने गाने सुनाये जो मनुष्य के अंदर सकारात्मकता और आध्यात्मिकता भरते हैं और उन्हें वास्तविकता से जोड़ कर रखते हैं| डॉ बंसल के साथ सभी बच्चो और शिक्षकों ने भी वह गाने गए|

कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने कई सवाल पूछे और डॉ. बंसल ने उनका उत्साहपूर्वक उत्तर दिया। उन्होंने ध्यान, प्रार्थना, और सकारात्मक सोच के महत्व पर जोर दिया और सुझाव दिया कि दैनिक जीवन में इनका अभ्यास करने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है।

डिपार्टमेंट ऑफ़ लिबरल आर्ट्स एंड हुमानिटीज़ की सह - प्राध्यापक डॉ मोनिका मेहरोत्रा ने धन्यवाद् ज्ञापन दिया और इस ज्ञानवर्धक व्याख्यान के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने खुशी और सफलता की राह में आने वाली आध्यात्मिक बाधाओं को दूर करने की एक हवाई पद्धति होपोनोपोनो पद्धति के बारे में बताया। होपोनोपोनो पद्धति में चार प्रार्थनाएं या मंत्र शामिल हैं: मैं आपसे प्यार करता हूं, मैं क्षमा प्रार्थी हूँ, मुझे क्षमा करें, धन्यवाद। उन्होंने सभी छात्रों को इसका अभ्यास भी कराया|

यह व्याख्यान सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ। प्रतिभागियों ने आध्यात्मिकता और मानसिक स्वास्थ्य कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम समन्वयक डॉ नियति गर्ग और विभाग का धन्यवाद किया। कार्यक्रम के अंत में छात्रों और शिक्षकों ने इस तरह के और भी व्याख्यानों की मांग की ताकि मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिकता के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त हो सके।

कार्यक्रम में मंच सञ्चालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ नियति गर्ग ने किया| कार्यक्रम में डिपार्टमेंट ऑफ़ लिबरल आर्ट्स एंड हुमानिटीज़ एवं गणेश शंकर विद्यार्थी सुभारती डिपार्टमेंट ऑफ़ जर्नलिज्म एंड मास्स कम्युनिकेशन के सभी शिक्षकों, गैर शिक्षण कर्मचारी और ५० छात्रों ने प्रतिभाग किया| l

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