नित्य संदेश
स्त्री हो तुम...
स्त्री हो तुम,
संघर्ष करो और श्रृंगार भी,
भरो हाथों में मेंहदी के रंग भी,
जरूरत पड़े तो उठाओ तलवार भी।
स्त्री हो तुम,
सृजन तुम्हारा अधिकार है,
ममता से रहो पूर्ण सदा,
समय पर करो दुष्टों का संहार भी।
स्त्री हो तुम,
मर्यादा को करो शिरोधार्य,
आंच आए तुम पर अगर,
कुंठित न हो करो तिरस्कार भी।
स्त्री हो तुम,
विवेकी बनो सरस्वती सी,
सौम्य भी रहो लक्ष्मी सी,
गलत प चंडी सी विकराल भी।
स्त्री हो तुम,
करो जीवन भर बड़ो का सत्कार,
हमउम्र और छोटो से सद्व्यवहार,
पर खुद से अभद्रता का करो प्रतिकार भी।
हां स्त्री हो तुम
समर्पण है स्वभाव तुम्हारा ,
मगर मत भूलो खुद से करना प्यार भी,
क्योंकि ईश्वर की सबसे सुंदर रचना हो तुम,
स्त्री हो तुम !!!
रविंद्र तंवर "सूर्योदय"
बड़वाह (म. प्र.)


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