नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के अंतर्गत गठित स्थाई लोक अदालत एक निशुल्क व त्वरित न्याय प्रदान करने का एक माध्यम है, स्थाई लोक अदालत की स्थापना एक अध्यक्ष व दो सदस्यों वाली स्थाई संस्था के रूप में की जाती है। अदालत में वादों का निस्तारण वादकारियों के आपसी समझौते के आधार पर किए जाते हैं।
वादकारियों में आपसी सुलह समझौता न होने की स्थिति में अधिनियम की धारा 22(c) में दी गई संक्षिप्त प्रक्रिया के आधार पर वादों का निस्तारण गुण दोष के आधार पर किया जाता है। स्थाई लोक अदालत में लोक उपयोगी सेवा जैसे वायु, सड़क, जल मार्ग से संबंधित, बीमा, सेवा, शैक्षिक संस्थान डाक, तार, बिजली, लोक स्वच्छ प्रणाली व आवास व भू संपदा से संबंधित एक करोड़ तक के मूल्य के वादों को आयोजित किया जाता है, अदालत की प्रक्रिया सरल व संक्षिप्त है जैसे नैसर्गिक न्याय निष्पक्षता साम्या और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है मेरठ जनपद में स्थाई लोक अदालत का गठन 2010 में किया था, वर्तमान में स्थाई लोक अदालत में अध्यक्ष पद पर रीता सिंह वह सदस्य पद पर अनीता राणा व डॉक्टर अलका सिंह कार्यरत हैं।
माह फरवरी 2024 से न्यायालय का कोरम पूरा है, उसके द्वारा अब तक बीमा स्वास्थ्य शिक्षा विद्युत से संबंधित अनेक वादों का निस्तारण कर चुकी है। शुक्रवार को पूरे भारत में राष्ट्रीय लोक अदालत का सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें स्थाई लोक अदालत मेरठ में पांच वादों का निस्तारण राष्ट्रीय लोक अदालत में पक्षकारों के आपसी समझौतों के आधार पर किया गया, जिसमें कुल 609524 रुपए क्षतिपूर्ति के रूप में दिलाए गए, उक्त वाद बीमा, शिक्षा, व बिजली विभाग से संबंधित थे।
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